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मन्दसौर हस्त शिल्प मेले में उमड रही है जनता

Story Highlights

  • खिलौनों को वरदान है घर में सुख-समृद्धि का
  • हर कदम पर साथ देने वाली चरण पादुका

मन्दसौर। तनाव से शांति, तंगी से मुक्ति और आनंद का पर्याय खिलौने भी बन सकते हैं यह बात मेले में बिक रहे दुधि के खिलौने से सिद्ध हो जाती है। संत रविदास मप्र हस्तषिल्प विकास निगम की उत्सव गाार्डन हाल राम टेकरी में चल रही प्रदर्षनी में रखे कई खिलौने के हैं। यह खिलौने हाथ से बनाए गए हैं और चित्रकूट में पैदा होने वाली दूधि लकड़ी के है। इन खिलौनों की कीमत बहुत कम हैं। आरामदायक कदम से मंजिल देने वाले शुद्ध चर्मिका के बने जूते-चप्पल केवल हस्तशिल्प मेले में ही मिल रहे हैं।


प्रदेष के हस्तषिल्पियों एवं बुनकरों द्वारा उत्पादित सामग्री को बाजार दिलाने के उददेश्य से उत्सव गाार्डन हाल राम टेकरी में 12 दिवसीय हस्तषिल्प मेला प्रदर्षनी का आयोजन जारी है। मेला प्रभारी श्री दिलीप सोनी ने बताया कि दूधि लकड़ी की महिमा का गुणगान करते हुए इसके पीछे चली आ रही पुरानी रोचक और लाभदायी कहानी के बारे में बताया कि दूधि लकड़ी के खिलोने बेचने के लिए लोधी समाज के लोग ज्यादा विख्यात है। माना जाता है कि भगवान श्री राम वनवास के दौरान चित्रकूट में पहुॅंचे तो वहां के निवासी लोधी समाज के लोगों ने श्री राम की बहुत सेवा की। चित्रकूट में दूधि के वृक्ष अधिक है और लोधी समाज के लोग दूधि वृक्ष की लकड़ी से सुंदर खिलोने बनाकर अपनी आजीविका चलाते हैं। यह बात श्री राम को अच्छी लगी और लोधी समाज के लोगों की सेवा से प्रसन्न होकर उन्होंने समाज के लोगों को खिलोने बनाकर बेचने और उससे अजीवन आजीविका मिलने का वरदान दिया, लेकिन साथ ही यह भी आषीर्वाद प्रदान किया कि दूधि लकड़ी के बने खिलोने घर में रखने पर घर में हमेषा समृद्धि बनी रहेगी। बस इसी आषीर्वाद का प्रताप है कि आज तक लोधी समाज के लोग इस षिल्प को लगातार बढ़ा रहे हैं और दूधि लकड़ी से बने यह खिलोने लोगों को समृद्धषाली बना रहे हैं। टाउन हाल में चित्रकूट से विभिन्न प्रकार के खिलोने लेकर आए षिल्पी मुकेष लोधी ने बताया कि यह खिलोने दिखने में आकर्षक, सुंदर तो ही साथ ही बच्चों के लिए किसी भी दषा में नुकसानदायक नहीं है। वर्तमान समय में यह समाज बच्चों के लिए ट्रेन, पंखे, फिरकी, लटटू, बेलन, विंडचेम व कई उपयोगी सामग्री का विक्रय किया जा रहा है।

श्री सोनी ने बताया कि धार जिले के दूधि ग्राम से आए षिल्पकार प्रमोद पल्ले के बारे में बताया कि मप्र षासन द्वारा दूधि ग्राम में चर्म षिल्पकारों के लिए 1997-98 में 20 करोड़ रुपए में चर्मषिल्प परिसर का निर्माण किया। इसके साथ ही षिल्पकारों को विभिन्न प्रकार के औजार व उपकरण भी प्रदान किए। इसका लाभ यह हुआ कि दुधि के कलाकारों को अब इंदौर या आगरा जाने की जरूरत नहीं होती है और अधिकांष कार्य दूधि में ही संपन्न हो जाता है। षासन इन षिल्पकारों को समय-समय पर डिजाईनरों की मदद भी उपलब्ध करवा रहा है। षुद्ध रूप से चर्म की षिल्पकारी से बनने वाली सामग्री की मांग अब महानगरों में भी की जाने लगी है। श्री पल्ले ने बताया कि उनके द्वारा निर्मित जूते, चप्पल आदि सामग्री गुणवत्ता वाली होने से हर प्रदर्षनी में ग्राहक उसकी मांग करते हैं। श्री सोनी ने बताया कि प्रदर्षनी उत्सव गाार्डन हाल राम टेकरी में 22 मई 2017 तक जारी है। सुबह 11 बजे से रात्रि 9 बजे तक ग्राहक अपनी सुविधा अनुसार प्रदर्षनी का भ्रमण कर पसंदीदा वस्तु क्रय कर सकता है।

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