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मन्‍दसौर विधायक के विधानसभा में उठे सवालों से हुए सितामऊ के सीईओ सहित तीन अधिकारि हुए तत्काल निलंबित

सहायक आयुक्त उज्जैन ने की थी जांचरू: विधायक सिसौदिया ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से इस मामले को मध्यप्रदेश विधानसभा में उठाते हुए कहा कि जनपद पंचायत सीतामऊ के सीईओ द्वारा की गई आर्थिक अनियमितता को लेकर 7 मार्च 2017 को अतांराकिंक प्रश्न के उत्तर में नियम विरुद्ध परफार्मेन्स गारंटी राशि से विद्युत पंप, मोटर, केबल, पाईप को जनपद पंचायत के अधिकारियों ने खरीदा। जिसकी जांच सहायक आयुक्त उज्जैन ने की। इस संबंध में आयुक्त के निर्देशानुसार संयुक्त आयुक्त द्वारा कलेक्टर मंदसौर को पत्र 2 मार्च 2017 को प्रेषित किया गया। इसमें जनपद सीईओ को आर्थिक अनियमितता में प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया तथा सीईओ के विरुद्ध नियम विरुद्ध कार्य करने के लिए निलंबन की कार्रवाई करने के लिए कहा गया। किन्तु विभाग द्वारा संबंधित अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

प्रस्ताव पारित कराकर यह सामान किया क्रय
विधायक सिसौदिया के इस ध्यानाकर्षण पर मंत्री भार्गव ने कहा कि जनपद पंचायत सीतामऊ को वर्ष 2015-16 में राज्य वित्त आयोग अंतर्गत 100 करोड़ रुपए की राशि प्रदाय की गई है इस धनराशि से जनपद पंचायत के निर्वाचित सदस्यों के विकल्प पर उनके निर्वाचन क्षेत्र में अधोसंरचना विकास कार्य कराने के निर्देश है। अध्यक्ष जनपद पंचायत सीतामऊ की अध्यक्षता में आयोजित सामान्य प्रशासन समिति की बैठक 30 अप्रैल 2016 में प्रस्ताव पारित कराकर सीईओ सीतामऊ ने एमपी एग्रो भोपाल से 48 ग्राम पंचायतों में पेयजल व्यवस्था के लिए विद्युत मोटर, पाईप, पानी की टंकी एवं केबल राशि रुपए 72.42 लाख के चार पेयजल टेंकर राशि रुपए 5.84 लाख के एवं एक कम्प्यूटर राशि रुपए 52 हजार 250 का क्रय किया गया।

टेलीफोन बिल का भी कर दिया भुगतान
साथ ही जनपद पंचायत सीतामऊ का टेलीफोन बिल 3 लाख 58 हजार 448 रुपए का भुगतान भी इसी राशि से किया गया। मंत्री भार्गव ने कहा कि इस मामले की जांच मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मंदसौर द्वारा करवाई गई। इसमें उपरोक्त गंभीर वित्तीय अनियमितता के लिए सीईओ जनपद सीतामऊ पीसी पाटीदार, जनपद के सहायक लेखाधिकारी मोतीसिंह राठौर और खण्ड स्तरीय अनवेक्षक मनीष मोरी को दोषी पाया गया है तीनों अधिकारियों के विरुद्ध फरवरी-2017 में विभागीय जांच भी बिठा दी गई है। विधायक सिसौदिया ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को नियमों का ज्ञान नही होता है अधिकारियों का काम होता है उन्हें नियमों से अवगत कराना लेकिन जनपद पंचायत के सीईओ ने जनपद पंचायत की सामान्य प्रशासन समिति के सदस्यों को भी अंधेरे में रखा और मनमानी कर ली। सिसौदिया ने कहा कि 48 ही ग्राम पंचायतों में एक ही आकार के पाईप खरीद लिए गए जबकि हर जगह की स्थिति अलग-अलग होगी यहीं नही इस मत से जनपद पंचायत के लाखों रुपए के टेलीफोन बिल को भरा जाना भी पूरी तरह से नियम विरुद्ध है।

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