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मन्‍दसौर शहर पर मंडरा रही है मौत

शहर की जनता कॉलोनी के पास से लेकर चंबल कॉलोनी तक करीब एक से डेढ़ किलोमीटर लंबे भाग में बसी झुग्गी बस्ती अचानक नहीं बसी है। वरन उसे विस्तारित होने में कई साल लगे। इसके बाद भी 33 हजार से लेकर 11 हजार केवी की उच्च दाब वाली बिजली लाइनें के नीचे निर्माण करने से प्रशासन ने नहीं रोका। यहां हालात ये हैं कि यदि किसी आपदा के कारण लाइनों को नुकसान हुआ तो हजारों लोगों की जान खतरे में होगी।

बिजली लाइनों से छेड़छाड़ कर रहे हैं लोग
शहर के कई इलाकों में हाईटेंशन लाईन गुजर रही है। शहर की घनी बस्तियों में कई लोगों के मकान हाईटेंशन लाईन के नीचे बने हुए है। वहीं शहर में हर वार्ड में कई लोग बिजली लाईनों से छेड़छाड़ कर रहे है। शहर में हाईटेंशन लाईन के कारण कई हादसे हो चुके है। कई लोगों की जान जा चुकी है। कुछ अरसे पहले औद्योगिक क्षेत्र में हाईटेंशन लाईन के कारण दो किशोरों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी न आमजन जागरूक हुआ है और नहीं जनप्रतिनिधि। विद्युत सुरक्षा विभाग व बिजली कंपनी लापरवाह बने हुए है। वहीं प्रशासन, नगरपालिका व बिजली कंपनी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर इतिश्री कर लेते है।

असुरक्षित है औद्योगिक क्षेत्र
शहर का औद्योगिक क्षेत्र बेहद असुरक्षित हो गया है। यहां न उद्योग विभाग का नियंत्रण दिखता है और नहीं विद्युत सुरक्षा विभाग की कोई सुनता है। कई फैक्ट्रियां भी बिजली लाईनों के नीचे बनी हुई है। इन पर हर समय बिजली करंट का खतरा बना रहता है। शहर की इंदिरा झुग्गी बस्ती, संजीत रोड़, जनता कॉलोनी से लेकर औद्योगिक क्षेत्र तक करीब डेढ़ किलोमीटर लंबाई में बसी है। यहां एक-एक करके अब तक 700 से अधिक मकान बन चुके है। करीब सभी मकान एक-दूसरे से सटे हुए है। ऐसे में बिजली लाईने का करंट फैलने या फॉल्ट होने पर हजारों लोगों की जान सासंत में पड़ सकती है।

हाईटेंशन लाइन के नीचे हैं कई फैक्ट्रियां
प्लास्टिक व वेस्ट पेपर गोडाउन के बाईं और सटे हुए प्लाट पर बारदान बनाने की फैक्ट्री है। दार्इं और आरा मशीन है इसके कुछ दूरी पर फर्नीचर बनाने की फैक्ट्री है। यह सब फैक्ट्रियां 132 केवी हाईटेंशन लाईन के नीचे है। इतनी जबरदस्त लापरवाही के बाद भी कोई जवाबदारी लेने को तैयार नहीं।

विद्युत सुरक्षा विभाग का कहना
किसी भी विद्युत लाइन के नीचे फैक्ट्री या गोडाउन या अन्य मकान निर्माण नहीं किया जा सकता। यदि पहले से ही निर्माण है तो बिजली लाइन उस निर्माण के ऊपर से नहीं निकाली जा सकती। जो भी मामले की जांच क र संबंधितों को नोटिस दिया जाएगा। वे यह भी जांच करेंगे कि कहीं और उद्योग तो बिजली लाईन के नीचे नहीं चल रहे हैं। बिजली लाईनों से छेडछाड़ कर उसमें पीवीसी पाईप लाईन लगाना या अन्य कोई अवरोधक लगाना गलत है। विद्युत सुरक्षा अधिनियम का उल्लंघन करने वालों को हम नोटिस देते है। शहर में सर्वे कराकर नियम विपरित कार्य करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
– उमेश चंद्रवाल, सहायक यंत्री, विद्युत सुरक्षा विभाग
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उद्योग विभाग के अधिकारी ने कहा…
हाईटेंशन लाईन के नीचे फैक्ट्रियां नहीं होनी चाहिए। यहां प्लाट पहले आंवटित हुए और हाईटेंशन लाइन बाद में बिछी होगी।
– राजेश गार्गव, महापं्रबधक, उद्योग विभाग
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बिजली कंपनी के अधिकारी ने कहा…
हाईटेंशन लाईन बरसों पुरानी है। उद्योग विभाग ने हाईटेंंशन लाईन के नीचे प्लाट आवंटित किए, यह गलत है। उन्होंने कहा कि सैकड़ों मकान भी हाईटेंशन लाईन के नीचे बने हुए है। लोग खतरा उठाकर इन लाईनों के नीचे मकान बना लेते है। जो कि बहुत गलत है। बिजली लाइनें मानक के अनुसार बिछी है। लोगों ने अतिक्रमण कर बिजली लाइनों के पास तक गैलरियां बना ली है। इसके बाद भी लोग बिजली लाईनों से यदि छेड़छाड़ करते है तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
– आरके नायर, संभागीय यंत्री, बिजली कंपनी

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नगरपालिका के अधिकारी का कहना…
लोगों को हाईटेंशन लाईन के नीचे मकान निर्माण की अनुमति नहीं देते है। शहर में विद्युत लाइनों के ठीक पास गैलरी बनाने की अनुमति भी नहीं देते है। कई लोग बगैर अनुमति के मकान या गैलरी निर्माण कर लेते है। समय-समय पर ऐसे लोगों के खिलाफ नगरपालिका कार्रवाई करती है।
– हिमांशु भट्ट, सीएमओ, नगरपालिका

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