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 मसासामायिक का महत्व समझो प्रतिदिन सामायिक करो- गणिवर्य प्रसन्नसागर मसा

मंदसौर। जैन धर्म व दर्शन में सामायिक की क्रिया की विशेष महत्ता बतायी गयी है भगवान महावीर ने सामायिक करनेवाले श्रावक श्राविका को बहुत पुण्यशाली बताया । सामायिक का अर्थ है समता की साधना, इस क्रिया में जैन श्रावक श्राविका एकान्त भाव में रहकर तीर्थकरों व धर्म का चिंतन करते है जो व्यक्ति महान पुण्यकर्म का संचय करता है भगवान महावीर ने पुण्य ने पुण्य श्रावक जो प्रतिदिन सामायिक करता था उसे महान श्रावक बताया है।  उक्त उदगार परम पूज्य जैन संत श्री प्रसन्नसागरजी मसा ने कहे ।  आपने शुक्रवार को तलेरा विहार स्थित चितपुण्य आराधना भवन में आयोजित धर्मसभा में कहा कि यदि हम सच्चे जैन धर्म के उपासक है तो सर्वप्रथम हमे सामायिक का महतव समझना पडेगा। प्रतिदिन सामाजिक करना जैन धर्म के श्रावक श्राविकाओं का प्रथम कर्तव्य होना चाहिए। आजकल हम प्रतिदिन समय  न ही होने की बात करते है उतने समय में हम सामायिक कर सकते है लेकिन हम ऐसा नही करते है। धर्मसीाा में साध्वी श्री अर्हमव्रताश्रीजी मसा सहित बडी संख्या में श्रावक श्राविकाओं नेसंतश्री की अमृतमयी वाणी का श्रवण किया।

मनुष्य अपने कसायो को नियंत्रित रखे- साध्वी श्री मृदुप्रियाश्रीजीमनुष्य अपने कसायो को नियंत्रित रखे- साध्वी श्री मृदुप्रियाश्रीजी

मंदसौर। मनुष्य जीवन में कसाय सदैव हानि ही पहुचाते है, लोग क्रोध, मोह, काम वासना ऐसे कसाय है जो यदि जीवन में हावी हो जाये तो मनुष्य का जीवन पतन की ओर अग्रसर हो जाता है। मनुष्य को चाहिए कि वह कसायों को नियंत्रित रखे यदि जीवन में कसाय नियंत्रण से बाहर हो गये तो व्यक्ति का पतन होा तय है। उक्त उदगार परम पूज्य श्री मुक्तिप्रियाश्रीजी मसा आदिठाणा 7 की पावन निश्रा में आयोजित धर्मसभा में साध्वी श्री मृदुप्रियाश्रीजी मसा  ने कहे। आपने शुक्रवार को रूपचॉद आराधना भवन में आयोजित धर्मसभा में कहा कि यदि किसी से कहा सुनी हो जाये तो मन में दूसरे व्यक्ति के प्रति बैर रखने की बजाय क्षमापना करो। और यदि क्षमा मांगने में शरम आती है तो अंग्रेजी का  एक शब्द सॉरी तो कहही सकते है। लेकिन क्षमापना नही या सॉरी भी कहा तो दूसरे व्यक्ति के मन में आपके प्रति भी बैर भावना बनी रहेगी और आपकी बोलचाल बंद हो जायेगी और परिस्थति शत्रुता में बदल जायेगी। जैन साधु साध्वीयों को आहार विरात समय विवके रखे- धर्मसभा में साध्वी श्री मृदुप्रियाश्रीजी मसा ने पिण्डनियुक्ति शास्त्र का महत्व व उसका सार समझाते हुए कहा कि इस शास्त्र में आहार विराते समय जो दोश लग सकते है उनका वर्णन है 16 दोष श्रावक श्राविका एवं 16 दोष साधु साध्वी के अविवेक से लग सकते है। इसलिये जीवन में जैन साधु साध्वी को आहार विराते समय पूर्ण विवेक रखो ताकि उन्हे आहार विराने का पूर्ण फल आपकों मिले तथा आपकों किसी भी प्रकार का दोष नही लगे। 13 सितम्बर को माणिभद्रजी का महापुजन होगा- साध्वीगणो की पावन निश्रा में दिनांक 13 सितम्बर शनिवार को मणिभद्रजी के प्राकट्स दिवस के उपलक्ष्य में गणिभ्रदजी का महापुजन होगा। प्रात 8बजे से रूपचॉद आराधना भवन में मणिभद्रजी की पूजा की जायेगी। धर्मालाभ ले यह आ्रगह श्रीकेशरियसा आदिनाथ श्रीसंघ ने की। 14 सितम्बर को मॉ सरस्वती की धर्मसाधना होगी- साध्वीगणो  की पावन  प्रेरणा से दिनांक 14 सितम्बर रविवार को प्रात 8 बजे मॉ सरस्वति की धर्मसाधना हेतु विशेष पूजा एव महाअनुष्ठान होगा। धर्मालुजन सहभागीता कर धर्मालाभ ले।

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