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महाविद्यालय के पूर्व छात्रोंने नेक टीम को बताई विकास की संभावनाऐ

जहा पढ़े वहीं के विकास में भागीदार बनने का मिला मौका

मंदसौर निप्र ।शासकीय स्नात्कोत्‍तर महाविद्यालय में अध्ययन कर चूके पूर्व छात्रों के लिये शुक्रवार का दिन स्वर्णिम दिन बन कर आया क्योंकि आज अवसर था जिस संस्थान में कभी अध्ययन करते थे आज उसी संस्थान की उन्नती और विकास में भागीदार बनने का था। नेक टीम के सामने महाविद्यालय की तमाम अच्छाईयों को बताकर भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करनी थी ताकी इसका फायदा आने वाली पीढि़ को मिले।
नेक टीम के सदस्य हिमाचल प्रदेश युनिवर्सिटी के उप कुलदीपति प्रो. सुनील गुप्ता, पंजाबी युनिवर्सिटी पटियाला के प्रो. नरिन्दर के डोगरा तथा पाटकर काॅलेज मुम्बई के प्राचार्य डाॅ. महारूद्र बालकृष्ण केकरे के समक्ष पूर्व छात्रों ने अपने महाविद्यालय में अध्ययन के दौरान के अपने अनुभवों को सुनाया और जिन कमियों को उन्होंने महसूस किया उन्हें रेखाकिंत करते हुए टीम के सदस्यों से अपेक्षा की कि भविष्य में इन कमियों दूर किया जाये। इस बैठक में जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष एवं विधायक तथा पूर्व छात्र यशपालसिंह सिसौदिया विशेषरूप से उपस्थित थे ।
बैठक में पूर्व न्यायाधीश श्री सक्सेना ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी दिगभ्रमित हो रही है उसका लक्ष्य केवल डिग्री पाना बन गया है ऐसे में आवश्यकता है कि बच्चों को समुचित मार्गदर्शन मिलें वे क्या चाहते है यह समझने का अवसर मिलें और उसी अनुरूप बच्चों को आगे बढ़ाने का प्रयत्न होना चाहिए । महाविद्यालय में भी ऐसी व्यवस्था हो कि मेघावी छात्रों के लिए अलग से कोचिंग हो जाऐं ताकि उन छात्रों को घर बैठे महाविद्यालय के माध्यम से ही अच्छी कॅरियरोन्नमुखी शिक्षा पाने का अवसर मिल जाऐं । शिक्षाविद् गुरूचरण बग्गा ने कहा कि वर्तमान में शिक्षा के माध्यम से ज्ञान नही बड़ रहा है इसीलिए ऐसे में प्रयास हो कि छात्रों को ज्ञान मिलें । डाॅ. क्षितिज पुरोहित ने मंदसौर में विश्वविद्यालय की आवश्यकता को निरूपित किया और कहा कि वर्तमान दौर में पूरी शिक्षा व्यवस्था बिगड़ रही है ऐसे में पूरी शिक्षा को केन्द्रियकृत शिक्षा प्रणाली बनाना आवश्यक लग रहा है । अरूण शर्मा ने कृषि के क्षेत्र में बच्चों को मार्गदर्शन देने का सुझाव दिया और कहा कि मंदसौर जिला कृषि प्रधान है ऐसे में किस तरह उच्च स्तर की खेती कर बच्चें अपना कॅरियर बना सकते है इस दिशा में भी प्रयत्न होना चाहिए । मीनू मंसूरी ने मासकम्यूनिकेशन, फैशन डिजाईनिंग जैसे कोर्स प्रारंभ करने की आवश्यकता बताई डाॅ दिनेश तिवारी ने कहा कि बच्चों को ज्ञान से जोड़ा जाऐं क्योंकि वर्तमान दौर में बच्चें शार्टकर्ट पर चलने लगे है ऐसी व्यवस्था हो कि बच्चें वास्तविक ज्ञान प्राप्त कर सके । सनत जोशी ने कहा कि पढ़ाई के बाद बच्चों का लक्ष्य केवल नौकरी पाना ही रह गया है इसीलिए महाविद्यालय में इस तरह की व्यवस्था हो ताकि बच्चों को बेहतर कॅरियर मार्गदर्शन मिले और वे नौकरी के अलावा भी अपना कॅरियर बना सके । बंटी चैहान ने कहा कि बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान देने की आवश्यकता है इसके अलावा महाविद्यालय में एमबीए, एमसीए कोर्स भी प्रारंभ किए जाने चाहिए विधि को भी महाविद्यालय में प्रारंभ करने की मांग की गई । शिक्षाविद् संगीता रावत ने कहा कि स्मार्ट क्लास की कमी देखी जा रही है ऐसे प्रयास हो कि स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को मार्गदर्शन मिल सके ।

प्रत्येक पूर्व छात्र महाविद्यालय में योगदान दें
नेक टीम के सदस्यों ने पूर्व छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक पूर्व छात्र किसी ना किसी तरह से महाविद्यालय के विकास में अपना योगदान दें जो छात्र सक्षम है वे आर्थिक रूप से महाविद्यालय की मदद करें, जिनके पास ज्ञान का भंडार है वे अपने ज्ञान से बच्चों के विकास में भागीदार बनें प्रत्येक पूर्व छात्र किसी ना किसी रूप में महाविद्यालय से जूड़े क्योंकि यह महाविद्यालय उनका है वे यहां से अध्ययन करके निकले है आने वाले समय में उनके बच्चे यहां अध्ययन करेगें। महाविद्यालय जितना विकास करेगा उतना लाभ क्षेत्र के बच्चों को मिलेगा क्योंकि विकास के लिए सरकार और अन्य संस्थाओं की अपनी सीमाऐं होती है यदि विकास में भी जनभागीदारी होगी तो निश्चित ही तेजी से विकास होगा और बच्चों को लाभ मिलेगा।

लगातार कर रहें विकास के प्रयास
जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष एवं विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने कहा कि महाविद्यालय की जनभागीदारी समिति के माध्यम से लगातार विकास के प्रयास किए जा रहे है वर्तमान में 13 से ज्यादा पाठ्यक्रम स्ववित्‍तीय संसाधनों से चल रहे है अंधोसंरचना विकास में करीब 6 करोड़ रू. के काम हुए है लेकिन छात्रों को मार्गदर्शन् की कमी है बच्चें दुविधा में है ऐसे में उनके लिएबेहतर कॅरियर गाईडेन्स की व्यवस्था की जानी आवश्यक है ताकि बच्चें आत्मनिर्भर बनें । श्री सिसौदिया ने कहा कि महाविद्यालय में जनभागीदारी समिति और प्राध्यापकों के साथ तो निरन्तर बैठके होती है, चर्चाऐं होती है , विकास की योजनाऐं बनती है लेकिन विकास की भावी योजनाओ में बच्चों के अभिभावकों को सम्मिलित करना आवश्यक है। आपने कहा कि महाविद्यालय में ऐसे प्रयत्न होगें ताकि बच्चों के अभिभावक भी महाविद्यालय से जूड़े, बच्चे क्या चाहते है इस पर मंथन करें और उन्हें बेहतर मार्गदर्शन देकर आगे बढ़ाऐं ।

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