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महिला उत्पीड़न की घटनाएं भारतीय परम्परा व सभ्यता को कर रही है ध्वस्तसरकारों को सख्त कदम उठाने की आवश्यकता

मन्दसौर। पिछले दिनांक नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो (एन.सी.बी.आर.) के अनुसार भारत में हर 15 मिनिट में एक बलात्कार की घटना घटित होती है। जिस देश में बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं का नारा दिया जाता हो। उसी देश में उसकी अस्मिता व इज्जत लूटने का खेल निरन्तर बदस्तुर जारी हैं। देश के किसी न किसी कोने से हर घण्टे 7 से अधिक महिलाओं का अपहरण होता है। वर्ष 2016 में एन.सी.बी.आर. के रिपोर्ट के मुताबिक 38649 मामले महिला उत्पीड़न, छेड़छाड़, रेप के दर्ज किये गये। भारतीय समाज व संस्कृति में महिलाओं को देवी तुल्य कहा जाता है। महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार, हत्या, उत्पीड़न जैसी घटनाओं में दिन-प्रतिदिन इजाफा होना भारतीय संस्कृति, सभ्यता को आधुनिक सभ्यता-परिवेश का नाम देकर भारतीय परम्परा व सभ्यता को ध्वस्त किया जाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा है वहीं पश्चिम सभ्यता ने अपने पैर भारत में पसारने शुरू कर दिये है जो कि हमारी भावी पीढ़ी को हमारी संस्कृति सभ्यता को हमसे छिनकर आधुनिक परम्परा में हमारे नौ निहालों को ढकेला जा रहा है। जिसका जीता जागता उदाहरण शहर-गांव-गलियों में खुलने वाले शारीरिक शोषण के अड्डे, स्पा सेंटर का निरन्तर बिना रोक-टोक खुलते जाना है। सभ्यता शालीनता के इस देश को पाश्चात्य संस्कृति के मकड़जाल ने युवा पीढ़ी को अपने आगोश में डूबा दिया हैं। इसी का परिणाम है कि महिलाओं के प्रति यौन हिंसा, बलात्कार, हत्या, अपहरण जैसी घटनाओं पर तेजी से इजाफा हुआ है। 15-20 सालों से महिलाओं पर जिस तेजी से अत्याचार बढ़ा है, इन घटनाओं से मानवता का इतना विध्वंश, खूखार, डरावना चेहरा हमारे समाज को इससे पहले कभी देखने को नहीं मिला है। इसे नैतिक पतन कहने में कोई हर्ज नहीं होगा। चूंकि वर्तमान परिवेश में महिलाएं, पुरूष वर्ग के साथ समानता के कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।  किसी भी क्षेत्र में पुरूष वर्ग से महिला कमतर नहीं है। चाहे राजनैतिक हो, सामाजिक हो, व्यवसायिक हो, खेल हो, सब मामलों में महिलाओं ने भारत देश का मान-सम्मान ही बढ़ाया है। समाजहित, देश व राष्ट्र के विकास के उत्थान में महिलाओं का प्रयास सतत् जारी है।

एन.सी.बी.आर. के रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां सबसे ज्यादा बलात्कार की घटनाएं घटित हो रही है। यह बड़ा ही चिंतनीय व विषम पहलू है कि जिस राज्य का नाम संस्कृति, सभ्यता के लिये बड़े आदर से लिया जाता था। वही राज्य आज हिंसा, बलात्कार, अपहरण, हत्या जैसे मामलों में देश का पहला राज्य बनता जा रहा है। मध्यप्रदेश के मुखिया ने इन अपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिये बलात्कारियों के लिये फांसी जैसे कड़े प्रावधान का कानून (विधेयक) को लागू किया जा रहा है। मध्यप्रदेश शासन को चाहिये कि वो प्रशासन पर नकेल कसकर राज्य में बढ़ती हिंसा, आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिये सख्त से सख्त कदम उठाये। वरना मध्यप्रदेश शांति के टापू की जगह अपराधिक गतिविधियों का केन्द्र बिन्दु ना बन जाये।

Post source : कमल कोठारी

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