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मानव तस्करी के मामले में मंदसौर पुलिस को सफलता

माता ने ही अपनी आठ माह की मासूक बालिका को तीस हजार में बेचना स्वीकार किया

मंदसौर। मंदसौर पुलिस ने मानव तस्करी के मामले में बड़ी सफलता प्राप्त की है। पुलिस कप्तान मनोज कुमार सिंह के अनुसार 19 सितम्बर 18 को सूचना मिली थी कि बिहार झारखण्ड से आयें व्यक्तियों द्वारा छोटे बच्चों की गोदना संबंधित कागजी कार्यवाही न्यायालय परिसर में कराई जा रही है। जबकि वास्तव में बच्चों को पैसा लेकर बेचा जा रहा है। इस सूचना के आधार पर नगर पुलिस अधिक्षक राकेश मोहन शुक्ला के नेतृत्व में एक टीम का गठन कर भेजा गया। कोर्ट परिसर में गनौरी उर्फ बिहारी पिता मल्लों पासवान 32 वर्ष निवासी केहल गांव जिला भागलपुर बिहार व दिलीप पिता मांगीलाल चौहान जाति बांछड़ा 32 वर्ष निवासी पाटलिया मारू थाना नाहरगढ़ मंदसौर, अनिल चौहान बांछड़ा 38 वर्ष निवासी पाटलिया मारू, प्रभादेवी महेन्द्रसिंह राजपूत निवासी कुपरपट्टी जिला कोटडा, झारखण्ड, लालमुन्नी पति विद्यासिंह कुपरपट्टी जिला कोटडा, झारखण्ड से पूछताछ की गई तो घटना सही होना पाई गई। गनौरी बिहारी जो कि बिहार का रहने वाला है वह झारखण्ड व बिहार से महिलाओं व बच्चियों को बेहला फुसलाकर लाता है एवं कंवरी बाई बांछड़ा इन्हें पैसे लेकर बांछड़ा समुदाय के अन्य पुरूषों को दे देती है। किसी किसी महिलाओं के साथ उसका बच्चा भी होता है। जिसको बाद में वेश्यावृत्ति में प्रयुक्त किया जाता है। पुलिस को अभी तक ऐसी छः महिलाओं का पता लगा है जिन्हें बिहार, झारखण्ड से लाया गया है पुलिस इस मामले में अनुसंधान कर रही है। पुलिस ने अभी तक दो पुरूष एवं तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया है। जबकि मुख्य सरगना कंवरीबाई फरार है। ग्राम पाटलियामारू के दो घरों में बिहार से लाए गए बच्चों के बारे में पुलिस को पता चला है। जब पुलिस ने दबिश दी तो दोनो लोग फरार पाए गए। नाबालिग बच्चें को दस्तयाब करने का प्रयास किया जा रहा है।

पुलिस कप्तान के अनुसार गन्नू के कहने पर लालमुनि ने अपनी सबसे छोटी लड़की आरती उम्र 8 माह को अनिता बांछड़ा को बेचना स्वीकार किया है। अनिता बांछड़ा पाटलिया मारू में वेश्यावृत्ति का अड्डा चलाती है। मुख्य दलाल घिनौरी ने प्रारंभिक पूछताछ में बताया कि करीब दो वर्ष से वह बांछडा समुदाय के सम्पर्क में आया और कंवरीबाई के कहने पर झारखण्ड एवं बिहार से महिलाओं को लाता था। कंवरीबाई पैसा लेकर बांछड़ाओं को दे देती थी। इस काम के लिए वह 5 से 15 हजार रूपये लेती थी। इस प्रकरण में उनि जया भारद्वाज, सउनि प्रेमसिंह हटिला, प्रआर प्रदीपसिंह तोमर की भूमिका सराहनीय रही।

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