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मामला – पशुपतिनाथ मूर्ति के क्षरण का शंकराचार्यजी के अभिमत के बाद मंदिर समिति सख्ती से कराए नियमों का पालन- श्री बंसल

मन्दसौर। भानपुरा पीठ के शंकराचार्य स्वामी श्री दिव्यानंदजी महाराज ने भगवान श्री पशुपतिनाथ जी प्रतिमा के संरक्षण के लिये मंदिर समिति के निर्णयों को न केवल उचित बताया वरन् स्वयं ने भी इन निर्णयों का पालन करने की बात कही है, अब हम सभी श्रद्धालुओं का भी कर्तव्य है कि प्रतिमा के संरक्षण में सभी निर्णयों का पालन करें।  यह वक्तव्य देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सुनिल बंसल ने कहा कि सनातन परम्परा में शंकराचार्यजी सर्वोपरी धर्मगुरू होते है। यदि मंदिर व प्रतिमा के संबंध में वे कोई अभिमत देते है तो वह सर्वमान्य होते है। विशेषकर शिव मंदिरों में शिव प्रतिमा अथवा शिवलिंग की पूजा पद्धति  के निर्धारण में शंकराचार्यजी का अभिमत निर्णायक होता है। पूज्य शंकराचार्य स्वामी श्री दिव्यानंदजी महाराज ने भगवान श्री पशुपतिनाथ की प्रतिमा के क्षरण को रोकने व संरक्षण के लिये मंदिर समिति के निर्णयों से समिति के पदेन अध्यक्ष व कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव के माध्यम से अवगत होकर जो अभिमत दिया है उसका अक्षरशः पालन करना प्रत्येक श्रद्धालु का नैतिक दायित्व है।

श्री बंसल ने मंदिर प्रबंध समिति से भी आग्रह किया है कि 27 नवम्बर से श्री पशुपतिनाथ मंदिर गर्भगृह में 6 नवम्बर की बैठक में लिये गये सभी निर्णयों का पालन कराना सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि भगवान के प्रति हमारी भक्ति को अभिव्यक्त करने के लिये आवश्यक नहीं है कि हम प्रतिमा का स्पर्श कर ही भक्ति का प्रदर्शन करे या प्रतिमा पर अभिषेक के नाम पर जल को फेंके व सेवा के रूप में अपने हाथों से प्रतिमा को पौछे, इत्र लगाएं, नेपकिन से पौंछे।

शंकराचार्यजी के स्पष्ट अभिमत, जनभावना तथा सबसे बढ़कर भगवान श्री पशुपतिनाथ की भव्य कलात्मक प्रतिमा को बचाने के लिये समिति के सभी निर्णयों का सख्ती से पालन कराया जाये।

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