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मालवा के रामदेवरा मंदिर में लगेगा भादवी बीज मेला

मंदसौर. जिले के गांव कचनारा में बाबा रामेदव का मंदिर यूं तो कई मान्यताओं के चलते आस्था का केंद्र बन गया है। लेकिन आध्यात्मिक चिकित्सालय के रुप में बनी पहचान और बीमारियों से लोगों को यहां से मिल रहे छुटकारे के चलते यह स्थान अब जनआस्था का केंद्र बन गया है। बीज पर यहां हजारों की संख्या में भक्तों का सैलाब उमड़ता है। यू तो मालवा के इस क्षेत्र में बाबा रामदेवजी के अनेक मंदिर है पर किवंदतियों व आस्था के कारण अब इस स्थान से लोगों की आस्था की डोर मजबुती से जुड़ी है और दूर-दराज से यहां भक्त पहुंचते है।

चरणों की पूजा से मिल गई रोगों से मुक्ति
जिले के सीतामऊ तहसील में कचनारा में यह स्थान है। बताया जाता है कि इस जगह का नाम प्राचीन समय में कचनारी था। महामारी की चपेट में आने से वहां की जनता द्वारा गांव खाली किया गया। आज भी वहां खुदाई के समय घोड़े के दांत एवं मिट्टी के बर्तन प्राप्त होते हैं। यह गांव पूर्व में ही बारह थारो वाला पनघट के रूप में प्रसिद्ध है। इसके बाद गांव का पुण्य उदय हुआ। इसके पीछे ग्रामीण बाबा रामदेव के इस स्थान को बताते है। यह स्थान बहुत प्राचीन है यहां पर वर्षों से चरणों की पूजा अर्चना होतीआई है और चरणों की पूजा से ही कई लोगों को ऐसे असाध्य रोगों से मुक्ति मिली है।

मंदिर पूर्व में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था तथा वहां के पुजारी आस-पास के गांव में भिक्षावृत्ति करके गुजारा तथा वहां की पूजा अर्चना करते थे। वर्ष 1999 में समिति द्वारा इस कार्य को अपने हाथ में लेकर मंदिर जीर्णोद्धार शुरु किया। राजस्थान के पिंडवाड़ा गांव के कारीगरों द्वारा मूर्ति को तैयासर की गई। इसका वजन भी २ क्विंटल है। जहां चरण पूजा के साथ साथ इतनी मूर्ति की पूजा अर्चना होती है और आज भी यहां दिन में तीन बार आरती की प्रथा चली आ रही है जो कि प्राचीन समय से ही अनवरत बनी हुई है। यहां आज भी मनोकामना लिए कई जगहों से भक्त पहुंचते है। और मन्नत पूरी होने के बाद इसे पूरा करने के लिए आते है।

समाधि पर मत्था टेकने और परिक्रमा की है परंपरा
बाबा रामदेव मंदिर प्रांगण के पूर्व दिशा में प्रारंभिक अवस्था की प्राचीन समय के पुजारी उदानाथजी की समाधि है। यहां आज भी मत्था टेकने एवं परिक्रमा करने की परंपरा प्रचलित है। गर्भ ग्रह एवं समाधि के बीच में यज्ञशाला है जो की मूर्ति स्थापना के समय पूस की यज्ञशाला बनाकर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को पूर्ण किया गया था। लोग रात रातभर भजन गाकर अपनी इच्छा पूर्ति का वरदान मांगते हैं। उधर दक्षिण दिशा मैं अलग अलग समाजों द्वारा धर्मशाला बनाई हुई है। उत्तर दिशा में मुख्य सड़क मार्ग से लगभग 101 सीढिय़ां चढ़कर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। पिछले 5 वर्षों से यहां अखंड ज्योत भी जलाई जा रही हैं। ***** माह की सुदी बीज को यहां बड़ा मेला लगता है। जहां दूरदराज से आस्था के चलते श्रद्धालु नंगे पैर तो लौटते हुए यहां पहुंचते है।

1 सितंबर को यहां लगेगा मेला, पहुंचेगे भक्त 
वर्तमान में 1 सितंबर को बाबा रामदेव मंदिर टेकरी पर मेले का आयोजन किया जाएगा जिसमे हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने आएंगे। प्रतिवर्ष मेले के दिन यहां १ 1 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने आते है। इसे मालवा का रामदेवरा भी कहा जाता है। मेला पर्यंत दिवस रात्रि में मंदिर समिति द्वारा भजन संध्या का अभी आयोजन किया जाएगा। बाबा रामदेवजी का मेला एक दिवसीय ही रहता है किंतु मेला पर्यंत दिवस से एक दिन पहले व एक दिन बाद भी श्रद्धालुओं का जमघट बना रहा है।

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