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मीसाबदियों की पेंशन बंद : कमलनाथ सरकार का निर्णय देशभक्तों का अपमान

मीसाबदियों की पेंशन बंद करने का आदेश दुर्भावनापूर्ण-चन्द्रे

मन्दसौर। मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा मीसा बंदियों की पेंशन बंद करने के प्रशासनिक आदेश जारी किए गए जो पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण है। यह निर्णय उन देशभक्तों का अपमान है जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए आपातकाल में आंदोलन किया था और 19 महीने जेल में रहे थे। उस जेल यात्रा के दौरान इन मीसा बंदियों के परिवार बर्बाद हो गए, व्यापार-व्यवसाय समाप्त हो गए और कई मीसाबंदी तो काल के गाल में समा गए जो शेष रह गए थे उनकी आर्थिक स्थिति इस कदर दयनीय हो गई कि वह अपना परिवार चलाने में भी सक्षम नहीं थे ऐसी स्थिति में जो सम्मान निधि उनके लिए शिवराजसिंह सरकार ने शुरू की थी। उसको बंद कर देने का निर्णय किसी भी परिस्थति में सही नहीं ठहराया जा सकता।

उक्त आरोप लगाते हुए शिक्षाविद् रमेशचन्द्र चन्द्रे ने कहा कि जब मीसा बंदी वृद्धावस्था के दौर से गुजर रहे हैं इसके साथ ही मीसाबंदियों की पत्नी जो अपने जीवन की अंतिम सांस गिन रही है उनके साथ भी यह घोर अन्याय किया है। यह निर्णय लेकर कमलनाथ सरकार द्वारा एक तरह से सामूहिक रूप से हत्या का प्रयास किया जा रहा है। यदि इस आदेश के पश्चात किसी भी मीसाबंदी के साथ कोई दुर्घटना घटती है या उनको छति पहुंचती है तो उसकी जिम्मेदार कमलनाथ सरकार रहेगी। श्री चंद्रे ने कहा कि इस प्रकार के निर्णय पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए और मानवीय दृष्टिकोण के साथ ही देशभक्तों के सम्मान के लिए इस गलत निर्णय को तुरंत वापस लेना चाहिए।

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