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मेगा फुड पार्क के नाम पर करोड़ों रू. भ्रष्टाचार की योजना – विजय गुर्जर

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सितम्बर में 150 करोड़ की योजना, जनवरी में हुई 500 करोड़ की:- जांच का विषय, भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में मेगा फूड पार्क बनाने की योजना पर कार्य शुरू किया है, लेकिन मंदसौर जिले में बनने वाला मेगा फूड पार्क घोषणा होने के साथ ही कई विवाद व बड़े भ्रष्टाचार के घेरे में आ गया है। सितम्बर 2016 में केन्द्र सरकार के समक्ष मेगा फूड पार्क के लिये जो आवेदन पेश होने वाला था उसमें इस योजना को 150 करोड़ रूपये का बताया जा रहा था किन्तु जनवरी 2016 होते-होते यह योजना 150 करोड़ रूपये के बजाय 500 करोड़ रूपये की हो गई। 350 करोड़ रूपये कीमत इस योजना में अचानक से बढ़ना इस योजना को बनाने वाले जिम्मेदार लोगों की कार्यवाही व मंशा पर अपने आप ही बहुत ही बढ़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। यह बात पार्षद विजय गुर्जर ने मेगा फूड पार्क योजना के संदर्भ में कही।
आगे विजय गुर्जर ने कहा कि इस योजना का मूल उद्देश्य क्षेत्र के किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाना है। मगर मंदसौर में किसानों के बजाय जिम्मेदार लोग अपना आर्थिक हित साधने के लिये इस योजना को तैयार कर रहे है। मेगा फूड पार्क योजना में 33 से 50 प्रतिशत अनुदान (सब्सिडी़) का प्रावधान है। इस अनुमान से 500 करोड़ की योजना में कई करोड़ रूपये अनुदान व सब्सिडी के रूप में होते है। शायद यही वजह रही होगी जिसके परिणाम स्वरूप इस योजना को 150 करोड़ रूपये से येनकेन प्रकरण 500 करोड़ रूपये तक पहुंचा दिया गया और यह संकेत भी दे दिया है कि बड़े स्तर पर इसमें करोड़ों रूपयों के भ्रष्टाचार की योजना इस योजना से जुड़े सभी जिम्मेदारों ने मिलकर तय कर ली है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, जिस जमीन का चयन मेगा फूड पार्क निर्माण के लिये किया जा रहा है वह जमीन भी विवादित है। जमीन का प्रकरण न्यायालय (कोर्ट) में चल रहा है। ऐसी जमीन पर किसी भी प्रकार का कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है क्योंकि यह जमीन सरकारी होकर लीज पर ली गई जमीन है। जो कि शर्तों का उल्लंघन करने के कारण सरकारी होने की कार्यवाही में है।
अन्त में विजय गुर्जर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय खाद् प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल से मांग करी है कि मंदसौर में मेगा फूड पार्क की योजना की सम्पूर्ण कार्यवाही एवं दस्तावेजों की सूक्ष्मता से जांच की जाए जिससे सरकार को करोड़ों रूपयों की भ्रष्टाचार के नाम से होने वाली हानी को रोका जा सके।

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