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म.प्र. हिन्दी साहित्य सम्मेलन जिला इकाई मंदसौर ने किया काव्य गोष्ठी का आयोजन

, म.प्र. हिन्दी साहित्य सम्मेलन जिला इकाई के तत्वावधान में होटल ऋतुवन में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार, कवि, साहित्यकार श्री सौभाग्यमल जैन ‘करूण’ के 80वें जन्मदिवस पर उन्हें बधाई देकर वरिष्ठ पत्रकारत्रय सर्व श्री नरेन्द्र अग्रवाल प्रेस क्लब अध्यक्ष, ब्रजेश जोशी प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य म.प्र. हिन्दी साहित्य सम्मेलन, पुष्पराजसिंह राणा का नेपाल यात्रा से लोटने पर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ शारदा के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। दीप प्रज्जवलन मुख्य अतिथि श्री जैन, पत्रकारत्रय श्री अग्रवाल, श्री जोशी, व श्री राणा ने किया। कार्यक्रम में श्री करूण को बुके, पुष्प एवं शब्‍दों के माध्यम से अनेक लोगों ने शतायु होने की शुभकामनाएं दी। श्रोताओं के विशेष आग्रह पर श्री करूण ने काव्य पाठ भी किया व अपने पत्रकारिता से जुड़े स्मरण सुनाए। नेपाल यात्रा पर श्री ब्रजेश जोशी ने प्रकाश डालते हुए कहा कि नेपाल देा ने प्राचीन संस्कृति को सुरक्षित रखते हुए आधुनिकता को अपनाया है। यहां के धार्मिक एवं प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण पर्यटन स्थल वास्तव में दर्शनीय है। नेपाल भारत का मित्र या पड़ोसी देश नहीं वरन् परिवार का सदस्य है। दोनों देशांे के रिश्ते अति प्राचीन व परम्परागत है। श्री नरेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि नेपाल और भारत की साझा संस्कृति है और हम सभी को जीवन में एक बार नेपाल यात्रा अवश्य करनी चाहिए, नेपाल हिन्दु सनातन परम्परा का प्रतीक है जिसे सहेजने का प्रयास हो रहा है। हम भी साहित्यिक, सामाजिक एवं अन्य गतिविधियों के माध्यम से नेपाल को जोड़ने का प्रयास करे। श्री पुष्पराजसिंह राणा ने नेपाल यात्रा पर अपने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि नेपाल पर चीन का प्रभाव बढ़ता जा रहा है और वो भारत से दूर होता जा रहा है, वहां के युवाओं के दिलों में भारत के प्रति नफरत भरी जा रही है, हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस स्थिति को बदलने का प्रयास करे। दादा महेश मिश्रा ने करूणजी के हमेशा स्वस्थ, समृद्ध जीवन की कामना करते हुए उनकी पत्रकारिता और राजनीतिक संघर्ष की स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि दादा करूण जुझारू जज्बे की मिसाल है जिन्होंने कभी कलम से समझौता नहीं किया। काव्य गोष्ठी में नेहा कुरेशी ने ‘‘आज जाने की जिद न करो’’, हस्तीमल सांखला ने गीत, डाॅ. प्रीतिपालसिंह राणा ने गजल, कैलाश जोशी ने ‘नईसी सुबह नया सा सवेरा’, जगदीश गुप्ता ने ‘एक कतरा हूूॅ’, असद अंसारी ने ‘जसबात की मंडी में …’ नरेन्द्र भावसार ने ‘जनाजे में फूल चढ़ा था, रस्मे रिवाज है……..;, राजेश रघुवंशी ने ‘जन्मदिन देह का उत्सव है’, विरेन्द्र पाल गजल ‘हमसे रूठ न जाये तकदिर ……..’, डाॅ. ललिता गोधा चित्रकार व पत्रकार शब्दों से अर्थ का अनर्थ, आराम और विश्राम, राजेन्द्र तिवारी ने ‘खुश रहे ये दुआएं तुम जियो सदा ही हमारे लिये …..’, मीनु मंसूरी ने ‘मिलती नहीं सभी को वफा मानते है लोग जिनको तराशने है, अपने ही हाथे से’’, डाॅ. आरती तिवारी ने ‘‘ होते रहेंगे प्रकरण दर्ज, ‘‘खानदानी आशु कविता’’, श्री आलोक पंजाबी ने ‘सपने तुम्हारे’, डाॅ. निशा महाराणा ‘द्रोपदी से कुछ सवाल’, बाबूभाई सिंघल ने गजल ‘आई बहार खुशियों से बुलबुल चहक गई’, आजाद मंसूरी ‘बिखरे तो फिर जमाने की ठोकर खाओगे’, श्री वेद मिश्रा ‘कोई सबुत को दिखाओ….’ सहित अन्य रचनाएं प्रस्तुत की।

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