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यह है MP का स्वर्ग, 180 करोड़ वर्ष पुराने सौंदर्य को निहारते रह जाते हैं लोग

जबलपुर। “स्वर्ग” यह एक ऐसा शब्द है जिसे सुनने मात्र से आंतरिक अनुभूति वहां जाने की होने लगती है। जन्नत के मायने भी अब अलग-अलग हैं। जिस स्थान पर व्यक्ति आनंद से आहलादित हो उठे अर्थात सिर्फ दुनिया को सुखद महसूस करे उस स्थान को भी स्वर्ग की संज्ञा दी गई है। उन्हीं में से एक है संस्कारधानी का धुआंधार-भेड़ाघाट। 180 करोड़ वर्ष पुरानी इस धरोहर को एमपी का स्वर्ग भी कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। यह ऐसा स्थान है जो हर आने वाला पर्यटक सौंदर्य को याने की स्वर्ग रूप माहौल को निहारता रह जाता है। कुछ पलों के लिए वह सब भूल जाता है और सिर्फ प्रकृति के इस अनुपम नजारे में खो जाता है।
 
यह है स्थान का इतिहास
जन-जन को अपनी बूंदों से प्यास बुझाने के साथ पवित्र और पुण्य प्रदान करने वाली मां नर्मदा का तट बड़े-बड़े रहस्यों को अपनी गोद में संजोए हुए है। उन्हीं में से है भेड़ाघाट-धुआंधार। जानकारों की मानें तो इस स्थान का इतिहास लगभग 180 करोड़ वर्ष पुराना है। मां नर्मदा का बावनगंगा के साथ मिलन स्थान का नाम भेड़ाघाट हुआ। यह स्थान पर्यटन की दृष्टि के साथ-साथ धार्मिक महत्व भी रखता है। समीप ही गुप्तेतर काल का शक्ति मंदिर जो सप्तघृत मातृका व वर्तमान में चौसठ योगिनी का प्रसिद्ध मंदिर खास है। 10वीं सदी में मंदिर का और भी विस्तार हुआ। मां नर्मदा सहित तटों की असीम सुंदरता का धर्मग्रंथों में वर्णन भी इसका प्रमाण है।
पर्यटन की दृष्टि से भी है खास
धुआंधार-भेड़ाघाट पर्यटन की दृष्टि से भी अहम है। ऊंचाई से गिरती जल की दूधिया धार और पानी से निकलने वाला धुएं सा नजारा हर पर्यटक को सम्मोहित कर लेता है। आजादी से पहले भी विदेशी पर्यटक कैप्टन जे फोरसाइथ ने अपनी पुस्तक हाइलैंड्स ऑफ सेंट्रल इंडिया मध्य भारत की आकृतियों और प्राकृतिक सुंदरता के बारे में बहुत कुछ लिखा है। भेड़ाघाट की खूबसूरत चट्टानों की बात का जिक्र है।
उद्गम से समागम में यह स्थान विशेष
उद्गम स्थान से लेकर समागम तक मां नर्मदा के सौंदर्य व रहस्य अगाध है। लेकिन जबलपुर का यह स्थान विशेष है। प्रकृति का अनोखा सौंदर्य, नदी की अठखेलियां और अनोखा सौंदर्य यहीं देखने मिलता है। तभी तो देश ही नहीं बल्कि विदेश से प्रतिदिन सैकड़ों पर्यटक खिचे चले आते हैं। श्वेत सहित विविध रंग की चट्टानों में सौंदर्य देखते मन नहीं अघाता। भृगु ऋषि का स्थान होने के कारण भी इस स्थान को भेड़ाघाट के नाम से जाना जाता है। ग्वारीघाट, तिलवाराघाट, लमेहटाघाट, गोपालपुर, चौंसठ योगिनी मंदिर और पंचवटीघाट जैसे सौंदर्य भी बड़े दार्शनिक हैं।
इस समय बढ़ जाता है रोमांच
नर्मदा के संगमरमरी घाटों और तटों पर पर्यटकों का दिल रोमांच से चार-चौगुना उस समय हो जाता है जब दीपक की लौ जलधारा में टिमटिमाती है। नाविक हलोर मारती धार पर एक दूसरे से काटते हुए पर्यटकों को आनंदित करते हैं। यह नजारा देखकर ऐसा लगता है मानो यही स्वर्ग है। तटों पर मंदिर भी पर्यटकों को खूब लुभाते हैं।
भेड़ाघाट का वातावरण भी बेहद शांत रहता है। जब सूरज की रोशनी सफेद और मटमैले रंग के संगमरमर चट्टान पर पड़ती है, तो नदी में बनने वाला इसका प्रतिबिंब अद्भुत होता है। भेड़ाघाट और यहां की संगमरमर चट्टान की खूबसूतरी उस समय चरम पर होती है जब चांद की रोशनी चट्टान और नदी पर एक साथ पड़ती है। इस माहौल में बोट राइड का अनुभव भी जीवंत हो जाता है।

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