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यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के आव्हान पर देश भर में बड़ौदा बैंक, विजया बैंक व देना बैंक के विलय का विरोध

 

मन्दसौर। बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैेंक व देना बैंक के विलय के निर्णय के विरोध में मंदसौर में देना बैंक परिसर में एक सभा आयोजित की गई। शासन के बैंक विलय के निर्णय के विरोध में यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आव्हान पर देश भर में बैंक कर्मियों ने विरोध दर्ज कराया व आक्रोश व्यक्त किया। सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि भिन्न-भिन्न भौगोलिक/क्षेत्रीय/ भाषाई एवं कार्य संस्कृति की बैंकों को विलय करने से कई विषम परिस्थितियां पैदा होती है, जिससे कार्यक्षमता प्रभावित होती है। कर्मचारियों की पदोन्नति, सेवा शर्ते आदि भिन्न होने से कर्मचारियों/अधिकारियों के भविष्य को लेकर संशय की स्थिति बनती है। जिससे बैंक कर्मियों में विलय के निर्णय को लेकर आक्रोश है।

वक्ताओं ने निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि जब छोटी व मझोली बैंकों की आवश्यकता नहीं है तो निजी क्षेत्र के बैंक व पेमेंट बैंक के लायसेंस उदारता पूर्वक क्यों बांटे जा रहे हैं ? क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, ग्रामीण क्षेत्र में बैंकिंग सेवा प्रदान कर रहें है तो ग्रामीण क्षेत्र के लिये पोस्टल बैंक की क्या आवश्यकता है ? ऐसा लगता है कि नीति निर्माता भ्रमपूर्ण स्थिति निर्मित कर रहे हैं। ऐसे निर्णयों से सार्वजनिक क्षेत्र की कार्यक्षमता प्रभावित होती है तथा व्यवसाय-लाभप्रदता कम होती है। कठोर ऋण वसूली प्रवास में शासन सहयोग दे, ताकि इन बैंकों को मजबूत बनाया जा सके। वक्ताओं ने मांग की है कि विलय के निर्णय को वापस लें, खराब ऋणों की वसूली कठोरता से करे। माल्या व नीरव मोदी को भारत लायें व ऋणों की वसूली करें। बैंक विलय के निर्णय को वापस लंे। महेश मिश्रा, श्रीनिवास मोड़, प्रफुल्ल जोशी, आदि ने संबोधित किया। इस अवसर पर सुभाष भंडारी, पिंकेश चौहान, कैलाश मांझी, रोशन सैनी आदि उपस्थित रहे।

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