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ये दाग मिट ना सकेगा – शर्मसार मंदसौर

ये जनआक्रोश अत्यंत ही स्वाभाविक है। हैवानियत की पराकाष्ठा वाली इस दिल दहलाने वाली घटना ने मंदसौर के हर नागरिक के अंतर्मन को हिलाकर रख दिया। घटना के विरोध स्वरूप लोगों ने स्वयंप्रेरणा से पूरा बाजार बंद रखा। हर जिम्मेदार नागरिक अपने को शर्मसार महसूस करते हुए यह तलाशने में लगा है कि आखिर गलती हुई तो कहॉं? और किससे? हमारी आदत है कि हम घटना होने के बाद जागते हैं और ऐसे सारे प्रयासों को नजर अंदाज करते हैं जो घटना होने के पहले किये जाने चाहिए। स्कूल, कालेज और कार्यस्थल से निकलने वाली लडकियॉं और महिलाऐं चौराहों पर और रास्ते में खडे मनचलों और शातिरों की कसी जाने वाली गंदी और अष्लील फब्तियों से परेषान है और अपने स्तर पर स्कूल मंे भी, महाविद्यालयों में भी और घर पर भी सम्बन्धितों से षिकायत भी कर रहीं हैं। लेकिन हर स्तर पर उसे ध्यान मत दो जैसी बेमानी सलाह दे दी जाती है और बजाए उसकी षिकायत पर ध्यान देने के या उसकी समस्या को समझने के उसे उसके हाल पर छोड दिया जाता है। ज्यादा से ज्यादा परिवार के लोग उस लडकी का घर से बाहर जाना आना बंद कर देते हैं। कारण कि जिस पुलिस के पास वे ऐसी छेडखानी वाली शिकायत लेकर जाऐंगे वह उनके साथ पुलिस थाने में कैसा व्यवहार करेंगे इसका मात्र अंदाजा ही उनके कदमों को थाने जाने से रोक देता है। इरफान जैसे कई और हैं जो घात लगाकर कर बैठे हैं और किसी षिकार की तलाष में किसी अवसर का इंतजार करते रहते हैं ऐसा ही मौका इरफान को मिला और उसने 8 साल की मासूम दिव्या को अपना शिकार बना लिया। दूसरा पहलू यह भी है कि इन पापियों से निपटने वाले लोग भी हैं लेकिन कानून अपने हाथ में नहीं लेना की समझाईष हाथ बांध देती है और कुछ कर सकने वाले सक्षम युवा मनमसोस कर प्रशासन पर निर्भर होने पर मजबूर होकर रह जाते हैं। सारी सेनाऐं और सामाजिक सुरक्षा के लिये काम करने वाले मंच बेकार हो जाते हैं। जिस तरह का घटनाक्रम सामने आ रहा है उसे देखकर यही लग रहा है कि यह तात्कालिक घटने वाली घटना नहीं है बल्कि इसको अंजाम देने की तैयारी आरोपी इरफान द्वारा कई दिनों से की जा रही थी। प्रशासन की अपनी मजबूरी है कि वह चाहकर भी सभी स्तरों पर हर समय मुस्तैद नहीं रह सकता घटना के होने के बाद उसकी सूचना मिलने के बाद ही वह हरकत में आता है तो आखिर किया क्या जावे? इरफान जैसी हैवानियत की मानसिेता वालों के लिये सभी बाबाओं, धर्मप्रचारकों और आचार्यों के मानसिकता सुधारने वाले प्रवचन बेकार हैं और शिकार ढूंढते इन हैवानों पर उनका कोई असर होगा ऐसा सोचना भी बेकार है। इरफान जैसे कुत्तों को पकडने के लिये लम्बी लम्बी कैंचियॉ उपयोग में लानी होंगी और जाली वाले ट्रकों में उनको बंद कर रखना होगा तभी ये काबू में आऐंगे। मंदसौर में घटित अपने आप की यह पहली घटना है लेकिन दिल्ली की निर्भया के बाद मंदसौर की दिव्या का कलंक तो मंदसौर के माथे पर हमेषा हमेषा के लिये लग ही गया। मेरा मंदसौर, मेरा मालवा जो अपनी अलग पहचान पूरे देष में रखता है आज शर्मसार है, कलंकित है क्योंकि उसके दामन पर ऐसा बदनुमा दाग आज लग गया है जिसको मिटाना असंभव सा ही है। हमारे इस क्षेत्र में कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि हमको मंदसौर में ऐसी घटना से रूबरू होना पडेगा। मंदसौर के मुस्लिम समाज ने इरफान को कब्रिस्तान में भी जगह नहीं देने का संकल्प लिया है वास्तव में ऐसा सामाजिक बहिषकार ही कुत्सित मानसिकता वालों के लिये जरूरी है ऐसा ही बहिषकार परिवार वालों को भी करना चाहिये क्योंकि उन्होने इरफान के जन्म पर जो खुषियॉं मनाई थीं वो इसलिये नहीं थी कि आगे चलकर वह पूरे परिवार की इज्जत को सरे आम नीलाम कर देगा। बहरहाल अपराधी पकडा गया है और पुलिस प्रशासन और न्यायालयीन कार्रवाई चलती रहेगी। पिछले दिनों बने नए कानून जिसमें कम उम्र में बलात्कार के आरोपी को फांसी की सजा मिलनी है के अनुसार इरफान को फांसी की सजा ही मिलेगी यह भरोसा किया जाना चाहिये लेकिन बस चिंता इस बात की है कि इरफान को फॉंसी की सजा मिलने तक उसकी जमानत कराने के लिये कोई वकील अदालत में खडा ना हो जाए। सामाजिक बहिषकार और फॉंसी की सजा ये ही दिव्या को न्याय दिला सकेंगे और भविश्य के लिये भी दिषा निर्धारण का काम करेंगे। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो इसलिये अपने आप को शर्मसार महसूस करने वाले हर व्यक्ति को अपने अपने स्तर पर इन इरफानियों से अपनी बेटियों को बचाने के लिये हर स्तर पर सजग और तैयार रहना होगा और पुलिस प्रशासन को भी बेटियों की और से मिलने वाली छोटी से छोटी शिकायत पर ध्यान देना होगा क्योंकि बेटियॉं कभी झूठी शिकायत नहीं करतीं।
– डॉ. क्षितिज पुरोहित

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