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योग केन्द्र पर ‘‘आत्मा स्नान व स्वस्थ हृदय’’ विषय पर डॉ. भरत रावत ने कहा

दिल को स्वस्थ रखने के लिये मन की स्थिरता आवश्यक

मन्दसौर। दिल को स्वस्थ रखने के लिये मन में स्थिरता के भाव जरूरी है। मन को साफ रखने के लिये किसी के प्रति ग्लानी के भाव ना रखे, किसी की भावना को ठेस ना पहुंचाये, किसी को दर्द या दुःख ना दे।  उक्त बात मेदांता हास्पिटल इंदौर के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत रावत ने दशपुर योग शिक्षा संस्थान द्वारा योग केन्द्र पर ‘‘आत्मा स्नान व स्वस्थ हृदय’’ विषय पर संबोधित करते हुए कही। आपने कहा कि मन में स्थिरता व शान्ति चाहते है तो छोटी छोटी बातों पर उत्तेजित होना छोडि़ए। आपने रियेक्ट और रिस्पोंस में अंतर बताते हुए कहा कि रियेक्ट करना याने तुरंत किसी भी बात पर रिऐक्शन करना और हाथों हाथ जवाब देना। जो आपके मन को उत्तेजित करता है तथा इसके परिणाम अधिकतर बुरे होते है। वहीं आप किसी घटना को रिस्पोंस देकर समय देकर सोच समझकर उस पर रिऐक्शन करते है तो उसके परिणाम अच्छे मिलेंगे। आप हमशो ये सोचे के आद अन्दर से मजबूत व गंभीर है। बाहर की दुनिया आपके मन को हमेशा डगमगायेगी। आपने कहा कि बाहर की दुनिया में अधिकतर लोग सेल्समेन है। आपको हमेशा आधुनिक और विलासिपूर्ण वस्तुओं के प्रति आकर्षिक करेंगे। लेकिन आप जैसे है उसी अवस्था में खुश रहे व प्रसन्न रहे। आपका मुड़ खराब करने का किसी को मौका न दे। आप अपने आपमें परिपूर्ण है इसको अंगीकार करे।  कार्यक्रम की शुरूआत ‘निर्वाण षटकम्’ श्लोक व ऊँ की ध्वनि से हुई। डॉ. रावत ने ताड़ आसन, भ्रस्त्रिका प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, विवेचन क्रिया, शिवोऽम् आदि कराया व उनसे होने वाले फायदों के बारे में जानकारी दी।

स्वागत उद्बोधन संस्थान के संस्थापक योग गुरू सुरेन्द्र जैन ने दिया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से पूर्व मंत्री नरेन्द्र नाहटा, प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. व्ही.एस. मिश्र, एएसपी सुन्दरसिंह कनेश, एसडीओपी ग्रामीण ब्रजभूषण चौधरी, सकल जैन समाज के अध्यक्ष सज्जनलाल जैन, डॉ. योगेन्द्र कोठारी उपस्थित थेे। डॉ. भरत रावत को शाल व पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया गया।  आभार सचिव जितेश फरक्या ने माना।

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