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योजनाओं की बदइंतजामियों का खामियाजा भुगतने को मजबूर है किसान

युवा कांग्रेस अध्यक्ष सोमिल नाहटा का आरोप- भावांतर के कारण किसानों को नहीं मिल रहे लहसून के दाम

समर्थन मूल्य खरीदी केंद्रों पर भी अव्यवस्थाओं का अंबार

मंदसौर। शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर किसानों की उपज को खरीदा जा रहा है। लेकिन मंडी या तौल केन्द्रों पर क्षेत्र के किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ा रहा है। बारदान से लेकर भोजन व्यवस्था तक ठीक नहीं है। तौल के लिए किसान को तीन से चार दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। किसान भाजपा सरकार की नीतियों की बदइंतजामी का खामियाजा भुगतने को मजबूर है। वह हताश और निराश है क्योंकि पसीना बहाकर उसकी उपज का लागत मूल्य तो ठीक, बीज और खाद के पैसे तक नहीं मिल पा रहे हैं। यह आरोप लोकसभा अध्यक्ष सोमिल नाहटा ने लगाया।

किसानों के मंडी एवं समर्थन मूल्य खरीदी केंद्रों पर लगातार परेशानी आने को लेकर श्री नाहटा ने प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते इसे सरकार की विफलता करार दिया है। आपने कहा कि समर्थन मूल्य के खरीदी केन्द्रों पर अव्यस्थाओं का अंबार है। 43 डिग्री के तापमान में किसानों के लिए पीने के पानी तक की सुचारू व्यवस्था नहीं है। बारदान की कमी की शिकायते पूरे जिले से आ रही है। श्री नाहटा ने कहा कि जिम्मदारों को पहले से ज्ञात होना चाहिए था और समर्थन मूल्य की खरीदी पर बारदानों की पर्याप्त व्यवस्था रखना चाहिए थी। ताकि किसानों को समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। लेकिन, जिम्मेदारों को किसानों की फ्रीक ही नहीं है। वे कार्यालय में बैठकर किसानों को मैसेज भेज रहे हैं, यह व्यवस्था भी सही संचालित नही हो रही है। इस पर जब किसान केंद्रों पर पहुंच रहा है तो उसे लंबा इन्तजार करना पड़ रहा है, और पानी तक उसे नहीं मिल पा रहा है।

श्री नाहटा ने कहा कि शिकायतें प्राप्त हो रही है कि कुछ केन्द्रों पर बारदान में 45 किलो ही माल ही भरा जा रहा है। जबकि एक बारदान में 50 किलो माल आना चाहिए। 45 किलो वाला बारदान सरकारी वेयर हाउस नहीं ले रहे है। जिससे किसानों की परेशानियां बढ़ रही है।

श्री नाहटा ने कहा कि समर्थन मूल्य केन्द्रों पर किसानों को भोजन के पैकेट में मात्र 6 पुड़ी दी जा रही है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक किसान 6 पुड़ी में अपना दिन कैसे निकाले।

ऐसी ही स्थिति मंडीयों में लहुसन बेचने आ रहे किसानों की हो रही है। फसल का लागत मूल्य भी नहीं निकल पा रहा है। जिसका मुख्य कारण भावांतर योजना है, जब से यह योजना भाजपा सरकार द्वारा लागू की गई है, तब से किसानों की फसलों के भाव बढ़ने के बजाए और कम हो गये है। श्री नाहटा ने कहा कि फसलों के दाम कम होने के बाद ऐसा नहीं कि उनसे बनी चीजें सस्ती हो गई है। सोयाबीन तेल, लहसुन से निर्मित सभी वस्तुओं के दाम बढ़े ही है।

नाहटा ने आरोप लगाया कि प्रदेश की भाजपा सरकार हर मोर्चे पर फैल हो रही है। सरकार के पास कोई ढंग का प्लान नहीं है। इसलिए किसानों के साथ साथ आमजन भी समस्याओं से घिरा हुआ है। श्री नाहटा ने कहा कि किसानों को राहत नहीं मिली और व्यवस्थाएं नहीं सुधरी तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते है।

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