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रक्तदान महादान, विश्व रक्तदान दिवस आज : आज नगर की अनेक संस्थाएं व रक्तदाता रक्त की कमी से किसी की जान नहीं जाने देते

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सोशल मीडिया पर रक्तदाताओं का बड़ा नेटवर्क, डॉ हिंमाशु पूरे देश में उपलब्ध कराते है रक्त

मंदसौर। विश्व रक्तदान दिवस हर वर्ष 14 जून को मनाया जाता है विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस दिन को रक्तदान दिवस के रूप में घोषित किया गया है। वर्ष 2004 में स्थापित इस कार्यक्रम का उद्देश्य सुरक्षित रक्त रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना और रक्तदाताओं के सुरक्षित जीवन रक्षक रक्त के दान करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करते हुए आभार व्यक्त करना है। रक्तदान तब होता है जब एक स्वस्थ व्यक्ति स्वेच्छा से अपना रक्त देता है और रक्त-आधान (ट्रांसफ्यूजन) के लिए उसका उपयोग होता है या फ्रैकशेनेशन नामक प्रक्रिया के जरिये दवा बनायी जाती है। विकसित देशों में, अधिकांश रक्तदाता अवैतनिक स्वयंसेवक होते हैं, जो सामुदायिक आपूर्ति के लिए रक्त दान करते हैं। गरीब देशों में, स्थापित आपूर्ति सीमित हैं और आमतौर पर परिवार या मित्रों के लिए आधान की जरूरत होने पर ही रक्तदाता रक्त दिया करते हैं। अनेक दाता दान के रूप में रक्त देते हैं, लेकिन कुछ लोगों को भुगतान किया जाता है।

मंदसौर में रक्तदान के प्रणेता बने डॉ हिंमाशु
रक्तदान को लेकर आज जो जागरूकता देखने को मिलती है उसका श्रेय नगर के डॉ हिंमाशु यजुर्वेदी को जाता है। जिन्होने लोगों को रक्तदान के महत्व को समझाया व रक्तदान करने की प्रेरणा दी। आज उनकी प्रेरणा से नगर की अनेक सामाजिक संस्थाएं एवं समाजसेवी लोग रक्तदान के लिए आगे आ रहे है। डॉ हिंमाशु वर्तमान में जिला चिकित्सालय के प्रबंधक है।

ब्लड ऑन कॉल की चलाई चेन
डॉ हिंमाशु ने ब्लड ऑन कॉल की एक चेन चला रखी है जो पूरे देश भर में काम करती है। आज रक्तदान के मामले में डॉ हिंमाशु का नेटवर्क पूरे देश में फैल चुका है। मंदसौर नगर से प्रारंभ हुई सुविधा आज देश के हर कौने में पहुंच गई है। डॉ हिंमाशु ने बताया कि एक फोन पर वे देश में कही पर भी रक्त की सुविधा उपलब्ध करवा देते है।

34 बार किया रक्तदान, 4 बार राष्ट्रीय अॅवार्ड
डॅा हिंमाशु यजुर्वेदी अब तक 34 बार स्वयं रक्तदान कर चुके है। वे हर तीन माह में रक्तदान करते है और 4 बार राष्ट्रीय अवार्ड भी प्राप्त कर चुके है। वहीं वे कई रक्तदान शिविर भी आयोजित कर चुके है।

समाज में आई जागरूकता
रक्तदाताओं की प्रेरणा से आज समाजों में रक्तदान करने की जागरूकता भी आई है। आज लगभग हर समाज अपने आराध्य देव की जयंति पर रक्तदान शिविरों का आयोजन कर रहे है। वहीं जन्मदिन व शादी की सालगिरह के अवसर पर भी लोग रक्तदान को महत्व दे रहे है।

सोशल मीडिया पर बनाया नेटवर्क
हिंमाशु यजुर्वेदी ने 1998 में पहली बार रक्तदान किया था और 2011 से ब्लड ऑन बॉल की चेन चला रखी है। जिसका सोशल मीडिया पर एक बड़ा नेटवर्क खड़ा हो गया है।

15 वर्षो से नितिन सोनी रक्तदान के क्षेत्र में कर रहे है कार्य
आधी रात को भी रक्त की जरूरत होती है तो नगर का एक युवा हमेशा तैयार रहता है। नितिन सोनी मात्र 31 वर्ष की उम्र में रक्तदान में अपना बड़ा नाम कर चुके है। वे अब तक स्वयं 40 से अधिक बार रक्तदान कर चुके है और 6000 से अधिक रक्त की बोतलों का दान करवा चुके है।

इमरजेन्सी के लिए सदैव तैयार रहने वाली टीम है सोनी के पास
नितिन सोनी के बाद कभी भी किसी भी समय रक्तदान के लिए तैयार रहने वाली टीम है। जिसमें कुलदीप राणावत, लाभचंद राठौर, नरेन्द्र फरक्या, कुनिका सोनी ऐसे नाम हैं जो रक्तदान के लिए सदैव तैयार रहते है। यदि सोनी इन्हें किसी अन्य काम के लिए भी फोन लगाते है तो यह लोग यही कहते है कि कहां आना है रक्तदान के लिए।

कहानियॉ भी है रक्तदान के पीछे, जिससे आई जागरूकता
– नितिन सोनी ने बताया कि उनकी रक्त की कीमत जब मालूम हुई जब उनके मित्र के पिता नारायणगढ़ निवासी बालमुकुंद कुमावत की मृत्यु रक्त के अभाव में हुई और उस समय उनको रक्त के लिए भटकना पड़ था और मोटी राशि भी खर्च करना पड़ी थी। जब से सोनी रक्तदान के क्षेत्र में आए और स्वयं भी रक्तदान करते है और दूसरों को भी रक्तदान के लिए प्रेरणा देते है।

– अनजाने में सगे भाई के लिए ही मना कर दिया
नितिन सोनी ने बताया कि रक्तदान की एक रोचक घटना यह भी है कि मंदसौर बायपास पर एक व्यक्ति की एक्सीडेंट हो गया जिनको उपचार के लिए उन्हें नयापुरा स्थित आर के हॉस्पिटल लाया गया जहॉ पर उन्हें एबी नेगीटेव ब्लड की आवश्यकता लगी। जिसके लिए सोनी ने नगर के निवासी तुलसीराम को फोन लगाया फोन तुलसीराम की पत्नी ने उठाया उन्होने सोनी को स्पष्ट रूप से मना कर दिया कि उनके पति को कमजोरी आ जाएगी वे रक्तदान नहीं करेगे और रात होने की वजह से मोबाईल स्वीच ऑफ कर दिया। रात को सोनी ने कही ओर से रक्त की व्यवस्था कर घायल की जान बचाई और सुबह पता चला कि जिस व्यक्ति को रक्त की आवश्यकता थी वह तुलसीराम की पत्नी का सगा भाई था। जिसके बाद महिला को अपनी गलती का अहसास हुआ और तब से वह और उनके पति रक्तदान के लिए कभी मना नहीं करते।

– रक्तदान के कारण दुश्मन बने दोस्त
नितिन सोनी ने बताया एक ओर रोचक घटना घटी जिससे का दुश्मन दोस्त बन गए। कॉलेज के समय उनकी लड़ाई भरत काश्तकार से हो गई थी और ल़ड़ाई न्यायालय तक पहुंच गई। लेकिन एक दिन सोनी की किसी के लिए नेगीटीव ब्ल्ड की जरूरत थी और रक्तदाताओं को फोन लगाते लगाते फोन भरत काश्तकार को लग गया और भरत ने भी रक्तदान करने की हामी भर दी। तब से नितिन और भरत दोस्त हो गए और जब भी नेगेटीव ब्लड की जब भी जरूरत होती है। वे तैयार रहते है।

डॉ चीनी का भी योगदान है रक्तदान में
नगर में दंत रोग विशेषज्ञ के नाम से ख्यात डॉ मायू मीन को लोग प्यार से चीनी डॉक्टर कहकर पुकारते है। उनका भी रक्तदान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। परिचित हो या अपरिचित जिसको भी रक्त की आवश्यकता पड़ती है तो वे सहज रूप से रक्तदान के लिए अपने को व अपने साथियों के साथ तैयार रहते है। डॉ चीनी ने अभी तक लगभग 50 से अधिक बार रक्तदान कर इस क्षेत्र में अपनी उपस्थित दर्ज कराई है।

श्रीराम युवा ग्रुप भी रक्तदान में आगे
नगर के समाजसेवी हिम्मत डांगी के नेतृत्व में श्रीराम युवा ग्रुप भी रक्तदान के क्षेत्र में आगे रहता है। जब भी किसी जरूरत मंद को रक्त की आवश्यकता होती है। श्रीराम गु्रप अभी तक 25 से 30 रक्तदान शिविरों को आयोजित कर चुके है। ग्रुप में अनूप परमार, दिपक हलकारा, नवीन गंगवाल, प्रवीण शर्मा, सुन्दर पारवानी, राजेश राठौर माली, मनीष मलासिया, शैलेन्द्र सांखला ऐसे अनेक सदस्य है जो सदैव रक्तदान के लिए तैयार रहते है। साल के 365 दिनों ही रक्तदान किया जाता है।

मदद मंदसौर सामाजिक सेवा संस्था
मदद मंदसौर सामाजिक सेवा संस्था भी रक्तदान के लिए सदैव तत्पर रहती है। संस्था के ओम बड़ौलिया, रवि जटिया, दयाराम चौहान, अनिल पालीवाल, भरत जटिया रक्तदान करनेे से कभी भी पीछे नहीं हटते हैं।

रक्तदान से मिलता है सुकुन
नगर के युवा अंकित माहेश्वरी भी रक्त की अनमोल कीमत की समझते है। इसलिए वे भी रक्तदान के लिए सदैव तैयार रहते है। 27 वर्ष के अंकित अभी तक 31 बार रक्तदान कर चुके है और स्वयं यदि रक्तदान नहीं करपाते है तो जरूरतमंद के लिए अपना कामकाज छोड़कर रक्तदाता ढूंढने निकले जाते है। रक्तदान को लेकर अंकित जूनूनी है। उनका कहना है कि रक्तदान करने से सुकुन मिलता है।

यह है रक्तदान की प्रमुख बातें
– हेबेटाइटिस बी और सी, एचआईवी पॉजीटीव, शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, बॉय पास किए हुए व्यक्ति कभी भी रक्तदान नहीं कर सकते है।
– टैटू गुदवाया हो, मलेरिया, टाइफाइड, शरीर में कोई गहना पहना हो ऐसे व्यक्ति 6 माह तक रक्तदान नहीं कर सकते है।
– एक स्वस्थ पुरूष को हर तीन माह में और महिला चार माह में रक्तदान कर सकते है।
– रक्तदाता को रक्तदान के तुरंत बाद कड़ी धूप में नहीं निकलना चाहिए। ध्रमपान आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
– रक्तदान कभी भी भूखे पेट नहीं करना चाहिए।

 

मन्‍दसौर : रक्‍त दानदाता

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