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राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में भगवान पशुपतिनाथ मंदिर को बीच में ला रहे हैं भाजपा के नेता

भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर पर चल रही राजनीति पर युवा कांग्रेस अध्यक्ष सोमिल नाहटा का बयान

मंदसौर। भगवान श्री पशुपतिनाथ प्रत्येक मंदसौर वासी के आराध्य हैं। शहर के पालक हैं और उन्हीं से शहर की पहचान देश-विदेश तक है। हम सभी का यह लक्ष्य होना चाहिए कि भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर की ख्याति देश-विदेश तक बढ़े और बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं धार्मिक पर्यटक यहां आएं। साथ ही यहां आने वाले भक्तों-श्रद्धालुओं की मुलभूत सुविधाओं में कोई कमी ना रहे। लेकिन वर्तमान सत्ता पर बैठे भारतीय जनता पार्टी के जनप्रतिनिधि ऐसा ना करते हुए मंदिर से अपनी राजनीति को चलाना चाहते हैं। एक तरफ मूर्ति लगातार क्षरित हो रही है और भक्तों में इस बात की चिंता भी है। लेकिन इस ओर ध्यान न देकर केवल अपनी-अपनी जिद और ईगो को संतुष्ट किया जा रहा है। यह बात युवा कांग्रेस लोकसभा अध्यक्ष श्री सोमिल नाहटा ने एक बयान में कही।

आगामी श्रावण मास में पूजा एवं अभिषेक पद्धति को लेकर उठे विवाद के बाद प्रतिक्रिया देते हुए श्री नाहटा ने कहा कि हमारा लक्ष्य अधिकतम संख्या में भक्तों को मंदिर तक लाना और मंदिर के विकास के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रतिमा को सुरक्षित रखना होना चाहिए। मंदिर को लेकर किसी तरह की राजनीति उचित नहीं है और ना ही किसी राजनीति का समर्थन किया जाना चाहिए। श्री नाहटा ने कहा कि आम भक्तों को केवल दर्शनों से मतलब होता है। वे शांति के साथ भगवान के दर्शन कर अपनी मनोकामना की प्रार्थना करना चाहते हैं। ऐसे में भाजपा के जनप्रतिनिधियों द्वारा मंदिर से जो राजनीति की जा रही है, वह किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कही जा सकती। उन्होंने कहा कि प्रशासन के अधिकारियों को प्रतिमा के संरक्षण के पर्याप्त कदम उठाने चाहिए, साथ ही क्षरण रोकने के स्थाई प्रबंध करने चाहिए। इतना ही नहीं सावन मास में अधिक से अधिक संख्या में भक्त आएं और वह दर्शन कर सकें, इन व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए। आपने आम भक्तों से भी अपील की है कि मंदिर के नाम पर किसी राजनीतिक महत्वकांक्षा को पनपने ना दें और और इस स्थिति में इसका कड़ा विरोध करें।

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