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रात्रि 10 से सुबह 6 बजे तक रहेगा डीजे/ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर पूर्ण प्रतिबंध

दण्डाधिकारी ने धारा 144 (1) के तहत जारी किये आदेश

मंदसौर निप्र। मंदसौर जिले की संपूर्ण सीमा क्षेत्र में बिना अनुमति के डीजे या अन्य किसी भी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर प्रतिबंध रहेगा। ध्वनि प्रदूषण के संबंध में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के नियम 5 के तहत प्रतिदिन रात 10 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक सभी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग पूर्णतः वर्जित रहेगा। अनुमत समय में अनुमति मिलने पर ध्वनि स्तर 50 डेसीबल तक केवल 2 साउण्ड बाक्स का उपयोग ही किया जा सकेगा। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 (1) के तहत सोमवार, 18 सितम्बर को इस आशय के प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिये हैं। आदेश तत्काल प्रभावशील हो गया है।
जारी आदेशानुसार डीजे/ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग करने के लिए संबंधित क्षेत्र के एसडीएम से लिखित अनुमति लेनी होगी। अनुमति पाने के लिए अनुमति प्राप्तकर्ता को यह लिखित अन्डरटेकिंग देनी होगी कि वह डीजे/ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग करने पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अक्षरशः पालन करेगा।
जिला दण्डाधिकारी ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि किसी भी आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र का उपयोग एवं प्रदर्शन तथा इन्हें अपने साथ लेकर चलना भी पूर्णतः निषेध रहेगा। आयोजनकर्ता खुद तथा अपने वॉलिन्टियर्स के जरिये यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी रैली/जुलूस के दौरान आम यातायात कदापि बाधित न हो तथा यातायात नियमों का भी विधिवत रूप से पालन हो। इसी प्रकार कोई भी व्यक्ति या आयोजक किसी भी स्थल/जुलूस मार्ग पर पटाखा या अन्य किसी भी प्रकार की विस्फोटक सामग्री या ज्वलनशील प्रदार्थ या मशाल आदि का उपयोग या प्रदर्शन नहीं करेगा।
आदेशानुसार किसी जुलूस/रैली या शोभायात्रा के मार्ग में स्वागत मंचादि लगाने की अनुमति अलग से लेनी होगी। यह मंच ऐसे स्थान में लगाये जायें, जिससे किसी भी व्यक्ति, व्यवसाय या कार्य में बाधा उत्पन्न न हो। किसी भी आयोजन के दौरान आपत्तिजनक नारेबाजी अथवा ऐसे शब्दों का उपयोग कतई नहीं किया जाये, जिससे किसी भी धर्म/वर्ग विशेष की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहंुचे। यदि ऐसा पाया गया तो संबंधित त्रुटिकर्ता के साथ-साथ कार्यक्रम आयोजक की भी जिम्मेदारी तयकर उसके विरूद्व भी कानूनी कार्यवाही की जायेगी। किसी भी निजी भवन में झण्डे, बैनर, पोस्टर, कट-आउट्स आदि लगाने के लिए आयोजक को उस संपत्ति के वास्तविक स्वामी की पूर्व लिखित अनुमति लेना होगा और यह लिखित अनुमति संबंधित थाने में जमा करानी होगी।
जिला दण्डाधिकारी ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि देव/देवियों की मूर्तियों/प्रतिमाओं के निर्माण में केवल प्राकृतिक सामग्रियों का ही इस्तेमाल हो। मूर्तियों/प्रतिमाओं के निर्माण में परंपरागत रूप से मिट्टी का उपयोग हो और केवल प्राकृतिक व गैर विषाक्त रंगों का ही उपयोग किया जाये।

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