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रायशुमारी से आज भाजपा को मिलेगा नया जिलाध्यक्ष

रायशुमारी कर नाम ले जाएगी चुनाव अधिकारी अर्चना चिटनीस

जिलाध्यक्ष की उम्र 55 साल तक करने से कुछ की उम्मीदें जागी

मंदसौर। भाजपा में चल रहे संगठनात्मक चुनावों के तहत 30 नवंबर को जिलाध्यक्ष के चुनाव होंगे। इस बार भाजपा आलाकमान द्वारा हर पद के लिए उम्र का बंधन कर देने से काफी लोगों के अरमानों पर पानी फिर गया है। तो कई लोगों के मन में उमंग भी जाग गई है। भाजपा ने जिलाध्यक्ष के लिए 55 साल तक की उम्र तय की है। चुनाव अधिकारी अर्चना चिटनीस दोप. एक बजे से होटल डायमंड में भाजपा के लगभग 50 लोगों से रायशुमारी कर तीन या दो नामों का पेनल बनाकर लिफाफे में बंद कर देगी। यह प्रदेश भाजपा कार्यालय में खुलेगा।

भाजपा जिलाध्यक्ष के लिए राय देने के लिए भाजपा के सांसद, तीनों विधायक, सहित वर्तमान मंडल अध्यक्ष, जिला प्रतिनिधि, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, पूर्व मंडल अध्यक्ष सहित कुछ अन्य को पात्र माना है। यह संख्या लगभग 50 हो रही है। इन सभी से 30 नवंबर को दोपहर एक बजे से चुनाव अधिकारी पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस रायशुमारी शुरू करेगी। भाजपा जिलाध्यक्ष के लिए पहले 50 साल तक की उम्र की सीमा रखी गई थी। अभी हाल ही में हुए मंडल अध्यक्षों के चुनाव में 40 साल की उम्र सीमा रखने के बाद भी कई जगह विवाद की स्थिति बनी है और विधायकों, सांसदों व अन्य प्रभावशाली लोगों के हस्तक्षेप की वहज से कई मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। अब इन सबकी नियुक्ति नए प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद ही होगी। इसी चक्कर में शुक्रवार को ही प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक में जिलाध्यक्ष के लिए उम्र की समय सीमा 55 साल कर दी है।

अजयसिंह चौहान, अनिल कियावत, राजू चावला प्रमुख दावेदारों मे

अभी तक जिलाध्यक्ष के मुख्य दावेदारों में भाजपा जिला महामंत्री अजयसिंह चौहान, भाजपा के जिला उपाध्यक्ष अनिल कियावत व पूर्व मंत्री कैलाश चावला के पुत्र राजू चावला को माना जा रहा है। ये तीनों ही 50 वर्ष के अंदर की उम्र के हैं और पार्टी में काम करने का भी लंबा अनुभव है। गरोठ से राजेश सेठिया भी दावेदारी कर सकते हैं। पहले सुवासरा के पूर्व विधायक राधेश्याम पाटीदार का नाम भी दावेदारों में शामिल था, पर उनकी उम्र लगभग 58 वर्ष होने से वह दौड़ से बाहर हो चुके हैं। इधर शुक्रवार को ही उम्र सीमा 55 वर्ष तक करने से कुछ और नए दावेदार खिचड़ी पकाने में लगे हैं। निर्वाचन में मुख्य भूमिका मंडल अध्यक्षों की भी रह सकती है। जिले के 18 मंडलों में से 15 मंें नए अध्यक्ष बन गए है। वहीं गरोठ विधायक देवीलाल धाकड़ की जिद से तीन मंडलों की घोषणा रुकी हुई है।

पार्टी निष्ठा या व्यक्ति निष्ठा? आज होगा निर्णय

जिस तरह मंडल अध्यक्षों के चुनाव में पार्टी निष्ठा से ज्यादा व्यक्ति निष्ठा चली थी। अब जिलाध्यक्ष के चुनाव में भी इसी पर सबकी नजर रहेगी। पार्टी के प्रति निष्ठा काम आएगी या फिर विधायकों और सांसद से नजदीकी? इसको लेकर तमाम दावेदार भी शुक्रवार को भी अपने-अपने स्तर पर गोटियां जमाने में भिड़े रहे।

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