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रावण का एक मुंह टूटकर गिर गया, नपा अभी – भी उदासिन, 25 अक्टूबर को है विजयादशमी

मंदसौर। दशानन रावण को मंदसौर का जमाई कहा जाता है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार यह कहा जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी मंदसौर की थी और इसी कारण दशुपर नगरी का नाम मंदसौर भी पड़ा। कहा जाता है कि मंदोदरी नामदेव समाज की थी और नामदेव समाज इसी वजह से प्रतिवर्ष दशहरे के दिन रावण की विशाल प्रतिमा जो कि मंदसौर नगर के खानपुरा में स्थित हे उसकी पूजा – अर्चना करता है। लेकिन यही प्रतिमा अब दुर्दशा और नपा की उदासिनता का शिकार हो रही है। प्रतिमा कई जगह से खण्डित हो चुकी है। दशहरा इस वर्ष 25 अक्टूबर को है 10 दिन बाद जिस नामदेव समाज के लोग इस प्रतीमा की पूजा अर्चना करेगे। लेकिन प्रतीमा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है पहले रावण के दस मुह में से गधे वाला मंुह क्षतिग्रस्त हुआ था और अब रावण एक मंुह प्रतिमा से अलग होकर नीचे गिर गया। जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। रावण की प्रतिमा पर उसके दस सिर बनाये गये है इनमें से एक सिर गधे वाला भी है। जो कि क्षतिग्रस्त हो चुका था नपा ने उस पर तो ध्यान नहीं दिया उसे ठीक कराना तो दूर अब रावण की प्रतिमा का एक और सिर प्रतिमा से अलग हो गया है। वही प्रतिमा का रंग रोगन भी बेकार हो गया है प्रतिमा पर बड़ी-बड़ी घास उग गई है। वैसे प्रतिवर्ष दशहरे से पूर्व नगर पालिका द्वारा इस प्रतिमा का रंगरोगन किया जाता है लेकिन इस वर्ष दशहरे में सिर्फ 10 दिन बचे है और रावण की प्रतिमा के रंग रोगन और साफ सफाई का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है।

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