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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कर्मठ कार्यकर्ता स्व. ठाकुर डॉ. अशोक मण्डलोई का जीवन दर्शन

नाहरगढ़ जिला मन्दसौर में 20 नवम्बर 1954 को जन्मे ठा. अशोक मण्डलोई ने एक जाने पहचाने सामाजिक कार्यकर्ता व कर्मठ स्वयं सेवक के रूप में क्षेत्र में अपनी पहचान कायम की। आप नाहरगढ़ के जमींदार स्व. ठा.सा. भगवतीसिंह के ज्येष्ठ पौत्र व कवि साहित्यकार स्व. ठा.सा. उमरावसिंह मण्डलोई के ज्येष्ठ पुत्र थे। आपके तीन कनिष्ठ भ्राता है जिसमें अभिमन्युसिंह प्रतिष्ठित अभिभाषक व नाहरगढ़ के पूर्व सरपंच है तथा डॉ. जवाहरलाल मण्डलोई सेवा भारती के जिला सहसचिव है, तथा तृतीय भाई सुभाष मण्डलोई भी सामाजिक कार्यकर्ता है।
ठा. अशोक मण्डलोई की प्रारंभिक शिक्षा कचनारा लेग में हुई। शा.उ.मा.वि. क्र. 2 मंदसौर से आपने हायर सेकेण्डरी उत्तीर्ण की उसके पश्चात् शा. महाविद्यालय मंदसौर से 1975 में बीएससी साईंस से ग्रेजुएट किया। आपका चयन ओपीयम अल्कोलाईड फेक्ट्री भारत सरकार की सेवा में नियुक्त हुए थे लेकिन आपको जन सेवा करनी थी अतः आपने शासकीय नौकरी से स्तीफा देकर आपने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा से जुड़े तथा जीवन्त पर्यन्त आप संघ से जुड़े रहकर सेवा कार्यों में लगे रहे। आपने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रथम वर्ष प्रशिक्षण ग्वालियर से प्राप्त किया। आप नाहरगढ़ में विश्व हिन्दू परिषद् के राष्ट्रीय मंत्री मा. हुकुमचंदजी सांवला सा., प्रचारक रामकृष्ण मालवीय, भंवरलाल पोरवाल शारदा टाकिज के नीचे मंदसौर वालों के साथ नाहरगढ़ में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखा लगाई। वर्तमान में आप  राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ  शिक्षा प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहे। आप नाहरगढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष भी रहे। इसके साथ ही ग्राम भारती जिला समिति सदस्य के रूप में भी अपनी सेवा दी। सन् 1987 से 1990 तक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के रूप में सेवा भारती की स्थापना की व  झाबुआ जिले के भीमकुण्ड में चिकित्सालय की स्थापना करके वहां निःशुल्क अपनी सेवाएं भी दी। आपने उस क्षेत्र में बड़ी पैमाने पर जिस आदिवासियों का इसाई मशीनरी द्वारा धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था उन पर रोक ही नहीं लगाई बल्कि घर-घर भगवान श्री राम के बारे में प्रचार प्रसार के साथ ही हिन्दूत्व की रक्षा के लिये क्रांतिकारी कलम, समाचार पत्रों में लेख लिखकर हिन्दूत्व की रक्षा की। आपकी छबि एक हिन्दूत्ववादी व्यक्तित्व के रूप में उभरी। और आपने आदिवासियों को जो किश्चयन बन गये थे उन्हें पुनः हिन्दू धर्म ग्रहण कराया तथा अपने धर्म का पालन करने की उनमें अलख जगाई।
कश्मीर की एकता यात्रा के दौरान झण्डा फैराने व मंदसौर जिले में माननीय पूर्व विधायक श्री ओमप्रकाशजी पुरोहित के नेतृत्व में गई बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई जिसमें गंभीर रूप से घायल गोपाल मण्डलोई व ओमप्रकाशजी की पत्नी श्रीमती शशीकला पुरोहित भी घायल हुई। उस समय आप तत्काल आदिवासी क्षेत्र थान्दला से लुधियाना, पंजाब पहुंचे। सेवा में लग गये। उस समय वर्तमान जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक अध्यक्ष श्री मदनलाल राठौर भी साथ थे।
सन् 2004 में मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार बनने पर नाहरगढ़ के वरिष्ठ सांसद डॉ. श्री लक्ष्मीनारायण पाण्डे के सम्मान में विकास की श्रृंखला का लोकार्पण सरपंच अभिमन्यूसिंह मण्डलोई, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती देवेन्द्रकुमारी मण्डलोई के सहयोग से ऐतिहासिक कार्यक्रम मंदसौर, नीमच व जावरा क्षेत्र के मंत्री, विधायक, नपाध्यक्ष, जिला पंचायत व जनपद अध्यक्षों की उपस्थिति में हुआ। जिसे आज भी नाहरगढ़ व क्षेत्र की जनता भूला नहीं पाये।
नाहरगढ़ क्षेत्र जो कांग्रेस समर्थित क्षेत्र रहा है तथा जनसंघ के कार्यकर्ता ना के बराबर थे। तब कर्णसिंह के पिताजी श्री रामसिंहजी, अशोकजी मण्डलोई, महेन्द्र सेठिया छत्रीवाला, दिलीप सेन नीडर, गोपालसिंह मण्डलोई, स्व. दिलीप सोनी गिने चुने कार्यकर्ताओं को साथ लेकर क्षेत्र में जनसंघ को घर-घर पहुंचाने का कार्य किया तथा क्षेत्र में अनेक लोगों को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एवं जनसंघ से जोड़ा। डॉ. अशोक मण्डलोई का सम्पूर्ण जीवन मानव एवं समाज सेवा में लगा रहा। आपने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, जनसंघ तथा उनसे जुड़ी शाखाओं में अनेक महत्वपूर्ण पदों का दायित्व निर्वहन किया।
सन् 1980 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री सुन्दरलाल पटवा के समय उनके सुवासरा दौरे के दौरान डॉ. अशोक मण्डलोई ने बड़ी शिद्दत के साथ पेट्रोल की कालाबाजारी का विरोध किया। जनहित का यह मुद्दा प्रदेश स्तर पर उठाकर उसका समाधान कराया। इसी प्रकार अफीम उत्पादक किसानों की समस्याआंे को भी तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अर्जुनसिंह के समक्ष रखकर तथा लगभग 700 किसानों के साथ श्री अर्जुनसिंह से मिलकर समस्याओं का हल करवाया। आपने इस दौरान गिरतारी देकर तीन दिन जैल में भी रहे। आप पी.एम.डी.टी. एक्ट के सलाहकार समिति में भी कार्यरत रहे। आप अंतिम समय तक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एवं भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ ही पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री लालकृष्ण आडवानी, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से पत्राचार के माध्यम से जुड़े रहे। उनके द्वारा समय-समय पर विभिन्न समस्याओं को पत्रों के माध्यम से उठाया तथा उनका निराकरण भी करवाया।
ऐसी पुण्यात्मा का हम सभी को दिनांक 11 अक्टोबर 2017 को छोड़कर चले गये। आप लम्बे समय से बीमार भी रहे। उनका निधन एक अपूर्णनीय क्षति है। ऐसे पुण्यात्मा को शत्…शत् नमन।

Post source : (दिलीप सेन नीडर)

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