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राहुल  गांधी – भविष्य के राहुल कौल कि राहुल दत्तात्रेय? 

राहुल गांधी की गोत्र पर विवाद मचा हुआ है भारी विवाद के बाद राहुल गांधी ने स्वयं को कश्मीरी  कौल ब्राह्मण बताते हुए दत्तात्रेय गोत्र का बताया है। प्रश्न यह उठता है कि आखिर इसकी आवश्यकता क्यों थी? क्या कोई व्यक्ति राजनीतिक रूप से इतना मजबूर हो सकता है कि उसे अपनी वास्तविक पहचान छुपाना पड़े? क्या कोई व्यक्ति अपनी मूल पहचान को अपने से अलग कर सकता है ? तो फिर राहुल गांधी ऐसा प्रयास क्यों कर रहे हैं? पिछले लोकसभा चुनाव में जब नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री पद पर ताजपोशी हुई तभी से कांग्रेस के अंदर एक बड़ा तबका था जो यह मानने लगा था कि हिंदुत्व की धारा पर चले बिना भविष्य की चुनावी राजनीति की राह आसान नहीं होगी और तभी से जो सॉफ्ट हिंदुत्व की विचारधारा पर चलने का प्रयास राहुल गांधी के द्वारा किया गया उसी ने उन्हें आज इस गोत्र के प्रश्न के साथ भारी संकट में लाकर खड़ा कर दिया है। आज वो ना अपनी मूल पहचान को स्वीकार कर पा रहे हैं और ना ही हिंदू समाज उन्हें अंगीकृत कर पा रहा है। यदि इतिहास पर नजर डाली जाए तो राहुल गांधी के दादा श्री फिरोज खान एक पारसी धर्म के अनुयायी थे। इस नाते राहुल गांधी पारसी हुए। उन्होंने जो गोत्र बताया है वह अपने परनाना भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू का बताया है। आम तौर पर भारत में पिता, दादा, परदादा की वंशबेल गोत्र का निर्धारण करती है। दादी के बाद आप परनाना की गोत्र का धारण नहीं सकते हैं। हिंदू धर्म में गोत्र परंपरा सामाजिक ताने-बाने को सुव्यवस्थित करने के लिए रची गई थी। अति प्राचीन काल में सप्तॠषियों  के सात नामों के आधार पर गोत्र परंपरा का प्रारंभ हुआ था जो आगे चलकर कई नए गोत्र समुदाय के रूप में बढ़ गया। रिकार्ड के अनुसार वर्तमान में भारत में लगभग 115 गोत्र प्रचलन में है और इसी में संपूर्ण हिंदू समाज की जातीय और सामाजिक  व्यवस्था बनी हुई है। अब राहुल गांधी का जनेऊधारी ब्राह्मण बनने का प्रयास और अपने परनाना का गोत्र धारण करना एक सियासी मजाक मात्र बनकर रह गया है। आप राजनीतिक दांव पेंच में तो सफल हो सकते हैं लेकिन सदियों से प्रचलित गौत्रों के निर्धारण में आप राजनीति नहीं कर सकते। जब पारसी धर्म के अनुयायी के रूप में राहुल गांधी, राजीव गांधी, फिरोज गांधी इस भारतीय समाज में आज तक स्वीकार किए जाते रहे हैं तो आखिर राहुल गांधी को अपने पारसी धर्म को त्याग कर हिंदू धर्म को अपनाने की दिखावट करने और जनेऊधारी ब्राह्मण बनने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? राहुल पारसी रहकर भी भारत की राजनीति सफलतापूर्वक कर सकते थे। यदि उन्हे हिंदू धर्म स्वीकार करना ही है तो हिंदू धर्म की बाँहे इतनी फैली हुई है कि वह हर व्यक्ति का जो हिन्दू धर्म अपनाना चाहता है का स्वागत करने को तत्पर है। इसके लिए हिन्दू धर्म में दी गई व्यवस्थाओं में जाकर हिन्दू धर्म को पूर्ण रूप से स्वीकार किया जा सकता है और  उसके लिए किसी गोत्र के पीछे भागने की जरूरत भी नहीं पडेगी। तो इंतजार करें राहुल गांधी के राहुल कौल या राहुल दत्तात्रेय बनने का।
– डाॅ. क्षितिज पुरोहित 9425105610

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