Breaking News

रोजगार देने की जगह रोजगार छीनने की तैयारी में

म.प्र. जन अभियान परिषद् के कर्मचारियों द्वारा किया गया धरना प्रदर्शन

मंदसौर. म.प्र. जन अभियान परिषद् योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग जिला मंदसौर द्वारा 05/02/2019 म.प्र. जन अभियान परिषद् को भंग करने के शासन के लिये गये निर्णय के विरोध हेतु एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन गांधी चौराहा मंदसौर में किया गया। धरना प्रदर्शन में जन अभियान परिषद् को अलोकतांत्रिक एवं अमानवीय तरीके से बंद किये जाने एवं परिषद् के स्टॉ फ को जबरन स्वैअच्क् िसेवानिवृति दिये जाने के विरोध में म.प्र. जन अभियान परिषद् के अधिकारी/कर्मचारी, मेंटर्स व बीएसडब्यू् छात्र-छात्राओं के द्वारा मुख्यगमंत्री के नाम मंदसौर के अनुविभागीय अधिकारीएस.एल. शाक्य को ज्ञापन दिया गया जिसमें वर्तमान सरकार द्वारा अपने वचन पत्र में संविदा कर्मियों को नियमित करने और प्रदेश में रोजगार बढ़ाने के वचन को लेकर सत्ता में आई, का उल्लेंख किया गया। वर्तमान सरकार अब जल्द ही 615 परिवारों को बेरोजगार कर उनको बेघर करने जा रही है व साथ ही शासन स्तढर पर योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद को भंग कर उनके कर्मचारियों और अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए पूरी तरह से योजना तैयार कर ली है, और इस माह के अंत तक इस कार्य को प्रशासन द्वारा पूर्ण कर लिया जावेगा व इन सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देकर बाहर किया जा रहा है। चुंकि परिषद् की गतिविधियों के माध्य म से जनशक्ति नियोजन व जनभागीदारी के द्वारा करौडो रूपयों की शासकीय निधि की बचत हुई। इन कार्यो को कई राष्ट्री य प्रतिवेदनों में भी उपलब्धि के रूप में उल्ले्खित किया गया। इन सब कार्यो प्रभावित होकर कार्यकारिणी सभा एवं शासी निकाय से अनुमोदन उपरांत म.प्र. शासन ने जन अभियान परिषद् के समस्तं संविदा सेवकों को म.प्र. राजपत्र क्रमांक 477, भोपाल, शनिवार,दिनांक 01 सितंबर 2018 के अनुसार परिषद्भ् भर्ती एवं सेवा नियम 2018 बनाते हुए सभी संविदा पर कार्यरत् 416 अधिकारी/कर्मचारियों को नियमित कर दिया गया।

यहां आपको जानकर अजीब लगेगा कि जन अभियान परिषद का गठन तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के शासनकाल में मध्यप्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973 के अंतर्गत 4 जुलाई 1997 को किया गया था इसके बाद से परिषद ने ग्राम विकास के क्षेत्र में अविस्मरणीय कार्य कर विशिष्ट पहचान बना कर ग्राम विकास की अवधारणा को साकार करने में सरकार का पूर्ण सहयोग किया है। अब उनकी इसी सेवाभाव का प्रतिफल मौजूदा सरकार इनको बाहर करके देने जा रही है। विश्वतसूत्र बताते हैं कि सरकार ने निर्ममता का परिचय देते हुए परिषद में कार्यरत सभी अधिकारियों कर्मचारियों को उनके हितों और अपने वचन पत्र को दरकिनार कर सभी को बाहर करने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली है।

संभवत है देश में ऐसा पहला मामला होगा कि 10 साल से अधिक सेवा देने के बाद अलोकतांत्रिक एवं अमानवीय तरीके से इन्हें बेरोजगार किया जा रहा है ज्ञातव्य है कि योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के 615 पदों के विरुद्ध कार्यरत 523 अधिकारी कर्मचारियों को 5 माह पूर्व ही नियमित किया गया है यह अधिकारी कर्मचारी विगत 2007-08 से संविदा आधार पर कार्य कर रहे थे। शासन द्वारा इन अधिकारियों कर्मचारियों का विकास कार्यों में सकारात्मक उपयोग किया जा सकता है यदि इस प्रकार का अलोकतांत्रिक अमानवीय और अनैतिक निर्णय होता है तो प्रदेश का युवा किसी भी निगम, मंडल, परिषद में सेवा देने से घबराएगा तथा इस प्रकार से इन संस्थाओं के गठन और उनके औचित्य पर भी प्रश्नचिन्ह लगेगा अतः इस प्रकार से भविष्य में प्रदेश की कोई भी चुनी हुई सरकार आप की इस कार्रवाई को आधार बनाकर प्रदेश के किसी भी निगम,मंडल,परिषद को भंग कर सकेगी। यदि अनैतिक रुप से इसे बंद करते हैं तो निश्चित ही भविष्य में प्रदेश की स्थिति भयावह होगी। इस निर्णय से यह प्रमाणित हो रहा है कि बगैर परिषद् को जाने दुर्भावनावश ऐसा करके वर्तमान सरकार न केवल सब के जीवन से खिलवाड़ कर रही है बल्कि अपने रोजगार के वायदे से भी मुकर रही है। अगर जन अभियान परिषद् को बंद किया जाता है तो परिषद् के अधिकारी/कर्मचारी एवं मुख्य मंत्री सामुदायिक नेतृत्वा क्षमता विकास पाठ्यक्रम अंतर्गत मेंटर्स व छात्र छात्राएं द्वारा पुरे प्रदेश में चरणबंद्ध आंदोलन किया जावेगा। इसी संदर्भ में परिषद् के समस्तक कर्मचारियों द्वारा महामहीम राष्ट्रेपति भारत सरकार से संयूक्तत रूप से इच्छा मृत्युत की मांग की गई है।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts