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रोशनी से जगमग भगवान पशुपतिनाथ मंदिर, कार्तिक मेला शुरु

मंदसौर। शहर की परंपरा बन चुके कार्तिक मेले की शुरुआत सोमवार से होगा। सुबह के समय पशुपतिनाथ मंदिर पर चल रहे पाटोत्सव के साथ मेले का भी आगाज होगा। इस बार आचार संहिता की भेंट जरुर मनोरंजन का यह मेला चढ़ गया और इस बार आयोजन से लेकर मेले की रंगत भी फिकी ही रहेगी। सोमवार से शुरु होने वाले मेले को लेकर रविवार को दिनभर मेला स्थल पर दुकानें जमने से लेकर झुले-चकरियां जमने का ही दौर चलता रहा। इधर रविवार को शाम ६ बजे लॉटरी से दुकान मिलने के बाद अपनी दुकानें स्थापित करने में दुकानदार व्यस्त रहे। प्रारंभिक दिनों में तो दुकानों से लेकर मेला जमने में ही समय बीत जाएगा। मेले को लेकर अभी भी दुकानदारों से लेकर मनोरंजन के संसाधन वाले लोगों के पहुंचने का दौर जारी है।

मेला शुरु होने से पहले उत्साह खत्म करने की कोशिश
पिछले 50 सालों से अधिक समय से कार्तिक का यह मेला यहां लगता आ रहा है। रतलाम-मंदसौर सहित नीमच जिले में मंदसौर में लगने वाले पशुपतिनाथ मेले के समान मेला नहीं लगता है। ऐसे में इस मेले को लेकर लोगों में उत्साह का माहौल रहता है और कई बड़े मनोरंजन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम यहां होते है। अन्य प्रांतों से भी लोगों के यहां आने का दौर चलता है। २० दिनों के इस मेले में लाखों लोग यहां पहुंचते है, लेकिन इस बार आचार संहिता के नाम पर प्रशासन ने इतनी सख्ती दिखाईकी मेले की रंगत लगने से पहले ही फिकी कर दी है। नपा ने भी मेले को लेकर पहले से कोई तैयारी नहीं की। ऐसे में शहरवासी व यहां आने वाले लोग इस बार मेले के आंनद से वंचित रह जाएंगे। इस बार मेला सामान्य तौर पर ही लगाया जा रहा है। सोमवार से मेला शुरु होना है और रविवार की शाम को लॉटरी से दुकानें आवंटित की गई। अब दुकानें कब जमेगी और झुले चकरी कब जमेंगे और यहां लोग कब मेले का आंनद उठा पाएंगे।

शिवना की दुर्गंध से निपटने के नहीं इंतजाम
मेला स्थल व मंदिर के समीप प्रवाहित हो रही शिवना नदी इन दिनों मेली और पुरी तरहप्रदूषित होकर दुर्गंध का कारण बनी हुई है। नपा यहां लाईटिंग से लेकर दुकानें लगवाने के साथ मेले के नाम पर सभी खानापूर्तितो कर रही है, लेकिन शिवना से उठ रही दुर्गंध और इससे यहां आने वाले लोगों की परेशानियों को देखते हुए इसे कम करने और इससे निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए है।

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