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लगभग एक माह के इंतज़ार के बाद बहाल हुई ट्रेन सेवा

मंदसौर। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के चित्तौड़गढ़-शंभूपुरा के मध्य दोहरीकरण के ब्लॉक के कारण 24 दिन से मंदसौर आने-जाने वाली छह ट्रेनें बंद थी। बुधवार को अधिकांश ट्रेने पटरी पर लौटी तो रेलवे स्टेशन पर भी रौनक आ गई। हालांकि रेक नहीं आने से रतलाम-जमनाब्रिज पैसेंजर बुधवार को नहीं चल सकी। अब वह 21 मार्च से चलेगी। रेलवे को इस दौरान मंदसौर स्टेशन पर प्रतिदिन लगभग 50-70 हजार रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ। यहां का प्रतिदिन का कलेक्शन भी एक लाख रुपए के अंदर सिमट कर रह गया था।

बुधवार को सुबह कोटा-मंदसौर ट्रेन आई। मंदसौर-उदयपुर भी चली। इसके अलावा दोपहर में मंदसौर-मेरठ लिंक एक्सप्रेस भी अपने निर्धारित समय 1.45 बजे ही मंदसौर पहुंची। 26 मार्च के बाद से लिंक एक्सप्रेस चंदेरिया तक ही आ रही थी।

जमनाब्रिज-रतलाम पैसेंजर ट्रेन भी लगभग एक घंटे देरी से दोपहर लगभग ढाई बजे मंदसौर स्टेशन पर पहुंची। रतलाम तरफ से आने वाली रतलाम-जमनाब्रिज पेंसेजर रेक नहीं होने से बुधवार को भी नहीं चल पाई। दिन में चलने वाली सभी पैसेंजर ट्रेनों के नियमित होने से यात्रियों को भी खासी राहत मिली। इतने दिनों से वह बसों में अतिरिक्त किराया देकर परेशान हो रहे थे। इधर रेलवे को भी राजस्व का नुकसान हो रहा था। अकेले मंदसौर स्टेशन से प्रतिदिन 50-70 हजार रुपए का राजस्व घट गया था। जहां आम दिनों में प्रतिदिन मंदसौर रेलवे स्टेशन पर 1.50 लाख रुपए से अधिक ही राजस्व प्राप्त होता है। जो घटकर 80 हजार से एक लाख रुपए के बीच सिमट गया था। 24 दिन में यात्रियों को कोटा जाने के लिए कोई ट्रेन नहीं मिल रही थी। चित्तौड़ जाने के लिए सुबह एक ट्रेन थी तो दूसरी सीधे रात में थी।

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