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लगातार हो रही बारिश का दौर को सुबह थमा : बाजार में लोटी रोनक

मंदसौर. लगातार हो रही बारिश का दौर शुक्रवार को सुबह थमा तो जिलेवासियों को राहत मिली। इस बार सामान्य से अधिक बारिश जिले में हुई तो पूरा जिला पानी-पानी हो गया। तीन दिनों से शिवना उफन रहीं तो जिले के अन्य नदी-नाले भी उफान पर है। गुरुवार शाम से लेकर शुक्रवार सुबह तक शिवना भगवान पशुपतिनाथ के आंगन में रही। लगातार १५ घंटे तक शिवना ने पशुपतिनाथ का जलाअभिषेक किया। इससे पहले इसी बारिश में एक पहले शिवना गर्भगृह में पहुंचकर लौट आई थी। इसके पहले २०१६ में पशुपतिनाथ जलमग्न हुए थे।

रात 1 बजे शिवना ने भगवान का मस्ताभिषेक किया। तीन दिनों बाद शिवना शुक्रवार को शांत हुई और पानी उतरा। बुधवार के बाद गुरुवार रात तक हुई बारिश ने जिले के हालात बिगाड़े दिए थे। कई तालाब टूटने की कगार पर आ गए। रात में पानी निकालना पड़ा तो शहर से लेकर जिले में कई जगह पानी भरने के कारण कॉलोनियों से लेकर पूरे मोहल्लें प्रशासन को रात में ही खाली कराना पड़े। इस बार बारिश का आंकड़ा ५० पार पहुंच गया। इसके पहले २००६ में इस प्रकार की बारिश हुई थी और अंाकड़ा ५५ तक पहुंचा था। लेकिन इस बार अभी एक माह बाकी है और अभी से ही आंकड़ा ५० पार चला गया। शुक्रवार को मौसम खुलने के बाद भी कलेक्टर दिनभर पूरे अमले के साथ बारिश से हुए नुकसान और लोगों को राहत देने पर काम करते हुए मंथन करते रहे। वहीं लगातार बारिश के बीच जिले में अनेक कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हो गई तो पुल-पुलियाओं से लेकर सड़के भी क्षतिग्रस्त हो गई। वहीं गुरुवार को दिनभर मार्ग जिले के अवरुद्ध रहे। बाढ़ में फसे लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने के साथ उनके लिए खाने से लेकर रहने की व्यवस्था प्रशासन ने की।

गरोठ में 57 तो मंदसौर में 51 इंच पार हुआ आंकड़ा
लगातार बारिश के बीच मंदसौर में आंकड़ा ५१ इंच पार हो गया। तो गरोठ में जिले में सबसे ज्यादा ५७ इंच से अधिक बारिश हुई है। वहीं सीतामऊ में ५० तो सुवासरा में ४४, भानपुरा में ३६, मल्हारगढ़ में ४५, धुधड़का में ४३, शामगढ़ में ४४, संजीत में ४० व कयामपुर में ४९ इंच बारिश हुई। पिछले २४ घंटो में मंदसौर में १५४, सीतामऊ में १५४.६,
सुवासरा में १४३.६, गरोठ १२०, भानपुरा में १४४.२, मल्हारगढ़ में १४४, धुधड़का में १४५ शामगढ़ में १४८.२, संजीत में १७८, कयामपुर में १९५.४ मिमी बारिश हुई।

शिवना ने 15 घंटे तक किया पशुपतिनाथ का जलाअभिषेक
वर्ष २०१६ में भी शिवना में पशुपतिनाथ तक पहुंची थी और भगवान पूरी तरह जलमग्न थे। दो साल ११ माह से अधिक समय बाद शिवना ने बाबा का जलाअभिषेक किया। हालांकि २०१६ में जो पानी मंदिर तक पहुंचा था वह इससे भी अधिक था। जो बड़ी पुलिया को भी पार कर गया था। अब तक की बारिश में करीब ५ बार शिवना में बाढ़ जैसे हालात बने और नदी उफनी।

गुरुवार को दोपहर २ तापेश्वर महादेव मंदिर का शिवना ने जलाअभिषेक किया। ३ बजे पशुपतिनाथ के गर्भगृह में शिवना ने प्रवेश किया। इसके बाद लगातार जलस्तर बढ़ता गया। और रात १ बजे पूरी अष्टमुखी प्रतिमा शिवना के जल में समा गई। गर्भगृह में शिवना करीब १५ घंटे तक रही और भगवान का मस्तकाभिषेके किया। गर्भगृह के साथ शिवना पूरे मंदिर परिसर में पहुंच गई। सुबह ५ बजे बाद पानी उतरना शुरु हुआ। ६ बजे तक पूरा गर्भगृह और मंदिर खाली हो गया। शाम ७ बजे भगवान के ४ मुख डूबी हुई प्रतिमा की आरती पंडित राकेश भट्ट ने की थी।

रात में खाली करवाना पड़े मोहल्लें व दुकानें
बारिश के बीच शहर की शनिविहार और बरंगुडा मोहल्ला, खानपुरा रेस्क्यू अमले को लगातार बढ़ते पानी के बीच रात को ही खाली कराना पड़े। इन्हें सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया। इसके साथ ही यशनगर, मेघदूत नगर, नीलमशाह दरगाह अशोक नगर, अभिनंदन क्षेत्र के साथ ही धानमंडी और अन्य क्षेत्रों में जलजमाव की स्थिति बनी। यशनगर व ५०० क्वार्टर क्षेत्र में तैलिया तालाब का पानी सड़कों पर आने के कारण मार्ग दिनभर बंद रहा। इसके अलावा रात को शहर के बाजार क्षेत्र धानमंडी में तेज बारिश का पानी बढऩे के चलते दुकाने भी खाली करवाई। रात १ बजे प्रशासन के अमले ने दुकानें खाली कराई। बस्तियों में रात में ही पंप लगाकर पानी की निकासी की गई तो पानी निकालने के लिए लगाए गए पंप हाऊस ही पूरी तरह पानी में डूब गया। ऐसे में निकासी ठीक से नहीं हो पाई।

2006 के बाद गांधीसागर में बनी यह स्थिति
लगातार बारिश के बाद गांधीसागर बांध में 1303.70 फीट तक जलस्तर हो गया। बांधी की क्षमता १३१२ फीट की है। गुरुवार को यहां साढ़े ३ लाख क्यूसेक की गति से बांध में पानी बढ़ रहा था। लेकिन शुक्रवार को १ लाख ३५ हजार क्यूसेक से पानी बढ़ रहा है। एक सप्ताह में करीब ४० फीट पानी गांधीसागर में बढ़ा है। 2006 के बाद गांधीसागर बांध पर यह स्थिति बनी है। हालांकि लगातार बढ़ते पानी के बीच गांधीसागर पर बड़ी संख्या में लोग देखने पहुंच रहे है।

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