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लायन्स क्लब के तत्वाधान में 42 प्रतिभावान संस्कृत विद्यार्थीयों का सम्मान 

संस्कृत भाषा को जीवित रखने के लिए स्व.श्री हेमशंकर जी पुराणिक की स्मृति में अविस्मणीय  आयोजन – बहिन समिता

मंदसौर –  अति प्राचीन भाषा को आगे बढाने तथा उसे जीवित रखने का कार्य स्व. हेमशंकर पुराणिक स्मृति मंच द्वारा  दस वर्षो से लगातार किया जा रहा है। जो सराहनीय है। लक्ष्य उंचा होता है मंजिल को पाने के लिए तभी उसकी उंचाईयां छुई जा सकती है। इसमें ईश्वर की सहायता भी मिलती है। जब वह प्राप्त हो जाती है तो सभी को खुशी मिलती है। वर्तमान समय तथा पारिवारिक व्यवस्था बड़ी विलक्षण हो गई है। स्थिति इतनी विकट है कि जितेजी बच्चें माता पिता का सम्मान नही करते। जब कि पुराणिक परिवार दस वर्षो से संसकृत भाषा की प्रगति एवं उन्नति के लिए पिताजी की स्मृति में यह विलक्षण आयोजन करते आ रहे है। यह उद्गार प्रजा पिता बह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केन्द्र की संयोजिका समिता बहित ने व्यक्त किए।

उन्होने कहा कि हमे अपने बड़ो का सम्मान करते रहना चाहिए। परिवार में बुर्जुग व्यक्ति वट वृक्ष की तरह होते है। विद्यार्थी जीवन सुन्दर एवं सीखनेे का होता है। हम उसे जैसा चाहे वैसा बना सकते है। परंतु हमारा मत निर्मल तथा उदेश्ययुक्त होना चाहिए। संकल्प अगर मजबूत  है तो हम उसे पा सकते है। जीवन में अगर सफल होना है तो हमे सकारात्मक रहना होगा।

इस अवसर पर मुख्यअतिथि योग गुरू श्री सुरेन्द्र कुमार जैन ने कहा कि संस्कृत भाषा की चमक आदिकाल से चली आ रही है। यह सभी भाषाओं की धडृकन है। यह सब की जननी है। हम इसे वंदन करते है। उन्होने कहा कि जन्म से लेकर मृत्यु तक इस भाषा का प्रयोग हमारे जीवन में होता है। परिवार में किसी के जन्म होने पर हवन, मंत्रोच्चार से किया जाता है तथा मर्णोउपरांत भी संस्कृत के उच्चारण के साथ दाह संस्कार किया जाता है। आज का आयोजन स्व. पुराणिक के सिद्धांतो और संस्कृत के प्रति लगाव को जीवित रखने के लिए हो रहा है। अन्य विषयों का संबंध मस्तिष्क से होता है जबकि संस्कृत हदय से जुड़ी होती है। हर भाषा के साथ संस्कृत के शब्द जुड़े हुए है। संस्कृत भाषा ही नही पूरा विज्ञान है। इसे हमे आत्मसात करना चाहिए।

लोह पुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल शा.उ.मा.वि. क्र. 02 के प्राचार्य श्री अम्बाराम पाटीदार ने भी संबोधित किया। संस्कृत के व्याख्याता श्री नंदकिशोर चैहान ने भी अपना उद्बोधन संस्कृत में दिया। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने मां सरस्वती तथा स्व. पं. हेमशंकर जी पुराणिक के चित्र पर माल्यार्पण एवं द्विप प्रज्जवलित कर किया। अतिथियों का स्वागत लायन अध्यक्ष दिनेश सेनी, सचिव निर्विकार रातडिया, समृति मंच के डाॅ. देवेन्द्र पुराणिक, श्री सुरेन्द्र दिक्षित, श्री रूपनारायण जोशी, श्री नंदकिशोर राठौर, श्री सत्येन्द्र सिंह सोम, श्रीमती ममता शर्मा, श्रीमती चन्द्रकांता पुराणिक आदि ने किया। स्वागत भाषण लायन्स अध्यक्ष दिनेश सेनी ने दिया। कार्यक्रम की जानकारी डाॅ. देवेन्द्र पुराणिक ने दी।

अतिथियों ने स्व. पुराणिक स्मृति में हाई स्कूल बोर्ड परिक्षा में संस्कृत प्राविण्यता प्राप्त प्रतिभावान 42 विद्यार्थीयों को प्रतिक चिन्ह व अभिनंदन पत्र देकर सम्मानित किया।
सरस्वती विद्यामंदिर केशन नगर के भैया गोकुल परमार तथा लालबहादुर शास्त्री शा.उ.विघालय उत्कृष्ट क्रमांक 01 के विद्यार्थी दिपक जोशी, आयुष ताराचन्द्र, संतोष प्रभुलाल तथा कुमारी वंदना कमलेश ने 99 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विशेष सम्मान प्राप्त किया।  साथ ही इसी विद्यालय की मेधावी छात्राएं कुमारी ज्योति चन्द्रप्रकाश तथा कुमारी प्रियंका गोपाल ने 100 प्रतिशत अंको के साथ प्राविण्यता प्राप्त की। इन्है विशिष्ट रूप से सिल्वर मेडल पहनाकर अतिविशिष्ट प्रतिक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर अतिथियों को भी स्मृति चिन्ह भेंट किए। आभार सचिव र्निविकार रातडिया ने माना। संचालन अभय मेहता ने किया। इस अवसर पर लायन प्रवीण राठौर, मारूति पोरवाल, विकास भण्डारी, पंकज पोरवाल, मुकेश माहेश्वरी, विद्यार्थीयों के पालकगण व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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