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लिए गए कठोर निर्णय : श्री पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंध समिति की बैठक सम्पन्न

देवप्रतिमा पर जलाभिषेक केवल RO वाटर से ही किया जायेगा

देवप्रतिमा को केवल पुजारी ही छू सकेंगे

तापेश्वर महादेव मंदिर के पट 7 नवम्बर से ही खोले जायेंगे

ट्रस्ट द्वारा दी गई पूजन सामग्री से पशुपतिनाथ मंदिर में पांचों समय की आरती केवल पुजारी ही करेंगे

प्रतिमा का श्रृंगार भी पुजारी ही करेंगे

पुजारी का सहयोगी बनकर किसी को भी प्रतिमा को छूने का अधिकार नही होगा

सहस्त्र शिवलिंग की स्थापना/प्राणप्रतिष्ठा की जायेगी

गर्भगृह के अंदर फोटो या सेल्फी लेना वर्जित रहेगानये नियम 27 नवम्बर 2017 से लागू होंगे

मंदसौर।  अष्टमुखी भगवान श्री पशुपतिनाथ मूर्ति के क्षरण को रोकने के लिए सोमवार शाम कलेक्टोरेट में मंदिर प्रबंध समिति की बैठक हुई। भगवान श्री पशुपतिनाथ महादेव की अष्ठमुखी प्रतिमा में हो रहे क्षरण को रोकने के लिये हर जरूरी उपाय व प्रशासनिक व्यवस्थाएं की जायेंगी। श्री पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंध समिति की सोमवार की देर शाम हुई बैठक में यह निर्णय लिये गये। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर एवं श्री पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने की। बैठक में विधायक मंदसौर श्री यशपालसिंह सिसौदिया, नपाध्यक्ष मंदसौर श्री प्रहलाद बंधवार सहित मंदिर प्रबंध समिति के सदस्य श्री अरूण शर्मा, श्री राजेन्द्र अग्रवाल, श्री प्रहलाद काबरा, श्री सुशील गुप्ता, श्री योगेश गुप्ता, मंदिर के एडवोकेट श्री गोपालकृष्ण शर्मा, श्री सुशील अगवाल, श्री ललित भारद्वाज सहित अन्य सभी सदस्यगण तथा संबंधित जिलाधिकारी भी उपस्थित थे। —

बैठक में लिये गये निर्णय–

1. बैठक में यह तय किया गया कि महादेव प्रतिमा पर जलाभिषेक, चंदन लेप व अन्य प्रकार का श्रंृगार केवल मंदिर के नियमित पुजारी ही करेंगे। प्रतिमा को केवल पुजारी ही छू सकेंगे। प्रतिमा को नहलाने, धुलाने, साफ करने तथा पशुपतिनाथ ट्रस्ट द्वारा दी गई पूजन सामग्री से मंदिर में पांचों समय की आरती और श्रृंगार केवल पुजारी ही करेंगे। आम श्रृद्धालु देवप्रतिमा पर किसी भी प्रकार का अभिषेक या श्रृंगार नहीं कर सकेंगे।

2. प्रतिमा पर जलाभिषेक केवल आरओ वाटर से ही किया जायेगा। इसके लिए मंदिर में आरओ वाटर मशीन (200 लीटर या इससे अधिक क्षमता वाली) लगाई जायेगी। नपाध्यक्ष मंदसौर ने कहा कि अगले 10 दिनों में मंदिर परिसर में आरओ वाटर मशील लगा दी जायेगी।

3. तापेश्वर महादेव मंदिर के पट 7 नवम्बर से खोले जायेंगे। अबकी बार इसके लिए आकर्षक गेट बनाया जायेगा।

4. सहस्त्र शिवलिंग की स्थापना/प्राणप्रतिष्ठा की जायेगी। यह मंदसौर की नई पहचान बनेगा। इसे वर्तमान स्थल से बाहर निकाला जायेगा। इसके लिए पशुपतिनाथ मंदिर परिसर या शहर के किसी अन्य स्थल का चयन कर पृथक से भव्य मंदिर का निर्माण कराया जायेगा, ताकि मंदसौर शहर में महादेव के दो बडे धार्मिक मंदिर लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनें और यहां अधिक पर्यटक आ सकें।

5. पशुपतिनाथ मंदिर के गर्भगृह में अवांछित लोगों का प्रवेश निषेध रहेगा।

6. पशुपतिनाथ मंदिर के गर्भगृह के अंदर फोटो या सेल्फी लेना पूर्णतः वर्जित रहेगा।

7. प्रतिमा पर जलाभिषेक वर्जित रहेगा। जलाभिषेक हेतु मंदिर परिसर में जलपात्र लगायें जायेंगे। श्रृद्वालु जलपात्र में जल डालेंगे जो देवप्रतिमा के चरणों तक पहुंचेगा।

8. बाहर से आने वाले श्रृद्वालुओं के सामान आदि रखने के लिए मंदिर परिसर में अमानती कक्ष (लॉकर रूम) बनाया जायेगा।

9. मंदिर की सुरक्षा के लिए निजी सुरक्षा एजेन्सी कली सेवाएं ली जायेंगे। पांच सुरक्षाकर्मी लगाये जायेंगे, जो तीन पालियों में 24 घन्टे मंदिर परिसर की सुरक्षा में तैनात रहेंगे। इनकी पहली पाली सुबह 5 से दोपहर 1 बजे तक होगी। दूसरी पाली दोपहर 1 से रात्रि 9 बजे तक होगी। तीसरी पाली रात्रि 9 से अगले दिन सुबह 5 बजे तक होगी।

10. मंदिर में प्रतिदिन लगने वाले देवभोग की शुद्वता पर समुचित ध्यान दिया जायेगा। देवभोग अब किसी पुजारी परिवार से बनवाया जायेगा। देवभोग की सामग्री एवं इसे बनाने का व्यय समिति वहन करेगी।

11. पशुपतिनाथ महादेव की देवप्रसादी भी अब मंदिर समिति ही बनवायेगी।

12. मंदिर परिसर में डिजीटल साईन बोर्ड लगाया जायेगा।

13. इस डिजीटल साईन बोर्ड में प्रतिदिन होने वाले श्रृंगार एवं राजभोग के लिए श्रृद्वालु/संस्था का नाम डिस्प्ले किया जायेगा।

14. देवप्रतिमा को अधिकतम समय श्रृंगारित रखा जायेगा, ताकि क्षरण रूके और प्रतिमा का आकर्षण बना रहे।

15. देवप्रतिमा से जुडे सभी नये नियम और सभी नई व्यवस्थाएं पशुपतिनाथ मंदिर के स्थापना दिवस अर्थात 27 नवम्बर 2017 से लागू होंगे। मालूम हो कि पशुपतिनाथ की स्थापना 27 नवम्बर 1961 को हुई थी।

बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने देवप्रतिमा में हो रहे क्षरण को रोकने के लिए अपने-अपने अमूल्य सुझाव दिये। कुछ सदस्यों ने अपने सुझाव लिखित में मंदिर समिति को दिये।

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