Breaking News

लोकतन्त्र की सफलता के लिये सशक्त विपक्ष आवश्यक है – रमेशचन्द्र चन्द्रे

Hello MDS Android App
‘‘निष्पक्ष रूप से देखा जाये तो लोकतंत्र में विपक्ष बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जहां यह एक वैकल्पिक सरकार के रूप में प्रस्तुत रहता है वहीं कार्य कर रही सरकार को भी ठीक राह पर चलते रहने के लिये बाध्य करता है। राष्ट्रीय संकट की घड़ी में जन मानस की शक्ति का भरपूर प्रयोग कराकर संकट का सामना करने में सरकार की मदद भी करता है। जैसा कि भारत पर विदेशी आक्रमणों के अवसर पर हुआ है। विपक्ष न तो सरकार का दुश्मन है और न अफसरों का, वह तो जनता का प्रवक्ता है। कभी वह अल्प मत का प्रतिनिधित्व करता है तो कभी विशेषकर बहुदलिय राजनैतिक व्यवस्था में जनता के बहुमत का भी। अतः विपक्ष लोकतंत्र की एक अत्यन्त महत्वपूर्ण संस्था है। यदि कोई सरकार विपक्ष को दुश्मन के रूप में लेती है तो वह या तो तानाशाही प्रवृत्ति की है या अकुशल एवं स्वार्थी है। देश की शासन व्यवस्था पर किसी एक विशेष व्यक्ति का या एक विशेष दल का एकाधिकार नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में समुचा देश सभी व्यक्तियों एवं सभी दलों का है। उनका सत्ता में आने का अधिकार भी समान है। बशर्ते वे शासन करने के लिये बहुमत जुटा सके। कोई भी पार्टी छोटी या बड़ी, भली या बुरी नहीं है। यदि उसके लक्ष्य राष्ट्र भक्ति या राष्ट्रीय हित की भावना से प्रेरित है, यदि कोई दल अधिक सीटें प्राप्त कर लेता है तो शासन करने का उसे अधिकार इसलिये मिल जाता है कि अन्य कोई विकल्प नहीं है, कभी-कभी ऐसा भी होता है और भारत में बहुधा हुआ है कि जनता के अल्पमत से सरकार बन गई अर्थात् सरकार बहुमत का  प्रतिनिधित्व नहीं करती थी। कारण यह कि विपक्ष संगठित न होने के कारण आवश्यक मात्रा में सीट प्राप्त नहीं कर सका। त्रिकोणीय या बहुकोणीय संघर्ष में किसी दल का प्रत्याशी थोड़े से वोटों में विजयी हो गया जबकि, वास्तव में वह बहुमत का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। कहने का तात्पर्य यह है कि विपक्ष के प्रत्याशियों का भी वहीं सम्मान होना चाहिये जो कि सत्ताधारी दल के प्रत्याशियों या सदस्यों का। साथ ही लोकतंत्र की सफलता के लिये विपक्ष का सशक्त होना आवश्यक है जहां जनता का दायित्व है कि अपने प्रतिनिधि चुनकर शासन करने के लिये भेजे वहां यह भी दायित्व है कि प्रतिनिधि सत्ता में आकर अनुउत्तरदायी न बन जाए, उन पर नियंत्रण रखने के लिये विपक्ष को भी आवश्यक मात्रा में जीताकर एक सही एवं वास्तविक स्वस्थ लोकतंत्र के निर्माण में योग दे। दूसरी और विपक्ष का भी यह कर्तव्य है कि राष्ट्रीय समस्याओं पर सरकार के साथ सहयोग करें और अपनी स्थिति इतनी मजबुत बनाये कि  वह एक वैकल्पिक सरकार जब भी आवश्यकता पड़े बनाने के लिये सक्षम रहे। उसे जनता के बीच जाकर समर्थन, सम्मान एवं प्यार प्राप्त करना चाहिए। यह निरन्तर सम्पर्क एवं जनता की सेवा करके ही प्राप्त किया जा सकता है। विपक्ष के नेता जितना संसद या विधान मण्डलों में नीतियों, विधेयको आदि बहस में भाग ले उतना ही वे क्षेत्र में उतर कर जनता के दुःख दर्दो सें परिचित हो और उन्हें दूर करने के लिये निरन्तर प्रयासरत रहे। यदि इस प्रकार वे कार्य करेंगे। स्वार्थ त्याग कर सेवा, देश हित में सोचेंगे एवं कार्य करेंगे और सत्ता का मोह छोड़कर जनसेवा को अपना प्रथम लक्ष्य मानेंगे तो जनता अवश्य उसका बदला चुकायेगी। विपक्ष के नेता जो हार भी जाते है। उन्हें भी इसी लगन से जनता के बीच कार्य करना चाहिये कि जितना विजयी होने पर करते राजनैतिक नेता को समाजसेवी होना अत्यंत आवश्यक है। तभी सत्ता में भी आने का उसका अधिकार बनता है। लोकतांत्रिक प्रणाली में शासकीय दल एवं विपक्ष एक ही सिक्के के दो पहलू है। विपक्ष की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने को सशक्त बनाये। सरकार को हमेशा यह डर बना रहे कि यदि वह ठीक काम नहीं करेगी तो उ से जवाब देना पड़ेगा। विपक्ष के रूप में एक ही पार्टी रहे तो और अच्छा क्योंकि इससे राष्ट्रीय विकल्प के रूप में वह कभी भी अपने को प्रस्तुत कर सकती है। ब्रिटेन की लोकतांत्रिक प्रणाली की सफलता का रहस्य वहां की द्विदलीय प्रणाली है। सोचने के ढंग चाहे अलग-अलग हो किन्तु विपक्ष का दल एक हो, विपक्ष के लोगों को चाहिये कि वे एक मंच बनाये और राष्ट्रीय विकल्प के रूप में अपने को हमेशा तैयार रखे, तभी लोकतंत्र सफल हो सकता है।
उपरोक्त शर्तो के अधीन लोकतंत्र की सफलता के लिये एक सबल विपक्ष का होना अत्यन्त आवश्यक है।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts

1 Comment

  1. Pradip Sharma, technical director ,DD television media

    नमस्कार मंदसौर की समाचार वेबसाइट को देखकर प्रसन्नता हुई

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *