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वास्तु अनुसार केसा होना चाहिए आपके घर का फर्श

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प्रिय पाठकों/मित्रों,  घर बनाते वक्त वैसे तो हम कई चीजों का ध्यान रखते है। वास्तु का भी ध्यान रखना इसके लिए बहुत जरूरी है। वास्तुशास्त्र के अनुसार घर बनाते समय हमें घर की दिशा, दीवारों के रंग आदि का ख्याल रखना चाहिए। ये सभी चीजें घर में रहने वाली सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा के लिए जिम्मेदार होते हैं। घर में अगर सही दिशा में सही रंगों का प्रयोग किया गया है तो घर में अच्छी ऊर्जा बनी रहती है।
प्रिय पाठकों/मित्रों, वास्तु के शुभ या अशुभ परिणामों का असर, सिर्फ उस मकान में रहने वालों के जीवन पर ही पड़ता है. मकान किराये का हो, या स्वयं का, या फिर अन्य किसी के नाम पर रहे. आज हम आपको मकान के फर्श के बारे में बताने का प्रयास करेगें .
प्रिय पाठकों/मित्रों, घर में फर्श कैसा हो, इससे भी आपकी जिंदगी प्रभावित होती है। आप कौन-सी टाइल्स लगा रहे हैं या कि मार्बल, कोटा स्टोन लगा रहे हैं या कि मोजेक? यह किसी वास्तुशास्त्री से पूछना जरूरी है। कोटा स्टोन गर्मियों के लिए फायदेमंद है लेकिन ठंड और बारिश में यह नुकसानदायक ही सिद्ध होगा। इसी तरह टाइल्स भी सोच-समझकर ही लगाएं।
वास्तुशास्त्री पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री के अनुसार आपके भवन/कार्यालय में बना फर्श भी आपकी सफलता में बाधक बना हो सकता है क्योकि फर्श को ज्योतिष तथा वास्तु शास्त्र में भाग्य के रूप में जाना जाता है, चमकीले फर्श संगमरमर या ग्रेनाईट वाले फर्श भी शीशे के समान प्रभाव अपना अलग अलग प्रभाव दिखाते है. यदि आप किसी चमकीले फर्श को देखते है तो उसमे आपको अपना प्रतिबिम्ब नज़र आता है इसका मतलब जिस फर्श में आप अपना प्रतिबिम्ब देख पा रहे है वो एक शीशे की तरह कार्य कर रहा है और जिस दिशा में या घर के जिस हिस्से में ये लगा है वहाँ की गहराई बना रहा है जो कि हर दिशा के हिसाब से अलग प्रभाव देता है. आइये जानते है चमकीले फर्श कैसे हमारे जीवन में प्रभाव डालते है—
वास्तुशास्त्री पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री के अनुसार वास्तुशास्त्र में बताया गया है की  हमारे घर का उत्तर दिशा सबसे महत्वपूर्ण होता है। शास्त्रों के अनुसार यदि हमारे घर का यह दिशा सही है तो इसी एक दिशा के सही होने से घर में कई सारे खुशहाली आती है क्योंकि यह दिशा शास्त्र के अनुसार धन कुबेर का स्थान माना जाता है। इसलिए इस दिशा में गहरे काले रंग का पत्थर फर्श पर लगवाना चाहिए। यह घर में स्थित सदस्यों को खुशहाली के साथ-धन पूर्ति भी करता है।
उत्तर-पूर्व दिशा- इस दिशा में गहराई अच्छी मानी जाती है. उत्तर-पूर्व कि कोण अर्थात ईशान कोण में चमकीला फर्श अत्यंत लाभ दायक होता है. घर / भवन के यदि ईशान कोण में चमकीला फर्श है तो यह फर्श भाग्य खोलने में सहायक होता है विभिन्न प्रकार की समस्या को समाप्त करता है. घर की सन्तान हेतु भी यह शुभ फल प्रदान करता है. इसलिए ईशान भाग में हमेशा चमकीले फर्श और शीशे लाभदायी होता है. नार्थ-ईस्ट में फव्वारा भी बहुत उत्तम होता है |शास्त्रों के अनुसार इस दिशा में भगवन शिव का वास होता है तथा भोलेनाथ को नीले व् आसमानी रंग सबसे ज्यादा पसंद है, इसलिए इस दिशा में गहरे नीले या आसमानी रंग के फर्श बनवाने चाहिए।
उत्तर-पश्चिम- वास्तुशास्त्री पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री के अनुसार यह दिशा भगवन वायु देव को समर्पित है। इसलिए इस दिशा में स्थित दीवारें, पर्दें और फर्श पे ग्रे रंग होना जरुरी है। ये समस्त जानकारियां वास्तु शास्त्र के अनुसार है| इस दिशा में चमकीला फर्श मित्र को भी शत्रु बनाता है कोर्ट कचहरी के चक्कर लगवाता है | तलाक की संभावना होती है. इस दिशा को भी चमकीला ना बनवाएं| यदि है तो उसे कवर रखें. इसे ढक कर आपदाओं से बचा जा सकता है|
 पश्चिम हिस्से के फर्श पर चमकीला फर्श घर के बेटो को नुकसान देगा उनकी उन्नति में यहाँ का फर्श बाधा कारक होता है |
नैऋत्य कोण- वास्तुशास्त्री पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री के अनुसार इस दिशा में कोई भी गड्ढा होना सबसे बड़ा वास्तु दोष होता है जिसका निवारण मुश्किल सा ही है. घर के यदि दक्षिण-पश्चिम भाग में फर्श यदि इस प्रकार के चमकीले है तो यह सबसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है क्योंकि यह गहराई बनाता है जो कि अंडरग्राउंड की स्थिति होती है यह नुकसानदायक है. यहां तुरंत दरी या चटाई आदि बिछा के इसे ढक दें इससे धरती का कोप शांत हो जायगा नहीं तो आर्थिक घाटा, साझेदार से मनमुटाव,घर की स्त्रियों को नुकसान और ब्लड प्रेशर व दिल से जुड़ी बीमारियों का शिकार हो सकते हैं |
वास्तुशास्त्री पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री के अनुसार पूर्व दिशा और उत्तर दिशाः इस तरफ लगे हुए चमकीले फर्श इस भाग को गरम करते है जिसके कारण आपके लाभ होगा धन का आगमन तीव्र गति से होता है तथा घर / भवन में शान्ति की स्थापना होती है. बरकत भी बढ़ती है. घर के सभी सदस्य संपन्न होने लगते है | उत्तर पूर्व दिशा में फर्श से छत तक का दर्पण कई गुणा लाभ देता है |
घर की दक्षिण- पूर्व दिशा ब्रह्मा जी की दिशा मानी गयी है। इस दिशा में बैंगनी रंग का फर्श होना शुभ माना जाता है।दक्षिण-पूर्व दिशा में यदि फर्श चमकीला है तब फर्श की गहराई को दिखाता है जिससे हमें अग्नि सम्बंधित परेशानियाँ और कार दुर्घटना, आग लगना, कर्ज चढ़ना, करंट लगना बीमारी आदि कुछ भी होने की संभावना होती है.उसे भी ढक कर रख दे |
दक्षिण दिशा- वास्तुशास्त्री पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री के अनुसार यह दिशा शास्त्र अनुसार नर्क की दिशा मणि जाती है।इसलिए हमने कहा जाता है की कभी भी घर का प्रवेश द्वार इस दिशा में नहीं बनाना चाहिए। इस दिशा में शयनकक्ष नहीं होना चाहिए। इस दिशा में मृत्यु के देव यम का वास होता है और यह अग्नि की दिशा है। इसी कारण से इस दिशा में अग्नि के जैसे आकर्षक रंग यानि गहरे लाल रंग का फर्श सही माना गया है।
घर की उत्तर- पूर्व दिशा में भगवान शिव का वास होता है. शिवजी को आसमानी और नीला रंग बहुत पसंद है, इसलिए घर की इस दिशा में गहरे नीले या आसमानी रंग के पत्थरो का फर्श बनवाना अच्छा होता है |
वास्तुशास्त्री पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री के अनुसार पूर्व दिशा भगवान सूर्य को समर्पित होती है, अगर यह दिशा वास्तु के हिसाब से सही हो तो आपको समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है.वास्तुशास्त्र में बताया गया है की इस दिशा का फर्श गहरे हरे रंग का होना चाहिए | यदि हमारे घर का यह दिशा ठीक हो तो घर के प्रधान के ऊपर देवराज इन्द्र की कृपा बनी रहती है। तथा इस दिशा में सूर्य का उदय होता है, इसलिए इस दिशा के सही होने से पुरे समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। इसलिए इस दिशा के फर्श गहरे हरे रंग के होने चाहिए। इस दिशा में मां लक्ष्मी का वास होता है।
पश्चिम दिशा- वास्तुशास्त्री पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री के अनुसार इस दिशा में माँ लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए यह दिशा सभी दोषों और कूड़े से मुक्त होना चाहिए। यदि घर के पश्चिम दिशा में सफेद रंग के फर्श हो, तो ये सबसे उत्तम माना गया है।
ब्रह्म स्थल/मध्य भाग- वास्तुशास्त्री पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री के अनुसार इस भाग यानी ब्रह्म स्थान का चमकीला फर्श दिवालिया बनाता है क्योंकि घर के बीच कुआं आदि नही होने चाहिए यह फर्श घर में कुएं की गहराई को दिखाता है जो लोन और वित्तीय समस्याओं का द्वार खोलता है |
भोजन कक्ष या डाइनिंग रूम का फर्श घर के अन्य कमरों के फर्श से नीचा न हो। यदि संभव हो तो रसोई व भोजन कक्ष के फर्श को भवन के शेष फर्श से थोड़ा ऊंचा रखा जा सकता है। इससे हीन भावना नहीं आएगी।
इन वास्तु टिप्स को अपनाने से आपको अपेक्षित परिणाम मिलेगा, यह देश,काल /परिस्थिति अथवा आपके द्वारा इन्हें प्रयोग में लेने के तरीके पर निर्भर होगा । कृपया आप  इन्हें अपनाने से पहले किसी अनुभवी एवं विद्वान् वास्तु  विशेषज्ञ की सलाह अवश्य  लें।

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