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विकास के झूठे दावे कर जनता को छला गया – नाहटा

मेडिकल कॉलेज, संजीत पुल, फूड पार्क, टर्मिनल मार्केट जैसे मुद्दों पर जनता के बीच स्थिति स्पष्ट करें भाजपा के जनप्रतिनिधि

मंदसौर। भाजपा सरकार में हावी भ्रष्टाचार और सत्ता एवं प्रषासन के गठजोड़ ने जनता को छला है। जनप्रतिनिधि जनता के सरोकारों को बलाए ताक पर रखकर अपने हित साध रहे हैं। विकास की बस बात की जा रही है। जबकि विकास एक झूठ मात्र बनकर रह गया है। पिछले कुछ वर्षों में विकास के नाम पर जो दावे किए गए, वे सब अब हवाई बातें बनकर रह गए हैं। पिछले कुछ समय में जनप्रतिनिधियों एवं प्रषासन द्वारा विकास के जो दावे किए गए हैं, उन पर अब स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। यह बात युवा कांग्रेस लोकसभा अध्यक्ष श्री सोमिल नाहटा ने एक प्रेस बयान में कही है। श्री नाहटा ने कहा कि विकास के जो दावे किए गए थे, उन पर जनप्रतिनिधि कभी संज्ञान ना होने तो कभी फाईल देखने की बात कर रहे हैं। जबकि पहले इन कार्यों को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

मेडिकल कॉलेज- श्री नाहटा ने कहा कि मेडिकल कॉलेज मंदसौर की मांग रहा है। वैसे तो मंदसौर के जनप्रतिनिधि और प्रषासन ट्रामा सेंटर के मामले को ही पिछले सालों में हल नहीं कर सके हैं। किन्तु मेडिकल कॉलेज को लेकर तो जनप्रतिनिधियों का रवैया हास्यास्पद है। वर्ष 2013 में स्वयं मुख्यमंत्री ने मंदसौर के राजीव गांधी खैल मैदान में एक जनसभा में पीपीपी मॉडल से मेडिकल कॉलेज लाए जाने की बात कही थी। अब जनप्रतिनिधियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मंदसौर में मेडिकल कॉलेज की क्या स्थिति है और वे इसको लेकर उनकी क्या तैयारी है। इसके अभाव में इस मुद्दे को जनता के साथ छलावा ही माना जा सकता है।

टर्मिनल मार्केट- श्री नाहटा ने कहा कि मंदसौर की कृषि उपज मंडी में टर्मिनल मार्केट लाए जाने के दावे किए गए थे, जिस पर करोड़ों रूपए की लागत आना थी। लेकिन, यह मामला भी कागजों से आगे नहीं बढ़ सका। और अब कोई भी जनप्रतिनिधि इस मामले का नाम तक नहीं लेता है।

संजीत पुल- चम्बल नदी पर संजीत के निकट गरोठ की दूरी कर करने के लिए एक बड़े पुल के निर्माण के लिए सर्वे की बात भी जोर-षोर से की गई थी। एक नहीं बल्कि तीन-तीन विधायकों ने इसके लिए क्रेडिट लेने की तैयारी कर ली थी। किन्तु पुल निर्माण की फाईल भी सर्वे से आगे नहीं बढ़ सकी और अब स्थिति यह है कि जनप्रतिनिधियों से जवाब तक देते नहीं बन रहा है।

फूड पार्क- मंदसौर के दलौदा में फूड पार्क की स्थापना की बात तो स्वयं मुख्यमंत्री स्तर तक से की गई थी। इसका श्रेय स्थानीय प्रषासन और जनप्रतिनिधियों ने जोर-षोर से लिया था। किन्तु इस प्रकरण में भी भाजपा के सत्ता और संगठन के अलग-अलग स्वर सामने आए हैं। जनता को भारी रोजगार और बड़ी कंपनियों के माध्यम से विकास के स्वपन दिखाए गए। लेकिन, यह मामला भी अधर में ही है।

श्री नाहटा ने कहा कि यह वे बड़े विकास के स्वपन है, जो जनता को दिखाकर हथेली पर हाथी दिखाए गए। जबकि जनप्रतिनिधियों का ध्यान येन-केन प्रकारेण केवल लाभ कमाने में रहा और विकास मंदसौर से दूर जाता रहा। इससे पूर्व में भी हार्टिकल्चर यूनिवर्सिटी और अप्पू घर जैसी बड़ी विकास की बातें बस बातों तक ही समेट कर रह चुकी है।
श्री नाहटा ने आरोप लगाया कि यह जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता एवं निजी स्वार्थ सिद्धि में लगे रहने के परिणाम है, कि यहां बड़े-बड़े दावे बिना किसी तैयारी के कर लिए गए। श्री नाहटा ने कहा कि मंदसौर से अछूते रहे विकास के इन मुद्दों पर भाजपा सरकार के जिम्मेदारों को स्थिति स्पष्ट करना चाहिए। अन्यथ यह स्वीकार करना चाहिए कि उनका ध्यान मंदसौर के विकास पर नहीं बल्कि अपने विकास पर ही लगा रहा, जो भी अब जनता के सामने है।

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