विजय माल्या और वित्त मंत्री अरुण जेटली की मुलाकात का पूरा सच

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भगोड़े विजय माल्या के बयान से वित्त मंत्री राजनीतिक मुश्किल में पड़ गये हैं। दरअसल विजय माल्या ने कहा है कि देश छोड़ने से पहले वित्त मंत्री से मिला था और मामला सुलझाने की पेशकश की थी। हालांकि अरुण जेटली ने माल्या के बयान को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया और कहा कि मैंने कभी माल्या को मुलाकात के लिए समय नहीं दिया। अरुण जेटली ने कहा है कि विजय माल्या ने सांसद के नाते हासिल विशेषाधिकार का गलत इस्तेमाल करते हुए संसद भवन के गलियारे में उन्हें रोक कर बात करने की कोशिश की थी।

आखिर क्या है वित्त मंत्री की सफाई ?

वित्त मंत्री ने माल्या के बयान के बारे में लिखा है, “उसने एक बार इस विशेषाधिकार का गलत फायदा उठाया और जब मैं सदन से निकल कर अपने कमरे की तरफ बढ़ रहा था तो वह तेजी से पीछा कर मेरे पास आ गया। चलते-चलते उसने कहा कि उसके पास ऋण के समाधान की एक योजना है। जेटली ने कहा, “उसकी पहले की ऐसी ‘झूठी पेशकश’ के बारे में पहले से पूरी तरह अवगत होने के कारण उसे बातचीत आगे बढ़ाने का मौका नहीं देते हुए मैंने कहा कि ‘मुझसे बात करने का कोई फायदा नहीं है और उसे अपनी बात बैंकों के सामने रखनी चाहिए।” वित्त मंत्री ने कहा कि माल्या के हाथ में कुछ कागज थे, जो उन्होंने नहीं लिए।

कांग्रेस को चुनावों से पहले मिल गया है बड़ा मौका

दूसरी ओर नेशनल हेराल्ड मामले में घिरी कांग्रेस को जैसे विजय माल्या के बयान से संजीवनी मिल गयी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माल्या के ‘‘अत्यंत गंभीर आरोपों’’ की स्वतंत्र जांच के आदेश तुरंत देने चाहिए और जेटली को जांच जारी रहने के दौरान अपना पद छोड़ देना चाहिए।

केजरीवाल की भी लाटरी लगी ?

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने माल्या की ओर से किए गए खुलासे को ‘‘बिल्कुल चौंकाने वाला’’ करार दिया और सवाल किया, ‘‘वित्त मंत्री ने अब तक इस सूचना को छुपाए क्यों रखा?’’ केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीरव मोदी के देश छोड़कर जाने से पहले उससे मिलते हैं। विजय माल्या के देश छोड़कर जाने से पहले वित्त मंत्री उससे मिलते हैं। इन बैठकों में क्या पकाया जा रहा था? जनता यह जानना चाहती है।”

असंतुष्टों ने भी घेरा

भाजपा के पूर्व नेता एवं पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि न सिर्फ वित्त मंत्री अरुण जेटली बल्कि पूरे भाजपा नेतृत्व को माल्या से अपने संबंधों पर बेदाग सामने आना चाहिए।

कांग्रेस के हमले जारी

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘‘माल्या ने दो चीजें कही हैं। पहली कि उसने वित्त मंत्री से व्यवस्थित ढंग से मुलाकात की थी और दूसरी यह कि उसने मामले को सुलझाने की पेशकश की थी। इस मामले का पूरा खुलासा होना चाहिए। व्यापक स्पष्टीकरण आना चाहिए और व्यापक जांच होनी चाहिए।’’ उन्होंने सवाल किया, ‘‘जब बैंकों को मालूम था, वित्त मंत्रालय को मालूम था, पूरी सरकार को मालूम था और माननीय प्रधानमंत्री को मालूम था कि माल्या पर इतना बड़ा कर्ज बकाया है। ऐसे में उसे देश से बाहर क्यों जाने दिया गया। यह बुनियादी सवाल है जिसका उत्तर पूरा देश जानना चाहता है।’’

कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा, ‘‘वित्त मंत्री ने जब माल्या के मुद्दे पर संसद में बयान दिया तो उन्हें माल्या के साथ मुलाकात का उल्लेख करना चाहिए था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ वित्त मंत्री यह बता सकते हैं कि उन्होंने संसद को इस बारे में क्यों नहीं बताया?’’

वामपंथी भी आये मैदान में

माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि माल्या के भारत से भागने के वाकये ने एक बार फिर इस बात की पुष्टि कर दी कि मोदी सरकार ‘‘बड़े डिफॉल्टरों को जनता के पैसे लूट कर भागने देती है। असल मुद्दा यह है कि लुकआउट नोटिसों के बाद भी वह कैसे भाग गया?’’

तेजस्वी बाबू भी बोले

राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि समूची मोदी सरकार घोटालेबाजों और भगोडों से ‘‘मिली हुई है।’’ तेजस्वी ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘उन्होंने हजारों करोड़ रुपए लूटने की साजिश रची। प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को इसका जवाब देना चाहिए।’’

अपनों ने भी घेरा

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी मामले की जांच की मांग की तो कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया ने कहा कि मैंने भी विजय माल्या और अरुण जेटली को बात करते देखा था।

माहौल गर्म देख बयान से पलटी मार गया माल्या

मामला जैसे ही राजनीतिक रूप से गर्माया तो विजय माल्या ने अपने बयान की गंभीरता को हल्का करने की कोशिश करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर विवाद खड़ा करना ‘‘उचित नहीं’’ है क्योंकि यह ‘औपचारिक मुलाकात’’ नहीं थी और वित्त मंत्री से यह सिर्फ संयोगवश हुई मुलाकात थी। माल्या ने कहा, ‘‘मुझे डर है कि यह विवाद मीडिया में मेरे दोस्तों ने खड़ा किया है।’’ माल्या ने सफाई देते हुए कहा, ‘‘संसद में भोजनावकाश के दौरान मैं खड़ा था और मैं किन परिस्थितियों में बाहर जा रहा था उस पर एक सवाल का जवाब दे रहा था। संयोग से संसद में श्री जेटली मिल गए और मैंने उनसे कहा कि मैं लंदन जा रहा हूं। उनके साथ मुलाकात का मेरा कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं था।’’ माल्या ने कहा कि उनकी संसद में, सदन में, सेंट्रल हॉल में जेटली से अक्सर मुलाकात हो जाती थी।

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