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विधायक, जिलाध्यक्ष, मीसाबंदी रहे भाजपा के राधेश्याम मांदलिया का निधन

भानपुरा। जिले में भाजपा के कद्दावर नेता व गरोठ-भानपुरा क्षेत्र के पूर्व विधायक राधेश्याम मांदलिया (72) का बुधवार दोपहर में निधन हो गया। वे पुत्र अशोक, सुनील व मुकेश मांदलिया व पुत्री कृष्णा सहित परिवार छोड़ गए हैं। अंतिम यात्रा गुरुवार सुबह 10 बजे भानपुरा स्थित निवास से निकलेगी। मांदलिया कुछ समय से बीमार थे। अचानक ज्यादा तबीयत बिगड़ने के कारण परिजन मंगलवार रात को शासकीय अस्पताल गरोठ लेकर आए थे। जहां दोपहर में इलाज के दौरान निधन हो गया। मांदलिया नगर पंचायत भानपुरा के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष भी रहे जबकि गरोठ-भानपुरा विधानसभा क्षेत्र से 1990 से 1993 के बीच विधायक रहे थे। भाजपा के मंदसौर जिलाध्यक्ष के पद पर भी रहे, साथ ही विधानसभा व लोकसभा के चुनाव प्रभारी रहने के साथ पार्टी की विभिन्न जिम्मेदारियों को संभाला। सामाजिक स्तर पर भी सक्रिय रहे और अखिल भारतीय पोरवाल समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी थे। वे भानपुरा नगर परिषद अध्यक्ष रेखा-अभिषेक मांदलिया के बड़े ससुर थे।

गरोठ के पूर्व विधायक राधेश्याम मांदलिया राजनीति के साथ ही सामाजिक क्षेत्र में भी खासी रुचि रखते थे। स्व. मांदलिया ने मंदसौर जिले में कई जगह सामाजिक धर्मशालाओं के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साथ ही अनगिनत जगह वाटर कूलर भी लगाए और सार्वजनिक प्याऊ भी बनवाकर लोगों को कंठ तर करने की कोशिश में लगे रहते थे।

राजनीतिक क्षेत्र में जिस तरह उनकी भाजपा में पकड़ थी, उसी तरह वे पोरवाल समाज की गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। वे पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सुंदरलाल पटवा की किचन केबिनेट में भी हमेशा शामिल रहे। भाजपा के जिलाध्यक्ष रहने के साथ ही राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य भी रहे। सन 1990 से 1993 तक गरोठ क्षेत्र के भाजपा के विधायक रहे। भाजपा के जिलाध्यक्ष अखिल भारतीय पोरवाल महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। मांदलिया ने जीवनकाल में सामाजिक, राजनीतिक व व्यावसायिक क्षेत्र में अपना उच्च स्थान कायम किया। मंदसौर जिले के बड़े बस व ट्रक व्यवसायियों में मांदलिया को माना जाता है। दो बार इस क्षेत्र से विस का चुनाव लड़े। गरोठ क्षेत्र में भाजपा को स्थापित करने में मांदलिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्व. मांदलिया के दो छोटे भाइयों का पहले ही निधन हो गया।

मीसाबंदी भी थे

मांदलिया अपने भाइयों के परिवार के साथ संयुक्त परिवार के मुखिया थे। 19 माह आपातकाल में मीसा में बंद भी रहे। मांदलिया ने अपने राजनीतिक जीवन में दर्जनभर चुनाव का सफलतापूर्वक संचालन किया। अभी भी गरोठ विधानसभा के प्रभारी थे।

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