विवाह पूर्व पंजीयन अनिवार्य नहीं तो होगा जुर्माना, बाल विवाह रुकवाने की कवायद प्रारंभ

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अक्षय तृतीया पर होने वाले विवाह आयोजनों में बाल विवाह न हो इसके लिए प्रशासन ने तैयारियां प्रारंभ कर दी है। इस दिन होने वाले प्रत्येक विवाह आयोजन पर प्रशासन की नजर रहेगी। इसके लिए कलेक्टर एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह ने समस्त मैदानी अधिकारियों को पूर्ण सतर्क रहने के निर्देश दिए है। कलेक्टर ने सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारियों एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्र में होने वाले प्रत्येक विवाह का आयोजन का आयोजन से पूर्व पंजीयन अनिवार्य रूप से हो। यदि कोई बिना पंजीयन के विवाह आयोजन करता है तो 5 हजार रुपये का अर्थदंड अधिरोपित करें।

 

आंगनवाडी कार्यकर्ता पर होगी कार्रवाई

 

जिला कार्यक्रम अधिकारी पीसी चौहान ने बताया कि बाल विवाह रोकथाम के लिए सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए है कि उनके आंगनवाड़ी क्षेत्र में किसी भी स्थिति में बाल विवाह न होने पाएं। यदि उन्हें बाल विवाह होने की आशंका हो तो वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल सूचित करें यदि किसी अन्य माध्यम से बाल विवाह की सूचना प्राप्त होती है तथा बाल विवाह होना पाया जाता है तो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को बाल विवाह का सहयोगी मानते हुए कार्रवाई की जाएगी। सेक्टर सुपरवाइजर भी क्षेत्र भ्रमण के दौरान आमजन से जीवंत संपर्क बनाएं तथा उनको बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराएं।

शौर्या दल सदस्यों को भी दिए निर्देश

जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी रविंद्र महाजन ने बताया कि सभी शौर्या दल सदस्य भी अपने आंगनवाड़ी क्षेत्र में लोगों से बाल विवाह न करने की अपील करें। यदि परिजन उनकी बात नहीं मान रहे है तो आयोजन से पूर्व विभागीय अधिकारियों को सूचित करें। कोई भी व्यक्ति जिसके संज्ञान में बाल विवाह आयोजन की जानकारी है। वह संबंधित क्षेत्र के एसडीएम, परियोजना अधिकारी, थाना प्रभारी को सूचना दे सकता है। इसके अलावा चाइल्ड लाइन नंबर 1098 या 100 नंबर के अलावा सूचना केंद्र के नंम्बर 07422-220122 या 221345 पर भी जानकारी दे सकते है।

जागरूकता बढ़ी तो घट गई संख्या

महिला सशक्तिकरण द्वारा जनजागरण के विविध प्रयासों से जागरूकता का प्रतिफल यह रहा कि गत वर्षो की तुलना में काफी कम शिकायतें प्राप्त हुईं। बाल संरक्षण अधिकारी राघवेन्द्र शर्मा के अनुसार जहां वर्ष 2015-16 में विभाग के द्वारा 59 बाल विवाह मौके पर पहुंचकर रोके थे, वहीं वर्ष 2016-17 में यह संख्या 38 तक ही पहुंच पाई है। जबकि विभाग द्वारा इस वर्ष में सूचनादाता को मुफ्त 100 रूपए का मोबाईल बेलेंस देने की योजना भी प्रारंभ की थी। प्रशासन के जागरूकता कार्यक्रम से प्रेरित होकर अपने परिजनों की खिलाफत कर 10 बालक-बालिकाओं ने बाल विवाह शून्य कराने की पहल की है।

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