वैदिक मंत्रों की मधुर गूंजन से गुंजायमान हो रही श्री पशुपतिनाथ संस्कृत पाठशाला

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मन्दसौर। भगवान श्री पशुपतिनाथ संस्कृत पाठशाला में अध्ययनरत 27 बटूकों द्वारा नगर में जहां कहीं भी महापुरूषों-विद्वानों का विशेष सम्मेलन अथवा सत्संग समारोह होता है, उसके शुभारंभ में मंगलाचरण के लिये पाठशाला के बटूकों के द्वारा सामूहिक सस्वर वेदमंत्रों से किये जाने वाला मंगलाचरण सहज ही सबको अपनी ओर आकृर्षित कर लेता है। बटूकों द्वारा कुछ क्षणों किये जाने वाला वैदिक मंगलाचरण उपस्थित श्रद्धालु, जनसमुदाय के कानों को देर तक आत्मीय सुखानुभूति का अहसास करा देता हैं।

उक्त जानकारी देते हुए साहित्य प्रेमी बंशीलाल टांक ने बताया कि आचार्य विष्णुप्रसाद ज्ञानी के आचार्यत्व में प्रतिदिन बटूक प्रातः 4 बजे उठकर नित्यकर्म से निवृत्त होकर 5 बजे से अपने दैनिक संस्कृत अभ्यास में प्रवृत्त हो जाते है। 6.30 बजे भगवान श्री पशुपतिनाथ के रूद्राभिषेक मंे भाग लेकर जलपान के पश्चात् प्रातः 11 बजे तक वेद परायण पश्चात् भोजन कर दोप. 2 बजे तक विश्राम करने के बाद वाड्गमय अध्ययन (ज्योतिष, व्यांकरण, साहित्य, कम्प्यूटर आदि) करते है। बटूकों के साथ 10 वर्षीय बटूक गौरव तथा 2 वर्षीय नन्हीं बालिका प्रियांशी भी संध्योपासना में सम्मिलित होकर बचपन एवं बालपन से ही हमारी प्राचीन वैदिक सनातन संस्कृति एवं देववाणी संस्कृत की दिव्य ज्योति को जाग्रह रखने की परम्परा को कायम रखने का प्रेरणादायक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। सायंकाल 5 बजे से संध्यावंदन, पशुपतिनाथ मंदिर में शिवमहिमन स्त्रोत पाठ के पश्चात् रात्रि 7.30 बजे भोजनोपरांत लगभग डेढ़ घण्टा तक स्वाध्याय के पश्चात् बटूकों का 10 बजे रात्रि विश्राम होता है। भारत की प्राचीन भाषा देववाणी संस्कृत का अध्यापन नगर के लिये गौरव का विषय है।

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