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वो घटनाएं जिन्होने ‘‘मंदसौर’’ को किया ‘मशहुर’!

मंदसौर युं तो मशहुर नहीं होता पर बीते दो सालों में कुछ घटनाएं ऐसी सामने आई है जिनसे मंदसौर अच्छा-खासा मशहुर हुआ, 2017 में किसान आंदोलन में मारे गए किसान हो या मासुम के साथ सामुहिक दुष्कर्म या फिर वो प्रोफेसर हो जिन्होने अपने ही शिष्यों के सामने झुकना पड़ा जिस घटना ने गुरू-शिष्य की व्याख्या ही बदलदी हो। इन तीन घटनाओं ने मंदसौर को ऐसा मशहुर किया जितना मंदसौर, भगवान पशुपतिनाथ के नाम से न हो पाया। रिजनल से लेकर नेशनल मिडिया ने दिन-भर इन घटनाओं इतना भुनाया जितना विपक्ष, पक्ष के सामने आज तक नहीं भुना पाया। तो हम ये मानले की मंदसौर सिर्फ इन्ही कारणों से मशहुर होता रहेगा। रतलाम संभाग बनने की तैयारी में है ओर तो ओर मेडिकल कॉलेज भी रतलाम में बन गया व हर बार चुनाव के समय मंदसौर से 87 किमी दुर गरोठ में एक मांग ‘जिला’ बनने की हमेशा उठती आ रही है। लंबी दुरी में गरोठ के लोगो को मंदसौर शहर आने-जाने की परेशानी यहां की सबसे महत्वपुर्ण समस्या है। चुनाव के समय ‘जिला बनाओं समिति’ के लोग गरोठ को जिला बनाने की मांग हमेशा उठाते है । लेकिन फिर क्या होगा मंदसौर के साथ, अगर गरोठ जिला बनता है तो ऐशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित गांधी सागर झील गरोठ क्षैत्र में आना तय है फिर हमारे पास सिर्फ अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ की ही अलोकिक प्रतिमा रह जाएगी जो पुरे भारत में एकमात्र हमारे पास है पर उनकेे नाम पर हम आज तक एक ट्रेन तक नहीं चला पाए। गृभ गृह में फोटो तक प्रतिबंध है पहले बाहरी दर्शनार्थी आते थे फोटो खिंचते थे फिर साथ ले जाते थे। और फिर उस फोटो को जो देखता था उसे भी बाबा पशुपतिनाथ की एक झलक पाने की लालसा जागती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है मंदिर के घाट पर हम कपड़े धोना प्रतिबंधित नहीं कर पाए फिर बाहरी दर्शनार्थीयों को कैसे आकर्षित कर पाएंेगे। कपड़े धोने की भी धोबी समाज की अपनी समस्या है क्योंकि उनसे भी एक वादा धोबी घाट बनाने का किया गया था जो आज तक पुरा नहीं हुआ फिर वे कपड़े धाने कहां जाऐंगे। खेर आगे क्या, रतलाम संभाग बनता है तो नीमच और मंदसौर उसके क्षैत्र में आ जाएंगे। जो व्यक्ति पहले अपनी समस्या लेकर उज्जैन जाता था फिर रतलाम जाएगा। क्या हम ये मान ले की हमारे जनप्रतिनिधि हमारे लिए ना तो मेडिकल कॉलेज ला पाए और ना मंदसौर को संभाग बनाने की कोई पहल कर रहे है जिससे आस-पास की जनता को मेडिकल कॉलेज नही ंतो कम से कम संभाग की सुविधा तो मिल पाए। खेर छोडि़ए अभी आप इंतजार किजिए चुनाव नजदीक है और दोनो पार्टीयों के उम्मीदवारों के साथ एक घोषणा पत्र ऐसा जारी होगा की आप उसमें लिखी एक-एक लाईन पढ़कर अपने आप को गोरवान्वित महसुस करेंगे की इतना कुछ मंदसौर में भविष्य में होने वाला है। लेकिन वो महसुस करने से पहले आप ये जरूर समझने की कोशिश करना की पुरानी घोषणाओं में जो लिखा था उनमे से क्या-क्या जमीनीस्तर पर हो पाया। जवाब साफ है कि हम जिस क्षैत्र में मशहुर होना चाहते है उसमें नहीं हो पा रहे लेकिन कुछ गंभीर घटनाएं हमें अच्छा-खासा मशहुर कर रही है। यहीं कारण है कि हम पिछड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है।

कमलेश गडि़या, मंदसौर 9074491678

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