Breaking News

व्यापारियों व किसानों के बिगड़ती स्थिति का कारण केन्द्र सरकार की नीतियाॅ

Story Highlights

  • केन्द्र की नीतियों के कारण राज्य सरकारों को भी झेलना पड रही है आलोचनाएॅ

मंदसौर निप्र। जिले के पिपल्यामंडी में कृषि उपज की उचित समर्थन मूल्यों की मांगों को लेकर 1 जून से चल रहा कृषक आंदोलन 6 जून को हिसंक आंदोलन में तब्दील हो गया। इस आंदोलन में 6 किसानों की पुलिस मुठभेड़ में मृत्यु हो गई तथा कई अन्य घायल हो गये। इस किसान आंदोलन के उग्र व हिंसक आंदोलन का रूप लेने के बाद कई व्यवसायिक प्रतिष्ठानों, वाहनों, पुलिस चैकियों, सार्वजनिक सम्पत्तियों को नुकसान पहुॅचाया गया। वहीं दूसरी और मारे गये किसानों के प्रति देश भर में संवेदनाएॅ व्यक्त कि गई और होना भी स्वाभाविक है चूॅकि मामला अत्यंत संवेदनशील व देश के अन्नदाता से जुड़ा हुआ मसला था देश भर के राजनीतिक दलों के नेताओं का 6 किसानों के प्रति संवेदना व्यक्त करने व मंदसौर पहुॅचने का सिलसिला लगातार बना हुआ है। उक्त बात कहते हुए नगर के युवा समाजसेवी कमल कोठारी ने कहा कि शिवराज सरकार ने भी अपनी उदारता व किसानों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि के रूप में मृतक किसानों के परिजनों को 1-1 करोड़ देने की घोषणा की गई व स्वयं किसान की समस्या से रूबरू होने के लिये सार्वजनिक मंच पर अनशन उपवास तक किये तथा किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम मिलने के समर्थन में सरकारी मूल्य पर खरीददारी करने का भरोसा दिलाया गया। सरकार ने 8 रूपये किलों प्याज खरीदकर भंडारण तक की व्यवस्था लागु की। इसके लिये खुदरा बाजार में दो रूपये की दर से बेचने का ऐलान भी किया। इस वित्तिय घाटे की भरपाई सरकार अपने राजकोष से ही करेगी। किसानों की अन्य उपज दलहन व तिलहन को भी सरकार समर्थन मूल्य पर खरीदेगी जो भी स्वागत योग्य है। शिवराज सरकार के अब तक के 13 वर्ष के कार्यकाल में व्यापारियों व किसानों के लिये स्वर्णीम रहे हैं लेकिन केन्द्र सरकार की नीतियांें के कारण राज्य सरकार भी बैकफुट पर आती नजर आ रही है।

श्री कोठारी ने आगे बताया कि किसानों के हितों के लिये ही शिवराज सरकार ने किसानों को अपनी उपज के बदले किसानों को व्यापारियों से 50 प्रतिशत तक नगद भुगतान करने का भी आश्वासन दिया है। चॅूकि आयकर अधिनियम में नये नियमों के तहत् कृषि उपज का 20 हजार से ज्यादा का भुगतान नगदी में नहीं करने का प्रावधान किया है। अब 50 प्रतिशत तक का भुगतान नगदी में करने का ऐलान शिवराज सरकार के लिये गले की हड्डी बन गया है। वहीं मंडीयों में समर्थन मूल्य पर खरीददारी नहीं करने वाले व्यापारियों के विरूद्ध भी प्रकरण दर्ज करने के आदेश दे डालें। केन्द्र सरकार की व्यापारियों के प्रति विरोधी सोच का यह दुष्परिणाम है कि किसान व व्यापारियों को सरकार की नीति नियम के विरूद्ध एक दूसरे के आमने सामने होना पड रहा है। राज्य सरकार ने व्यापारियों के समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं करने पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिये इस आदेश के विरूद्ध प्रदेश के सभी मंडी व्यापारीयों ने अनिश्चितकालीन बंद करने का निर्णय कर लिया। व्यापारी व किसान देश की रिढ़ की हड्डी है दोनों के सामूहिक प्रयासों से ही देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। लेकिन केन्द्र सरकार की नीतियों ने देश व राज्य की अर्थव्यवस्था को धराशायी कर दिया है। केन्द्र की तीन साल की सरकार ने ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाया जिससे किसान या व्यापारी को फायदा होता नजर आया हो। केन्द्र की आर्थिक नीतियों की आलोचनाओं का शिकार राज्य सरकारों को भी झेलना पड़ रहा है। यदि केन्द्र सरकार के तीन सालों के कार्यकाल पर नजर डाली जाये तो यह गरीब और अमीर के बीच दरार डालने के मंशा के अनुरूप दिखाई देता है। काले धन और गरीबों के खाते 15 लाख रूपये आने जैसे वादों को लेकर सरकार तो बना ली गई लेकिन बाद में सराफा व्यापारियों के उपर गाज गिराना, नोटबंदी जैसे कार्य केन्द्र सरकार ने किये 29 बार नोटबंदी के नियमों में बदलाव किये गये लेकिन कालाधन तो बाहर नहीं आया और जनतो का परेशानी का सामना करना पड़ा और नई करैंसी का खर्च सरकारी खजाने पर डाल दिया गया। दूसरी और सरकार ने प्रापर्टी व्यवसाय पर भी एक्ट बनाकर शिकंजा कसने का प्रयास। जिससे रियल एस्टेट कारोबार में भी मद्धी का दौर शुरू होेे गया।
श्री कोठारी ने कहा कि 1 जुलाई से जीएसटी लागू किया जा रहा है जिसमें व्यापारियों को 36 तरह के रिटर्न दाखिल करना होगे। सरकार के कठोर नियम कानून लागू करने से देश की अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है लगातार हालत सुधरने के बजाये बिगड़ रहे है। हर तरफ माहौल बिगड़ रहा है किसान, व्यापारी, कर्मचारी सभी आंदोलन या हड़ताल कर रहे है लेकिन सरकार पर कोई असर नहीं हो रहा है। दूरगामी परिणाम अच्छे दिनों की लालसा में बिगड़ते जा रहे है। सरकार नियम व कानून बनाने से पहले व्यापारियों व किसानों के जनप्रतिनिधियों के संगठनो से बातचीत करना चाहिये ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ सके।

Post source : कमल कोठारी 9826297911

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts