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शहर में नियमों के विपरित दौड़ रही टैक्सियां, छूट-पूट कार्रवाई करके बैठ जाते हैं जिम्मेदार

मंदसौर निप्र। शहर में कई ऐसे चौपहियां वाहन है, जो टैक्सी परमीट के नाम पर नियमों के विपरित दौड़ रहे हैं। इनमें से कई वाहनों के पास टैक्सी परमीट ही नहीं है, इसी तरह कुछ वाहन तो एसे हैं, जो अन्य प्रदेशों के होने बावजूद शहर में सरपट दौड़ रहे हैं। इन वाहनों के मालिकों को ना तो नियमों की परवाह है ना किसी कायदों की ये बस अपना फायदा देखकर सरकार के नियमों का सरेआम मखौल उड़ा रहे हैं। इधर, इन पर कार्रवाई करने वाले परिवहन विभाग के जिम्मेदार भी हमेशा छूट-पूट कार्रवाई करके अपने कर्तव्य से इतिश्री कर लेते हैं।
बीपीएल चौराहे पर नूतन स्टेडियम के पास खड़े रहने वाले 100 से अधिक चौपहियां वाहनों में से अधिकांश के मालिकों द्वारा परिवहन विभाग के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। कहने को तो ये सभी टैक्सी परमीट गाड़ियां हैं, लेकिन टैक्सी संचालन का नियामानुसार परमीट कुछ ही मालिकों के पास है। इसी तरह परिवहन विभाग का एक ओर नियम है, कि अन्य प्रदेश का वाहन मप्र में बगैर पक्के परमीट के महज 6 माह से अधिक नहीं चल सकता, लेकिन सुत्र बताते हैं, कि शहर में दौड़ रहे टैक्सी वाहनों के संचालकों में से कई के पास इस तरह का कोई परमीट सालों से नहीं हैं। कुछ वाहनों पर तो नंबर प्लेट भी नियमों के विपरित है। टैक्सी वाहनों में लापरवाही की दास्तां यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि कुछ वाहन मालिकों ने तो अपने लाभ के लिए सस्ते में काम करने वाले अनुभवनहिन चालकों को काम पर रख रखा है, जिससे आए दिन सड़क हादसों की संख्या में इजाफा हो रहा है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट द्वारा चौपहियां वाहनों के कांच से काली फिल्म उतरवाने के निर्देशों का पालन भी कई वाहनों में नहीं है। अपुश्ठ किंतु भरोसेमंद सुत्रों की माने तो परिवहन विभाग के कुछ नुमाईंदे जब भी इन टैक्सी चालकों को नियमों का पाठ पढ़ाने आते हैं, तो कुछ भी ले-देकर मामले को वहीं शांत कर दिया जाता है और फिर वही लापरवाही का ढर्रा जारी रहता है। षायद यही कारण है कि विभाग द्वारा इतने सालों में आज तक नियमों कों तांक पर रख दौड़ रहे इन वाहनों पर कोई सख्त या बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाई है, जबकि इन्हें सबक सिखाने के लिए विभाग को एक अभियान चलाने की आवश्यकता है।

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