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शासकीय जमीन पर खड़ा हो गया मार्केट

मिली भगत का आरोप, कलेक्टर निष्पक्ष जांच करें ध्वस्त हो सकता है कॉम्प्लेक्स

मंदसौर। नगर के समीप से गुजरने वाले बायपास रोड़ पर शासकीय जमीन पर धनबल के आधार पर मार्केट का निर्माण कर निर्मित दुकानों को लाखों रूपये बेच भी दिया गया हैं ऐसी जानकारी मिली है।

सूत्रोे से मिली जानकारी के अनुसार महू – नीमच रोड़ बायपास पर एक भूमाफिया ने धनबल के आधार पर शासकीय भूमि पर लगभग 15 दुकानों का मार्केट खडा कर यह जता दिया कि धन बल के आधार पर किसी को भी खरीदा जा सकता है। सबकुछ बिकाउ है। आवश्यकता तो खरीददार में होना चाहिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त व्यक्ति की भूमि जहां पर उसने दुकानों का निर्माण किया है उससे पीछे है और सरकारी जमीन के साथ – साथ नाला जा रहा है। लेकिन उक्त भूमाफिया ने अपने धनबल के दम पर नाले को ही दफन कर दिया।

वैसे भी नगर के जल स्तोत्रों को नष्ट करने वाले कॉलोनाईजरों का कुछ नहीं बिगढ़ा तो शासकीय जमीन पर मार्केट बनाने वाले का कौन क्या बिगाढ़ सकता है, क्योंकि निर्माणकर्ता ने तो सर्वाहारा की भलाई करते हुए हर जिम्मेदार को चुप कर दिया है। सत्ता परिवर्तन के बाद शासकीय जमीनों पर कब्जा करने वालों की गति जरूर थमी थी लेकिन अब यह कार्य दू्रगति से शुरू हो गया है। वैसे भी इस शहर की परंपरा में शुमार हैं कि अगर कोई गरीब झोपडी बनाकर रहने लगे तो हर जिम्मेदार उसका अतिक्रमण हटाने दौड़ पड़ते है और अपनी सफलता के झण्डे गाढते हुए प्रेसनोट जारी करते है। लेकिन करोड़ो का खेल करने वालों पर उनकी निगाहें क्यों नहीं उठती यह प्रश्न आमजन को परेशान कर रहा है।

शासकीय जमीनों को एवं ग्रीन बेल्ट की जमीनों को अपना बताकर मार्केट व कॉलोनियां उगाने वाले अगर ऐसे लोगों को नहीं रोका गया तो शहर के लिए वह दिन दूर नहीं है जब रसूखदार धनबल के आधार पर नगर में निर्मित शासकीय भवनों को भी अपना बताकर बेच देंगे।

कलेक्टर निष्पक्ष जांच करें तो स्थिति हो सकती है साफ

कलेक्टर मनोज पुष्प यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच करें तो भूमाफिया ने कैसे सरकारी जमीन का उपयोग किया है यह स्पष्ट हो सकता है। हालांकि इस संबंध में हाल ही में स्थानांतरित होकर आई पटवारी शाहिबा पयामी का कहना था कि यह मामला मेरे आने के पूर्व का है और मेरी जानकारी के अनुसार यह जमीन निजि है।

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