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शासन प्रशासन की चींटी जैसी चाल अपराध और अपराधियों के हौसले बुलंद कर रही है : बेटियों की सुरक्षा का दायित्व हम पर

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(कमल कोठारी) हैवानियत, दरिंदगी, शैतानियत की चरम पराकाष्ठा की भी हद को पार कर 8 वर्ष की मासूम अबोध बालिका के साथ विभत्स दुष्कर्म की घटना से सम्पूर्ण समाज हतभ्रत एवं विचलित है। 26 जून को आरोपीगण वहसी दरिंदे मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म करने के पश्चयात लहूलुहान हालात में फेक कर चले गए।
इस अमानवीय विभत्स घटना की जितनी निंदा की जाय उतनी कम है। इस तरह की विभत्स क्रूर घटना से समाज का हर वर्ग आक्रोशित एवं चिन्तित हैं दिल्ली की निर्भया कांड की काली स्याही अभी हमारे मानसिक पटल से सूखी भी नही थी कि मंदसौर में इरफान और आसिफ जैसे वहसी दरिंदों ने फिर एक मासूम अबोध बालिका के साथ मानवता को शर्मसार करने वाली कलंकित घटना को अंजाम दे दिया।
इस तरह की घिनौनी घटना से हर बेटी के माँ बाप के ऊपर चिन्ता की लकीरें खिंच गई। स्कूल जाने से लेकर बाजार से घर वापस नही आने तक हर माँ बाप बेचैन एवं चिंता के अवसाद में रहेंगे। बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ जैसे नारे अब गौण हो जायेगे ये नारे सिर्फ बड़े-बड़े होर्डिंग और तख्तियों के स्लोगन बन जायेंगे। जिनका कोई ओचित्य नही रह जायेगा ना तो बेटियों को पढ़ाया जाएगा, ना ही घर से निकला जाएगा। कब किस वहसी दरिंदे की नज़र का शिकार हो जाय पता ही नही चल पाएगा ? सम्पूर्ण समाज को इस बात का चिंतन करना होगा कि बेटियों के भविष्य की सुरक्षा किस प्रकार की जाय ? बेटियां हर परिवार व समाज की अमूल्य धरोहर हैं इनकी सुरक्षा का दायित्व हम सब पर है बेटियां राष्ट्र का भविष्य हैं।
मनुष्य जिस समाज के उच्च पायदान पर खडा हैं उनमे इन नारियो का ही योगदान हैं चाहे वो एक बेटी के रूप में हो, पत्नी के रूप में हो या माँ के रूप में हो। इनके अस्त्तित्व के बिना मनुष्य जीवन की कल्पना भी बेकार हैं। फिर क्यों एक मानव नारी की अष्मिता और अखंडता को चूर-चूर करने पर क्यो आमद हैं? आये दिन हो रही इस तरह की दुष्कर्म की घटनाएं समाज के लिए ही नही राष्ट्र के लिए भी अभिशाप एवं घातक है। समाज, सरकार को चिंतन करना होगा कि इस तरह की दुष्प्रभावी घटनाओ को रोकने के लिए क्या प्रभावी कदम उठये जाए जिससे इस तरह की अमानवीय घटना की पुनरावृति ना हो यघपि सरकार ने दुष्कर्म करने जैसी घटनाओं पर फांसी देने का प्रावधान लागू कर इस तरह की घटनाओं को रोकने का प्रयास किया है। लेकिन नरभक्षी हवस के भेडियों पर इनका कोई प्रभाव दिखलाई नही दे रहा है। एक अखबार की खबर के मुताबिक़ मध्यप्रदेश में 120 दिनों में 1554 रेप की घटनाएं घट चुकी हैं यानी हर दिन 13 रेप की घटना घटित हो रही हैं। इतना सब कुछ प्रदेश व देश मे घटित होने के बाद भी हमारी सरकार  मूकदर्शक की भूमिका में खड़ी नज़र आती हैं।
शासन प्रशासन की चींटी जैसी चाल अपराध और अपराधियों  के हौसले बुलंद कर रही है? सरकार शैक्षणिक संस्थाओं में बालिक नाबालिक बच्चे बच्चियों को अनजान विपरित परिस्थितियों से लड़ने के गुर भी सिखाये जिससे वो विपरीत परिस्थितियों से अपना बचाव कर सके स्कूल प्रसाशन की जवाबदेही भी तय हो  जिससे बच्चा सकुशल घर आ सके। साथ ही पुलिस प्रशासन छेड़छाड़ जैसी घटनाए को हल्के में ले कर अपनी जवाबदारी से मुक्त हो जाती हैं ? जिससे इस के दूरगामी परिणाम घाटक घटना में परिवर्तित हो जाते है। महिला पुलिस बूथ का चलित संचालन हो जिससे त्वरित करवाई कर आरोपी पर तत्काल कार्यवाही हो, पीड़ित पक्ष की सुनवाई थानों की जगह उसके घर पर हो। इन तमाम बिंदुओं पर परीक्षण कर अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान कर बेटियों को सुरक्षा प्रदान करने का जिम्मा लेना होगा। दुष्कर्म के आरोपियों को बीच चौराहे पर फाँसी देना का अध्यादेश लागू करें जिससे अपराध करने वाले अपराधियो में अपराध के प्रति ख़ौफ़ एवं भय का वातावरण निर्मित हो जिससे भविष्य में कोई दरिंदा ऐसी घिनोनी हरकत ना कर पाए।

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