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शिक्षक भर्ती आतें ही नगर में उग गई कुकरमुत्तें की तरह कोचिंगें क्लासें

जो स्वयं कोई प्रतियोगी परिक्षाएॅ पास नहीं कर पायें वे दिखा रहें है विद्यार्थियों को सरकारी नौकरी के सपने

कोचिंग संचालकों को यह तक मालूम नहीं कि शिक्षक भर्ती इस बार संविदा नहीं है

मंदसौर। लम्बे अरसे के बाद मध्यप्रदेश शासन ने चुनावी वर्ष में युवाओं को साधने के लिए शिक्षक भर्ती परिक्षा निकाली है। जिसके लिए शासन ने वर्ग 1 के लिए लगभग 17000 पद व वर्ग 2 के लिए लगभग 5500 पद आंवटित किए है। जैसे ही शासन द्वारा व्यापम के माध्यम से भर्ती व परिक्षा की घोषणा की। वैसे ही नगर में शिक्षक भर्ती परिक्षा की तैयारी करवाने के लिए कुकुरमुत्ते की तरह कोचिंगे खुल गई जो विद्यार्थियों ये यह दावा कर रही है कि हमारे यहॉ पढोंगे तो निश्चित रूप से चयन होगा।

अनुभवहीन शिक्षक पढ़ा रहें
जिन्होने कभी अपने जीवन में कोई प्रतियोगी परिक्षा उत्तीर्ण नहीं की। ऐसे शिक्षक विद्यार्थियों को प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी करवा रहे है और उंचे – उंचे स्वप्न दिखा रहे है। इन कोचिंग संचालकांें द्वारा दावा भी किया जाता है कि मात्र 1.5 माह में तैयारी करवा दी जायेगी।

झूठे वादे कर वसूलते है मोटी फीस
प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी करवाने वाली संस्थाएॅ अपने यहॉ आने वाले विद्यार्थियों को झूठे झूठे स्वप्न दिखाकर झूठे वादे कर उनसे 5 से 10 हजार रूपये तक फीस वसूल करते है। कई बार तो यह कोचिंग संचालक विद्यार्थियों को बीच में ही धोखा देकर अपनी कोचिंग बंद कर देते है।

संविदा नहीं परामनेन्ट शिक्षक भर्ती है इस बार
जो कोचिंग संस्थाएॅ विद्यार्थियों से यह दावा कर रही है कि वे प्रतियोगी परिक्षाओं में चयन करवा देगी। उनकी योग्यता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि कई कोचिंग संचालक अपने विज्ञापन में लिख रहें है कि हमारे यहॉ पर संविदा शिक्षक भर्ती की तैयारी करवाई जा रही है। लेकिन सच यह है कि इस शिक्षक भर्ती संविदा न होकर सीधे स्थाई है।

सेल्फ स्टीड होती है महत्वपूर्ण
शासकीय शिक्षक सुनिल कटलाना ने बताया कि कोचिंग संस्थाओं द्वारा 2 से 3 माह में प्रतियोगी परिक्षाओं में तैयारी करवा पाना संभव नहीं है। प्रतियोगी परिक्षाओं में यदि सफलता प्राप्त करना है तो सेल्फ स्टीड करके दिन में 8 से 10 घंटे पढ़ाई करके और अधिक से अधिक किताबें पढकर ही सफलता प्राप्त कि जा सकती है।

मॉनटरिंग का अभाव
यह कोचिंग संस्थाएॅ इसलिए भी फल फूल जाती है क्योंकि इन पर निगरानी रखने के लिए कोई विभाग या जिम्मेदार अधिकारी नहीं होता। इसलिए कोचिंग वाले मनमानी फीस लेकर भी विद्यार्थियों से झूठ वादे करते है और बाद में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं होती है।

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