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शिवना गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण का कार्य प्रारंभ

सभी सामाजिक संगठन उत्साह के साथ किया श्रमदान – पुष्प

मन्दसौर। जिले में शिवना गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण का कार्य आज से युद्ध स्तर पर प्रारंभ हो गया है। इस कार्य के लिए प्रशासन के साथ-साथ सामाजिक संगठन भी उत्साह के साथ आगे आया है। इस उत्साह को आज सुबह श्रमदान करते समय देखा गया। इस कार्य के लिए हर व्यक्ति अपने स्तर पर अपनी शक्ति अनुसार कार्य कर रहा है। इस कार्य के लिए कलेक्टर श्री पुष्प ने नगरपालिका के संसाधन एवं अमले को इस कार्य के लिए लगा दिया गया है। इस कार्य में सहयोग प्रदान करने के लिए कलेक्टर द्वारा निर्देश दिए गए की सभी विभाग समय-समय पर आकर शिवना गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण में सहयोग प्रदान करें। इस कार्य के लिए समाज के साथ-साथ सभी विभागों की भी प्रमुख जिम्मेदारी है। इस दौरान कलेक्टर श्री मनोज पुष्प, अपर कलेक्टर श्री अनिल कुमार डामोर, राजस्व विभाग के अधिकारी व कर्मचारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।
इस कार्य के लिए आज पहले दिन दो जेसीबी, दो ट्रैक्टर, दो डम्पर इस कार्य के लिए लगाए गए। श्रमदान के माध्यम से चार डाली मलबे की नदी से बाहर निकाली गई। इस अभियान के दौरान कलेक्टर श्री पुष्प द्वारा कहा गया कि नदियों की सफाई रखना बहुत जरूरी है। नदियां हमारे देश की आधारशिला है। नदियों के किनारे प्राचीन सभ्यताओं का विकास हुआ है जिसमें सिंधु सभ्यता, चीनी सभ्यता, मेसोपोटामिया की सभ्यता, माया सभ्यता इसके प्रमुख उदाहरण है। नदियों की वजह से ही इन सभ्यताओं का व्यापार, आयात – निर्यात की चीजें एक सभ्यता से दूसरे सभ्यता की तरफ जाती थी। भारत में सिंधु सभ्यता सिंधु नदी के आसपास विकसित हुई, मेसोपोटामिया की सभ्यता दजला एवं फरात नदियों के किनारे, वही माया सभ्यता का विकास नील नदी के किनारे हुआ। भारत में गंगा नदी के किनारे लगभग 3000 शहरों ने अपने निर्माण की गौरवगाथा लिखी है। अगर मन्दसौर की बात की जाए तो शिवना नदी की वजह से ही प्राचीन काल, मध्यकाल, आधुनिक काल तक भी मन्दसौर का विशेष महत्व रहा है। यहां तक कि भगवान पशुपतिनाथ की मूर्ति भी शिवना नदी से ही प्रकट हुई एवं इसी किनारे पशुपतिनाथ मंदिर का निर्माण हुआ। यह मंदिर भारत के कुछ विशेष मंदिरों में से एक है अर्थात शिवना से शिव का संगम बहुत ही अद्भुत है। इस दौरान नगर पालिका को निर्देश दिए कि रामघाट से पशुपतिनाथ तक बीच के मलबे को जेसीबी से खोदे एवं ट्राली के माध्यम से उसको तुरंत बाहर निकाले।

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