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शिवना नदी के प्रदूषण की होगी जांच सेंपल लिए

मंदसौर। आखिर क्या कारण है कि लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद शिवना नदी प्रदूषण मुक्त नहींं हो पाई है यह प्रश्न सभी के मन मे है मंदसौर की जीवनदायिनी कही जाने वाली शिवना नदी दम तोड़ रही है. नदी में इतना प्रदूषण है कि उससे उठने वाली दुर्गंध से सब परेशान हैं. मंदसौर के सारे गंदे नालों का पानी बरसों से शिवना नदी में डाला जा रहा है.

मंदसौर को धार्मिक नगरी घोषित किया गया है. और शिवना नदी को पवित्रता हीर कहा जाता है. लेकिन इसमें पवित्रता कहीं-से-कहीं तक नज़र नहीं आती है. नदी तो निर्मल जल लेकर आती है लेकिन यहां आते ही उसमें शहर भर के नाले-नालियों का पानी डाल दिया जाता है. इसलिए शहर में प्रवेश करते ही नदी का पानी सड़ गया है, उसमें से दुर्गंध उठ रही है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत इसी दुर्गंध और प्रदूषित जल से होता है.

शिवना नदी में कहां से हो रहा प्रदूषण जांचने के लिए सेंपल में प्रदूषण कहां-कहां से फैल रहा है। इसको लेकर प्रदूषण नियंत्रण के अधिकारी मंदसौर पहुंचे। यहां पर गठित दल के साथ उन्होंने पांच स्थानों से सेंपल लिए है। जिसमें बुगलिया नाला, खानपुरा क्षेत्र, पशुपातिनाथ मंदिर क्षेत्र में छोटी पुलिया के पास से, श्मशान घाट में नाले का और नदी का सेंपल लिया है। इसको लेकर एक रिपेार्ट अधिकारी तैयार करेंगे। कोर्ट ने अनेक विभागों को तलब कर रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद विभाग रिपोर्ट बनाने में जुटे हुए है। 9 फरवरी को इन विभागों को एक संयुक्त रिपोर्ट बनाकर कोर्ट में पेश करना है। इसमें शिवना के प्रदूषण के कारणों के साथ कहां-कहां से शिवना दूषित हो रही है। इसका भी उल्लेख करना है। इसके अलावा शिवना को शुद्ध करने की योजना के साथ अब तक इसके लिए किए गए कामों को ब्यौरा भी यहां देना है।

शिवना शुद्धिकरण के लिए जनहित याचिका की सुनवाई पर न्यायालय की फटकार के बाद जिम्मेदार हरकत में आए। शुक्रवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उज्जैन, नगरपालिका एवं पैरालिगल वालेंटियर्स ने शिवना का निरीक्षण किया। 9 फरवरी तक रिपोर्ट कोर्ट में पेश करना होगी।

दूषित हो रही शिवना के शुद्धिकरण पर 15 साल में नपा 5 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर चुकी है लेकिन उसके कोई परिणाम नहीं दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में पैरालीगल वालेंटियर्स व समाजसेविका माधुरी सोलंकी ने विगत दिनों न्यायालय में एक जनहित याचिका लगाई। इस पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगरपालिका सहित कई विभागों को फटकार लगाई। इस पर शुक्रवार दोपहर प्रदूषण नियंत्रण बाेर्ड के वैज्ञानिक एचएस शर्मा, नपा स्वास्थ्य अधिकारी केजी उपाध्याय ने साेलंकी के साथ शिवना का निरीक्षण किया। रामघाट के पास 3 छतरी बालाजी मंदिर के पास बुगलिया नाले का पानी शिवना में मिलता दिखा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी ने कर्मचारियों के माध्यम से पानी का सैंपल लिया। खानपुरा क्षेत्र में गंदे का पानी, मंदिर की छोटी पुलिया के पास सीवरेज लाइन, गुदरी टोडे का पानी एवं मुक्तिधाम के पास शांतनुविहार की तरफ से नाला शिवना में मिल रहा है। एचएस शर्मा ने बताया शिवना में किस-किस तरह के केमिकल व बैक्टीरिया मिल रहे, इसकी जांच की जाएगी। 10 दिन में रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करेंगे। नपा स्वास्थ्य अधिकारी के.जी. उपाध्याय ने बताया शिवना शुद्धिकरण के लिए सीवरेज प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार हो गई है। जल्द शिवना शुद्ध होगी।

9 फरवरी तक 5 विभाग तैयार कर सौंपेगे रिपोर्ट
जानकारी के अनुसार नगर पालिका, जल संसाधन विभाग, पीएचई, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कोर्ट ने शिवना मामले की रिपोर्ट तलब की है। यह मामला जनलोकपोयोगी शिकायत सेवा में चल रहा है। 9 फरवरी तक विभागों को इसकी रिपोर्ट तैयार कर पुख्ता कारण इसमें दिखाना होगे और नदी के प्रदूषण को दूर करने के उपाए और किए जाने वाले काम भी इस रिपोर्ट में बताना होगें। सालों से मैली होती चली जा रही शिवना के प्रदूषण पर कोर्ट के रिपोर्ट तलब करने के बाद से आस जागी है कि इस बार शिवना श्ुाद्धिकरण के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जाएंगे और कागजों से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर काम दिखेगा।

इनका कहना…
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जूनियर वैज्ञानिक एचएस शर्मा ने कहा कि गठित टीम के साथ पांच जगहों से सेंपल लिए है। उनको लेकर रिपोर्ट तैयार करना है। जो न्यायालय में पेश की जाएगी।

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