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शिव की “शिवना” को सच्चे भक्त का इंतजार

मंदसौर। शहर से निकलने वाला 90 प्रश गंदा पानी अलग-अलग रास्तों से शिवना नदी में मिल रहा है। गंदे पानी के हानिकारक तत्वों के कारण शिवना नदी का पानी खराब हो गया है। एक सप्ताह पहले लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा की गई पानी की जांच में गंदलापन, बैक्टिरिया, टीडीएस, नाइट्रेड सामान्य से बहुत अधिक पाए गए। पानी में फ्लोराइड और नाईट्रेट की मात्रा अधिक होने से जीवाणु अधिक हो गए, जिससे शिवना का पानी पीने तो ठीक नहाने लायक भी नहीं बचा है।

शिवना नदी के पानी में हानिकारक बैक्टिरिया बहुत अधिक मात्रा में फैलने के कारण नदी का पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो गया है। पानी नहाने योग्य भी नहीं बचा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अनुसार शहर के नालों के गंदे पानी के कारण नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। शुक्रवार को नईदुनिया टीम ने शिवना नदी में मिल रहे नालों को देखा, शहर से निकलने वाले गंदे पानी का 90 प्रतिशत हिस्सा 7 स्थानों से सीधे शिवना नदी में मिल रहा है। नदी का पानी दूषित होने की शिकायतों के बाद जिपं सीईओ डॉ. पंकज जैन ने पीएचई को भी पानी की जांच के निर्देश दिए थे। पीएचई के अधिकारियों ने 28 दिसंबर को नदी के पानी का नमूना लेकर जांच की। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की लेब में हुई जांच में शिवना का पानी दूषित पाया गया। जबकि जांच में पानी का दसवां हिस्सा लिया था। जांच के बाद पीएचई ने जांच रिपोर्ट जिपं भेजी है जिसमें लिखा है कि शिवना नदी के पानी में फ्लोराईड एवं नाईट्रेट की मात्रा अत्यधिक है तथा जीवाणु की उपस्थिति होने से यह पानी प्रदूषित हो रहा है। इस कारण पानी पेयजल के लिए अनुपयुक्त है।

ऐसा है शिवना का पानी

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की लैब में हुई जांच में शिवना के पानी में ठोस घुलनशील तत्व (टीडीएस) 2000 से अधिक पाए गए हैं, जबकि इनकी संख्या 500 होना चाहिए। नाईट्रेट 112 पाया गया है जबकि पेयजल में यह शून्य होना चाहिए। गंदलापन 5 मेग्निशियम लिमिट है जबकि यह 9.9 है। शिवना नदी के पानी में बैक्टिरिया इतने अधिक हैं कि लैब में इनकी संख्या काउंट ही नहीं हो पाई। शुद्घ पानी में बैक्टीरिया अनुपस्थित होना चाहिए। पीएचई के कार्यपालन यंत्री संजीव दुबे के अनुसार फ्लोराइड अधिक होने पर हड्डियों व दांतों संबंधी बीमारियां होती हैं। नाइट्रेट की मात्रा अधिक होने से पीलिया, दस्त जैसी बीमारियां होती हैं, नाइट्रेट की मात्रा गंदगी धूल, कचरे व ड्रेनेज के पानी से बढ़ती है।

इन क्षेत्रों से मिल रहा है शिवना में गंदा पानी

शिवना नदी में प्रतापगढ़ पुलिया के नीचे बुगलिया खाल, खानपुरा के पीछे, नीलगर मोहल्ला, पशुपतिनाथ नवीन पुलिया, छोटी पुलिया कलेक्ट्रेट मार्ग, मुक्तिधाम के समीप से आ रहे नालों से हजारों गैलन गंदा पानी रोज शिवना नदी में मिल रहा है।

प्रदूषण बोर्ड में चल रही है लाल पानी की जांच

गुरुवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उज्जैन की टीम ने नदी के पानी का नमूना लिया था, उसकी जांच चल रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि अभी टेस्टिंग चल रही है तीन दिन बाद रिपोर्ट आएगी तब पता चलेगा कि पानी लाल कैसे हुआ है। हालांकि लच्छा रंगने से पानी लाल होने का अंदेशा जताया जा रहा है लेकिन खानपुरा के निचले हिस्से में जहां पर लच्छे रंगे जा रहे हैं उस क्षेत्र में नदी का पानी लाल नहीं है।

पूरे शहर का गंदा पानी छोड़ रहे हैं शिवना में

अभी नगर पालिका पूरे शहर का गंदा पानी शिवना नदी में ही छोड़ रही है। खानपुरा स्थित बुगलिया नाले से लेकर मुक्तिधाम क्षेत्र तक बड़े नालों के माध्यम से गंदा पानी सीधे ही नदी में छोड़ा जा रहा है। इसमें सभी तरह का प्रदूषित पानी शामिल है। नपा ने नदी किनारे कहीं भी ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाए है। कई बार शिवना को प्रदूषण मुक्त करने की मांग उठी है, पर जनप्रतिनिधि और अधिकारी अभी तक इस तरफ कोई बड़ा कार्य नहीं कर पाए हैं।

नदी के पानी का रंग लाल कैसे हो रहा है उसका कारण पता नहीं चला है। मुक्तिधाम के निकट नाले से लेकर रामघाट तक के नालों एवं खानपुरा क्षेत्र की नालियों का भी सर्वे किया है। वह पाइंट नहीं मिला है कि पानी का रंग लाल किन कारणों से हो रहा है। नालों में लाल पानी नहीं दिखा है। बोर्ड को शिकायत नहीं मिली थी यह रुटीन निरीक्षण है। शिवना के पानी का सैंपल लिया गया है इसकी जांच की जाएगी कि नदी का पानी लाल और प्रदूषित किन कारणों से हो रहा है। उसके बाद उसे रोकने की प्लानिंग की जाएगी।

-डॉ. शोभा धानेकर, सीनियर साइंटिस्ट, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उज्जैन

जांच में दूषित पाया गया है

– शिवना नदी के पानी की जांच की गई है जिसमें हानिकारक तत्व अधिक हैं। पानी दूषित है जो न पीने और न ही नहाने योग्य है। लाल पानी भी हानिकारक बैक्टिरिया के कारण ही हो रहा है। जांच के बाद रिपोर्ट जिला पंचायत में दी गई है।- संजीब दुबे, कार्यपालन यंत्री, पीएचई

शिवना के पानी की जांच, दल ने कई जगहों से लिया सैंपल

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम पहुंची शहर, किसी भी नाली में नहीं दिखा लाल पानी

शिवना नदी का पानी लाल एवं दूषित होने के कारणों की अब जांच होगी। गुरूवार को उज्जैन से आई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने रामघाट से लेकर मुक्तिधाम तक नदी में मिलने वाले छोटे से लेकर बड़े नालों तक को देखा, पर कहीं से भी लाल पानी नदी में आने का प्रमाण नहीं मिला। अब बोर्ड के दल के लिए यह जांच का विषय है कि नदी का पानी लाल क्यों हो रहा है। टीम ने शिवना नदी में एक दो जगह से पानी के नमूने भी लिए हैं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उज्जैन की टीम ने कलेक्टोरेट के नए मार्ग से रामघाट एवं मुक्तिधाम के समीप नदी के किनारे पर मिल रहे गंदे पानी के नालों एवं खानपुरा में जिन क्षेत्रों में लच्छा निर्माण होता है उन क्षेत्रों की नालियों को भी देखा। पर पिछले कुछ दिनों से शिवना नदी के पानी का रंग लाल होने का कारण अभी तक समझ में नहीं आया है। इसका कारण नदी का जल प्रदूषित होने की आशंका है। पानी की जांच के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शिवना नदी के पानी के नमूने भी लिए है। गुरूवार सुबह प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उज्जैन की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शोभा धानेकर के साथ चार सदस्यीय टीम मंदसौर आई। टीम ने नदी के पानी के लाल होने के कारणों को खोजने की कोशिश की। इसके लिए टीम ने सबसे पहले मुक्तिधाम के निकट नदी में मिल रहे गंदे पानी के नाले का सर्वे किया। बाद में पशुपतिनाथ मंदिर के निकट से रामघाट बैराज तक शिवना के किनारे पर मिल रहे गंदे पानी के नालों को देखा। नालों में लाल पानी नहीं दिखाई दिया। इसके बाद टीम खानपुरा क्षेत्र में स्थित उन क्षेत्रों में पहुंची जहां भारी मात्रा में लच्छा निर्माण होता है वहां की नालियों का भी सर्वे किया। उसके बाद दल ने पशुपतिनाथ मंदिर के निकट नई पुलिया से रस्सी से बाल्टी डालकर नदी का पानी निकाला जिसे नमूने के रूप में एक लीटर की कैन को भरा गया है। बाद में दल ने कलेक्टोरेट मार्ग से भी नदी का निरीक्षण किया। करीब दो घंटे तक उज्जैन से आई टीम ने नदी किनारे भ्रमण कर पानी के प्रदूषण होने के कारणों को जानने की कोशिश की।

 

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