Breaking News

शिव के प्रति तो अपार श्रद्धा ओर ‘शिवना’ के प्रति बेरुखी!

Story Highlights

  • विडंबना - गंदगी को साफ करने के लिए अभी तक हुई सिर्फ बातें, हाथ पर हाथ धरकर बैठे है जिम्मेदार
  • शहर का हर गंदा नाला मिल रहा सीधे नदी में

मंदसौर। शहर को वर्षों से पाल पोस रही शिवना से अभी तक सभी ने लिया ही लिया है। सालों से अपनी बेनूरी पर शिवना नदी आंसू बहा रही है और हर साल गंदा पानी नदी में मिलने की मात्रा बढ़ती ही जा रही है। गंदगी को साफ करने के लिए अभी तक सिर्फ बातें ही हो रही है। शहर का हर गंदा नाला सीधे नदी से जोड़ा जा रहा है। जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। योजनाएं तो बन रही है, लेकिन उनका क्रियान्वयन क्यों नहीं हो रहा है इसका किसी के पास जवाब नहीं है।

नगर पालिका व जिला प्रशासन वर्षों से अभी तक गंदी शिवना को साफ करने का कोई ठोस उपाय नहीं खोज पा रहे हैं। नदी में मिल रहे गंदे नाले शिवना में जहर को घोल रहे हैं। नगर पालिका ने शिवना को साफ करने के नाम पर 2 करोड़ रुपए फूंक दिए हैं, उसके बाद भी हालात सुधरने के बजाय बिगड़े ही है।

नगर पालिका द्वारा हर वर्ष शिवना की सफाई के दावे किए जाते हैं। अभी तक पशुपतिनाथ मंदिर के ठीक सामने नदी में मिल रहे गंदे पानी के नाले का विकल्प तैयार नहीं हो पाया है। 2013 में चले शिवना शुद्घिकरण अभियान में मंदिर के ठीक सामने लगभग 30 लाख रुपए में बने नाले को तोड़ दिया गया और अब नतीजा यह है कि शहर का सारा गंदा पानी मंदिर के ठीक सामने नदी में मिल रहा है। नगर पालिका ने भी शिवना सीवर लाइन योजना में अभी तक 40 लाख रुपए खर्च कर दो टैंक नुमा कुएं बनाए हैं पर उसमें भी गंदा पानी शहर से बाहर नहीं जा रहा है। स्थिति यहां तक खराब हो रही है कि इन टैंकों को जोड़ने वाली पाइप लाइन भी घटिया निर्माण के कारण जवाब दे चुकी है। गंदा पानी टैंक में जाने के बजाय सीधे मंदिर के सामने शिवना नदी में मिल रहा है। दस साल पहले जल्दबाजी में श्मशान घाट क्षेत्र में बनाए गए स्टापडेम के कारण गंदा पानी पशुपतिनाथ मंदिर के सामने ही इकठ्ठा हो रहा था। तो उसे फिर तोड़ दिया गया। पशुपतिनाथ पुलिया के दोनों तरफ पानी बहुत ज्यादा गंदा हो रहा है, सड़ांध मार रहा है। हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर भी हजारों महिलाएं गंदी शिवना में ही टाटी में दीप जलाकर अपनी श्रद्घा को अभिव्यक्त करने की कोशिश कर रही हैं। उनकी भावनाओं को जो ठेस पहुंची थी उन्हें जोड़ने का तो प्रशासन के पास कोई उपाय ही नहीं हैं।

हर तरफ गंदगी

शहर की सीमा में शिवना नदी रामघाट से लेकर मुक्तिधाम तक बहती है। लगभग चार किमी के इस क्षेत्र में तीन-चार बड़े नालों व सैकड़ों छोटी नालियों के माध्यम से शहर का सारा गंदा पानी शिवना नदी में छोड़ा जा रहा है। इसका प्रभाव यह हो रहा है कि एक अच्छी-खासी जीवित नदी गंदे पानी का डबरा बनकर रह गई है। शिवना में गंदगी डालने की शुरुआत खानपुरा से होती है जो मुक्तिधाम पर मिल रहे बड़े नाले पर जाकर ही समाप्त हो रही है। नपा ने 40 लाख रुपए शिवना सीवर लाइन योजना पर फूंककर इस योजना को अधूरा ही बंद कर दिया है। जबकि अगर इस राशि का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाता तो भी शहर का आधा गंदा पानी शिवना में नहीं मिलता।

नदी संरक्षण योजना से भी हुई बाहर

2002 में शिवना नदी को राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना में शामिल किया गया था। उस समय भी नपा के इंजीनियरों की लापरवाही से प्रोजेक्ट रिपोर्ट देरी से भेजी गई थी। इसी कारण शिवना को योजना से बाहर कर दिया गया। और इस पर खर्च होने वाला 2 करोड़ रुपए दूसरी तरफ भेज दिया गया। इसके बाद पिछले वर्ष हुए नपा चुनाव के दौरान भी भाजपा के घोषणा पत्र में शिवना को साफ कर सोंदर्यीकरण करने की बात कही गई थी। एक साल में तो नपा परिषद ईच्छा शक्ति दिखा नहीं पाई हैं अब आगे देखना दिलचस्प होगा।

-शिवना नदी में गंदे पानी को मिलने से रोकने के लिए शहर में सीवर लाइन प्रोजेक्ट की फाइल भोपाल भेजी है, वहां अभी प्रक्रिया चल रही है। प्रोजेक्ट लागू होने पर शहर में तीन जगह ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर गंदा पानी नदी में मिलने से रोकेंगे। इसके अलावा अन्य उपाय भी किए जाएंगे।-प्रहलाद बंधवार, नपाध्यक्ष

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts