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शीतला सप्तमी पर्व 27 मार्च के उपलक्ष्य में विशेष

अपरम्पार है चमत्कारिक खिड़की माताजी की लीला

घरोंदे बनाने से पूरी होती है घर की मन्नत, निःसंतान को मिलता है चिराग

भारतीय संस्कृति, धार्मिक स्थलों और गौरवमयी इतिहास की त्रिवेणी माने जाने वाले मन्दसौर नगर की पवित्र धरा जहां विश्व के मानचित्र पर अष्टमुखी भगवान श्री पशुपतिनाथ महादेव के मन्दिर को लेकर अंकित है। इसी मन्दसौर मंे जीवनदायिनी माँ शिवना के तट पर स्थित अतिप्राचीन खिड़की माताजी का मंदिर भी पौराणिक महत्व, अभूतपूर्व इतिहास और चमत्कारिक दर्शनों को लेकर एक विशेष स्थान रखता है। खिड़की माताजी की लीला न केवल चमत्कारिक बल्कि अपरम्पार भी है।

माताजी के दरबार में करीब 4 पीढ़ी से सेवा-पूजा कर रहे परिवार के प्रतिनिधियों पंडितगण कैलाशजी, दुर्गाशंकरजी, रमेशजी व सुरेशजी परमार के मुताबिक खिड़की माताजी की चमत्कारिक प्रतिमा करीब 350 वर्ष पूर्व मंदिर के समीप ही शिवना तट पर एक बरगद के पेड़ के नीचे प्रकट हुई थी। प्राकट्य के बाद से ही माताजी का आशीर्वाद और चमत्कार देखने लायक रहा। लोगों का हर कष्ट हरने वाली खिड़की माताजी के मन्दिर में न केवल रोगों से मुक्ति मिलती है बल्कि मंदिर परिक्षेत्र में घरोंदा भर बनाकर मन्नत मांगने से भक्तों के मकान की मन्नत भी पूरी हो जाती है। इतना ही नहीं निःसंतान दम्पत्ति व परिवार पर भी माता का आशीर्वाद बरसता है और  संतान की प्राप्ति होती है। बताया जाता है कि, मन्नत पूरी होने पर भक्त यहां माता के दरबार में खीर, पुड़ी व हलवे की प्रसादी का भोग लगाकर धन्यवाद भी ज्ञापित करते है।

नवरात्रा में उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब- वैसे तो खिड़की माता के दरबार में भक्त अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते ही है लेकिन नवरात्रा में यहां का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। चैत्र और शारदेय नवरात्रा में माता के दरबार में न केवल विविध आयोजन होते है बल्कि भक्तों का सैलाब भी जमकर उमड़ता है। मन्दसौर से लेकर मालवांचल और सीमावर्ती राज्यों से लेकर दूर-दराज तक के लोग यहां पहुंचते है और घरोंदे बनाकर अपनी मन्नत माता के दरबार में करते है। चैत्र नवरात्रा में नगरपालिका और मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में लगने वाला मेला आकर्षण का केन्द्र रहता है।

आठ सालों से जारी है कायाकल्प- वर्षों पुराने अति प्राचीन धार्मिक स्थलों में शुमार श्री खिड़कीमाता मंदिर के कायाकल्प को लेकर करीब 9 साल पहले श्री खिड़की माता मंदिर समिति  और जनप्रतिनिधियों ने पहल की जो निरंतर जारी है। 9 सालों में धोलपुर के लाल पत्थरों से मंदिर आज पूरी तरह सजकर तैयार है। माताजी के दरबार में भक्तों के लिये आवश्यक सुविधाएं तैनात है। इतना ही नहीं 23 सितम्बर 2009 से शुरू हुआ जिर्णोद्धार आज करीब-करीब पूर्णता की ओर है। मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम ने भी खिड़की माता मंदिर के पौराणिक महत्व और भक्तों की आस्था को देखते हुए यहां दर्शनार्थियों के लिये 30 लाख रूपये की लागत से विश्राम शेड सहित अन्य निर्माण कार्यों को पूर्ण करवाया है। इसके अलावा सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक यशपालसिंह सिसौदिया, पूर्व नपाध्यक्ष स्व. प्रहलाद बंधवार, समाजसेवी कोमल बाफना व मोहनलाल चौधरी (चम्बल रेडियों) सहित जनप्रतिनिधियों ने भी विभिन्न माध्यमों से मंदिर के विकास में अपना हरसंभव योगदान दिया है। आज पर्यटन के मानचित्र पर खिड़की माता मंदिर एक दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित होता दिखाई दे रहा है। माताजी के दरबार में हर वर्ग पूरी श्रद्धा से विकास के लिये आहूति के लिये कटिबद्ध दिखाई देता है।

 

अब सुलभ हुआ माता के दरबार में पहुंचना

सालों पहले खिड़की माता मंदिर तक पहुंचने के लिये भक्तों को भारी तपस्या करना पड़ती थी। पथरीले और जंगल भरे इलाकों से गुजरकर भक्त यहां पहुंचते थे लेकिन विकास के दौर में अब माताजी के मंदिर तक पहुंचना पूरी तरह सहज व सुलभ हो गया है। मंदिर समिति और जनप्रतिनिधियों के संयुक्त प्रयासों से मंदसौर बायपास से सीधे मन्दिर तक न केवल पक्का रोड़ बन गया है बल्कि जगमगाती लाईटे देखकर ही विकास का अंदाजा लग जाता है।

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