Breaking News
शैल व भित्त‍ि चित्र

मन्‍दसौर‍ जिले के शैल चित्र

शैल-चित्रों की दृष्टि से मन्‍दसौर जिला अति सम्‍पन्‍न है। यूरोप के अनेक संशोधकों ने इस क्षेत्र में आकर अपना शोधकार्य किया है। इस जिले की भानपुरा तहसील में शैल-चित्रों की खोज का श्रीगणेश स्‍व. एम.जी. दीक्षित ने व जावद-मनासा तहसील (जिला नीमच) में श्री गिरजाशंकर रूनवाल (मन्‍दसौर) ने किया। इन शैल-चित्रों को विश्‍व स्‍तर की ख्‍याति डॉ. वि.श्री. वाकणकर ने प्रदान कराई।
भानपुरा तहसील के प्रकाशित शैलचित्र इस प्रकार है :- इन्‍द्रगढ़, सीताखर्डी, कतीरिया कुण्‍ड, बिल्‍लीखोह, झींताखोह, गेबसाहब, रामकुण्‍ड, रामगढ़, मोड़ी (पूर्व और उत्तर), खाकली, कँवला (उत्तर व दक्षिण), सुजानपुरा, मालासेरी, खिलचीपुरा, गोलम्‍बानाला, ताखाजी, हिंगलाजगढ़, हरिगढ़, गाँधीसागर (3 व 6), चतुर्भुजनाथ, चिब्‍बरनाला, चँवरियादेह, नरसिंहद्वार, दाँतला, ऐरिया, नाहरसिंगी, जग्‍गाखड़ला, चिब्‍बरनाला (निचला भाग),। भानपुरा क्षेत्र के शैलचित्रों में नाना प्रकार के वन-महिष, नीलगाय, हाथी, साँभर, चीता, शेर गैंडा व अन्‍य जीवों व उनके शिकार का जीवन्‍त अंकन है। इसके अलावा इनमें युद्ध, पशुपालन, नृत्‍य, सामूहिक नृत्‍य, रथयात्रा, सामूहिक सम्‍भोग आदि मानवीय जीवन के अनेक महत्‍वपूर्ण कार्यकलापों का अंकन हुआ है। जिले में चतुर्भुजनाथ शैलचित्रों का सबसे बड़ा केन्‍द्र है।
जावद एवं मनासा तहसील (जिला नीमच) के शैलचित्र विषय भानपुरा के समान ही है परन्‍तु प्राचीनता की दृष्टि से, डॉ. वाकणकर के अनुसार भानपुरा क्षेत्र के सर्वाधिक प्राचीन चित्र उत्तरपुराश्‍मकाल के है जबकि जावद क्षेत्र के मध्‍याश्‍मकाल के है।

मन्‍दसौर‍ जिले के भित्त‍ि चित्र

मन्‍दसौर जिले में भित्ति-चित्रों के निर्माण की भी परम्‍परा रही है। इनमें प्राचीन व दुर्लभ घटनाओं का अंकन किया गया है। भित्ति-चित्रों में रागमाला, आखेट, देवतागण, सैन्‍य संचलन, युद्ध, सम्‍भोग आदि दृश्‍यों को प्रधानता है। इन चित्रों का सूक्ष्‍म अध्‍ययन करने से ज्ञात होता है कि इनमें राजपूत, मुगल और मराठा शैलियों का सम्मिश्रण है लेकिन उनकी अन्‍तर-आत्‍मा में मालवा शैली की छाप भी निहित है।
अविभाजित मन्‍दसौर जिले में ये चित्र मन्‍दसौर में सज्‍जनलाल सागरमल पोरवाल, पीपली वाला मन्दिर (शहर), शांतिलाल नाहर, सुन्‍दरलाल कागला, मांगीलाल कोठारी, केसरीमल डाँगी, हरीदास मकनदासजी, पन्‍नालाल बाबरेचा आदि के मकानों व लक्ष्‍मण मन्दिर मन्‍दसौर में विद्यमान है। इनके अलावा श्री यशंवतराव होल्‍कर की छत्री (भानपुरा) में, नीमच सिटी में मदनसिंह चौधरी, रामपुरा में जगदीश मन्दिर, डिकेन में कन्‍हैयालाल रामबक्ष पाटीदार की हवेली, पिपल्‍या रावजी में राव जसवंतसिंह के दुर्गा भवन की रंगशाला व ग्राम भाटखेड़ी में राव भीमसिंह के पूर्वजों की एक छत्री आदि भी चित्रित है।
काल निर्धारण की दृष्टि से पिपल्‍या रावजी (जिला नीमच) के चित्र सर्वाति प्राचीन हैं, जो 1731 ई. में स्‍थानीय चित्रकार गोदर दमामी ने चित्रित किये हैं। नीमच सिटी में मदनसिंह चौधरी की हवेली में चित्रित चित्र सन् 1777 में कचनारा के चित्रकार किशन चारण व दशरथ धनगर द्वारा चित्रित किए है। मन्‍दसौर के भित्ति-चित्र तिथि विहिन हैं परंतु शैली के आधार पर डॉ. वि.श्री. वाकणकर ने इनका काल 19 वीं शताब्‍दी निर्धारित किया है।
ये भित्ति-चित्र लोगों के व्‍यक्तिगत मकानों व हवेलियों में बने हैं अत: इनका अवलोकन करने के लिये भवन-स्‍वामियों से पूर्व पत्र-व्‍यवहार कर स्‍वीकृति प्राप्‍त कर लेना उचित है।

मन्‍दसौर जिले में संरक्षित स्‍मारकों की सूची

(अ) राज्‍य शासन द्वारा संरक्षित स्‍मारकों की सूची :

क्र.स्‍मारक का नामस्‍थानतहसील
  • 1
सूरज मन्दिरखिलचीपुरामन्‍दसौर
  • 2
ठा. चिमनसिंह की गढ़ीअचेरामन्‍दसौर
  • 3
शिव मन्दिरअफजलपुरमन्‍दसौर
  • 4
छत्रीअफजलपुरमन्‍दसौर
  • 5
लक्ष्‍मीनारायण मन्दिरअफजलपुरमन्‍दसौर
  • 6
घोटेश्‍वर महादेव मन्दिरखिलचीपुरामन्‍दसौर
  • 7
दुधलेश्‍वर महादेव मन्दिरचिरमोलियामन्‍दसौर
  • 8
वाराह मन्दिरकंवलाभानपुरा
  • 9
उत्‍खन्‍न स्‍थलइन्‍द्रगढ़भानपुरा
  • 10
तमोली मन्दिरसंघाराभानपुरा
  • 11
पोला डूंगर की गुफाएँकालाखेड़ागरोठ
  • 12
खेजड़िया भूपकिशोरपुरासुवासरा

(ब) केन्द्री य पुरातत्त्व विभाग द्वारा संचालित स्मा‍रकों की सूची :

क्र.स्‍मारक का नाम स्‍थानतहसील
  • 1
कीर्ति स्‍तम्‍भसौंधनीमन्‍दसौर
  • 2
धर्मराजेश्‍वर मन्दिर एवं बौद्ध गुफाएँचन्‍दवासागरोठ

जिले की पुरासम्‍पदा के संग्रहण का कार्य सर्वप्रथम डॉ. वि.श्री. वाकणकर (उज्‍जैन) ने किया। कलेक्‍टर श्री पी.एस. तोमर (26-08-1982 ** 19-04-1985) की गहन रूचि के कारण सर्वप्रथम खुरा पुरातत्त्व संग्रहालय की स्‍थापना की गई। इस संग्रहालय के प्रथम प्रभारी के रूप में लेखक ने अपनी सेवाएँ (29-08-1983 ** 24-09-1988) प्रदान की। सन् 1992 में संग्रहालय का नवीन भवन बना। सन् 1994 में इसमें पुरावशेष स्‍थानांतरित हुए। दिनांक 22-09-1997 को इसका उद्घाटन पर्यटन एंव संस्‍कृति मंत्री डॉ. विजयलक्ष्‍मी साधौ द्वारा सम्‍पन्‍न हुआ।

दक्षिणाभिमुखी, दो मंजिला इस संग्रहालय में सात वीथिकाएँ है। दाहिने ओर से प्रवेश करने पर शैव वीथिका, वैष्‍णव वीथिका (बीच में) देवी वीथिका (अन्‍त में) दूसरी मंजिल पर पहले नायिका वीथिका, बीच में चित्र वीथिका व अंत में जैन वीथिका है। इस संग्रहालय में अविभाजित मन्‍दसौर जिले की आठों तहसीलों से कोई 595 पाषाण प्रतिमाएँ, 5 धातु प्रतिमाएँ, 9 अभिलेख, 720 सिक्‍के व 1 स्‍वण्र आभूषण संग्रहित कर प्रदर्शित किये गये है। संग्रहालय सोमवार व अन्‍य शासकीय अवकाशों पर बन्‍द रहता है।

चित्रकला

पर्यटक के मन में लीक से हटकर कुछ नया देखने की लालसा होती है मन्‍दसौर जिले में शैलचित्र एवं भित्तिचित्र ऐसे ही आकर्षण है। आदिमानव के आश्रम स्‍थल अनेक शैलाश्रय चिल्‍वरनाला चतुर्भुजनाथ जिले में मौजुद है इनकी छतों पर मानव ने प्राकृतिक रंगों से अनेक चित्र बनाए है, जो तत्‍कालीन मानव जीवन के सभी पहलुओं को अभिव्‍यक्ति प्रदान करते हैं। शैलचित्रों के अतिरिक्‍त कला की दूसरी विधा भित्तिचित्र भी मन्‍दसौर नगर की हवेलियों में रेखांकित है।

मूर्तिकला

इस क्षेत्र की मूर्तिकला देश में ही नहीं वरन विदेशों में अपनी उत्‍कृष्‍टता के लिए पहचाना जाती है। हिंगलाजगढ से प्राप्‍त नंदी व उमामहेश्‍वर की प्रतिमाओं ने क्रमश: फ्रांस एवं वॉशिंगटन में आयोजित भारत महोत्‍सव में अपनी अनुपम कला की अमिट छाप दर्शकों पर अंकित की।