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श्री गुरू गोबिन्द सिंघ जी के 350वें प्रकाश पर्व पर व्याख्यान का आयोजन

हिन्दुस्तान को जगाने का काम किया श्री गुरू गोविंद सिंघ जी ने-अरूण जैन, बुधवार की शाम श्री गुरू गोबिन्द सिंघ जी के 350वें प्रकाश पर्व पर आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता के पद से संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मध्यभारत के क्षेत्रीय प्रचारक अरूण जैन ने कहा कि बलिदान की परम्परा की शुरूआत गुरू गोविन्दसिंघ के दौर से शुरू हुई थी। गुरू गोविन्द सिंघ ही वे व्यक्तित्व थे जिन्होंने न केवल हमें कौन पराया और कौन अपना की समझाईश दी बल्कि भक्ति की आराधना से शक्ति आराधना की ओर का मार्ग भी दिखाया।
क्षेत्रिय प्रचारक अरूण जैन ने कहा कि सिक्ख समाज का इतिहास माटी की सेवा और बलिदान का रहा है। गुरू नानकदेवजी से लेकर गुरू तेगबहादुरसिंघजी और गुरू गोविन्दसिंघजी सहित सिक्ख समाज के गुरूओं ने समाज की रक्षा और देश के गौरव के लिये जो प्रयास किये वह हमारी अमूल्य विरासत है। आपने कहा कि जब-जब भी समाज में अवनति और अव्यवस्था का दौर आता है तब-तब गुरू गोविन्दसिंघजी जैसे व्यक्तित्व प्रकट होते है जो इन चुनौतियों से निपटने का बीड़ा उठाते है। क्षेत्रिय प्रचारक श्री जैन ने कहा कि छूआछूत या अस्पृश्यता का हमारी संस्कृति और परम्पराओं में कभी कोई स्थान नहीं रहा है। जन्म या जाति के आधार पर छूआछूत कभी नहीं रही। उन्होंने कहा कि स्वयं गुरूनानक देव ने संगत-पंगत और गुरूद्वारा में कहीं कोई भेदभाव नहीं रहेगा यह व्यवस्था शुरू की थी और इसे ओर अधिक सुदृढ़ बनाने का काम सिक्ख गुरूओं ने निरंतर किया हैं। आपने कहा कि गुरू गोविन्दसिंघ जैसे वीर पुरूषों के समर्पण और बलिदान की भावना की वजह से ही हिन्दुस्तान की संस्कृति आज भी अक्षुण्ण है। आपने कहा कि सोऐ हुए हिन्दुस्तान को झंझोटकर जगाने का काम किसी ने किया तो वह गुरू गोविन्द सिंघजी ने किया। उन्होंने कहा कि गुरू गोविन्दसिंघ जी किसी एक स्थान के नहीं थे और न ही किसी धर्म विशेष के ही थे बल्कि वे भुरे भारतवर्ष और समाज की धरोहर थे जिन्होंने धर्म और भारत की रक्षा का मार्ग हमें दिखाया।
क्षेत्रिय प्रचारक अरूण जैन ने कहा कि पूरे विश्व को सुख-शांति का संदेश किसी ने दिया है तो वह केवल हिन्दुस्तान ने दिया है। आज इस दौर में भी हमें थकने और रूकने की जरूरत नहीं है बल्कि गुरू गोविन्द सिंघजी जैसे महापुरूषों से प्रेेरणा लेकर समरस समाज की स्थापना का संकल्प लेना होगा तभी भारत फिर से विश्व गुरू के मुकाम पर अपनी प्रतिष्ठा अर्जित कर पाएगा।
इस अवसर पर अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय सिक्ख संगत के क्षेत्रीय अध्यक्ष सरदार अजीतसिंघ नारंग ने कहा कि भक्ति की आराधना करने वाले हाथों में शस्त्र थमाने का काम गुरू गोविन्दसिंघ जी ने किया। उन्होंने देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिये उस समय एक बहादुरों की फौज तैयार कर उसे खालसा फौज का नाम दिया। आपने कहा कि यह केवल गुरू गोविन्द सिंघ जी का 350वां पर्व नहीं है बल्कि यह देश के स्वाभिमान, देश की अस्मिता, शस्त्र और भक्ति की आराधना का प्रकाश पर्व है।
विशिष्ट अतिथि म.प्र. पंजाबी साहित्य अकादमी के निदेशक सरदार इन्द्रजीतसिंह खनूजा ने कहा कि हिन्दू धर्म और देश के लिये सबकुछ न्यौछावर कर देने वाले गुरू गोविन्द सिंघजी के प्रकाश पर्व पर मन्दसौर में आयोजित कार्यक्रम न केवल एक अच्छी शुरूआत है, बल्कि देश के कर्णधारों को वीरता के इतिहास से अवगत कराने का सशक्त माध्यम भी है। वीर महापुरूषों के घटनाक्रमों और बलिदान की कहानियां पाठ्यक्रमों में शामिल की जानी चाहिए। इस अवसर पर श्री गुरू गोबिन्द सिंघ 350वां प्रकाश पर्व उत्सव समिति के अध्यक्ष पी.एल. लबाना भी मंचासीन थे।
समारोह में प्रमुख रूप से सांसद सुधीर गुप्ता, म.प्र. किसान कल्याण आयोग अध्यक्ष बंशीलाल गुर्जर, पूर्व मंत्री एवं मनासा विधायक कैलाश चावला, पूर्व मंत्री एवं मल्हारगढ़ विधायक जगदीश देवड़ा, मन्दसौर विधायक यशपालसिंह सिसौदिया, गरोठ विधायक चन्द्ररसिंह सिसौदिया, नीमच विधायक दिलीपसिंह परिहार, आयोजन समिति के संरक्षक गुरूचरण बग्गा व दशरथसिंह झाला, जिला भाजपा अध्यक्ष देवीलाल धाकड़, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रियंका गोस्वामी, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष मदनलाल राठौर, नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार, हाईकोर्ट के से.नि. न्यायाधीश जी.डी. सक्सेना, से.नि. जिला न्यायाधीश रघुवीरसिंह चुण्डावत, अन्तर्राष्ट्रीय भागवताचार्य देवेन्द्र शास्त्री, भाजपा जिला महामंत्रीद्वय महेन्द्र चौरड़िया व अजयसिंह चौहान सहित सर्वश्री सुरेश रूपरा, पं. राजेश दीक्षित, नानालाल अटोलिया, निहालचंद मालवीय, गौरव अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
समारोह का शुभारंभ अतिथियों ने भारतमाता व गुरू गोविन्द सिंघजी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर सरोपा और कृपाण भेंटकर अतिथियों का सम्मान समिति के मार्गदर्शक सत्यनारायण सोमानी, संयोजक प्रीतेश चावला, अध्यक्ष पी.एल. लबाना, सचिव विनोद मेहता आदि ने किया। अतिथि परिचय समिति के संरक्षक गोपालकृष्ण पाटील ने प्रस्तुत किया। प्रेरक गीत श्यामसुन्दर चौधरी ने प्रस्तुत किया। समारोह का संचालन बालाराम गुप्ता ने किया व आभार समिति अध्यक्ष पी.एल. लबाना ने माना। व्याख्यान शाम 6.30 बजे शुरू हुआ जो रात 8 बजे तक चला।

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